Autobiography of a yogi pdf in hindi

Home / Religious & Spiritual Figures / Autobiography of a yogi pdf in hindi

And not a foreigner, but he himself is one of such wise men – in summary, this book is written by a yogi himself about yogis.

Autobiography Of A Yogi Hindi

मेरे सदगुरूदेवपूज्यपाद सदगुरूदेव संत श्री आसारामजी महाराज

किसी भी देश की सच्ची संपत्ति संतजन ही होते है | ये जिस समय आविर्भूत होते हैं, उस समय के जन-समुदाय के लिए उनका जीवन ही सच्चा पथ-प्रदर्शक होता है | एक प्रसिद्ध संत तो यहाँ तक कहते हैं कि भगवान के दर्शन से भी अधिक लाभ भगवान के चरित्र सुनने से मिलता है और भगवान के चरित्र सुनने से भी ज्यादा लाभ सच्चे संतों के जीवन-चरित्र पढ़ने-सुनने से मिलता है | वस्तुतः विश्व के कल्याण के लिए जिस समय जिस धर्म की आवश्यकता होती है, उसका आदर्श उपस्थित करने के लिए भगवान ही तत्कालीन संतों के रूप में नित्य-अवतार लेकर आविर्भूत होते है | वर्तमान युग में यह दैवी कार्य जिन संतों द्वारा हो रहा है, उनमें एक लोकलाडीले संत हैं अमदावाद के श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ योगीराज पूज्यपाद संत श्री आसारामजी महाराज |

महाराजश्री इतनी ऊँचायी पर अवस्थित हैं कि शब्द उन्हें बाँध नहीं सकते| जैसे विश्वरूपदर्शन मानव-चक्षु से नहीं हो सकता, उसके लिए दिव्य-द्रष्टि चाहिये और जैसे विराट को नापने के लिये वामन का नाप बौना पड़ जाता है वैसे ही पूज्यश्री के विषय में कुछ भी लिखना मध्यान्ह्य के देदीप्यमान सूर्य को दीया दिखाने जैसा ही होगा | फ़िर भी अंतर में श्रद्धा, प्रेम व साहस जुटाकर गुह्य ब्रह्मविद्या के इन मूर्तिमंत स्वरूप की जीवन-झाँकी प्रस्तुत करने का हम एक विनम्र प्रयास कर रहे हैं |

1.

autobiography of a yogi pdf in hindi

भविष्यवेत्ताओं की घोषणाएँ :

बाल्याअवस्था से ही आपश्री के चेहरे पर विलक्षण कांति तथा नेत्रों में एक अदभुत तेज था | आपकी विलक्षण क्रियाओं को देखकर अनेक लोगों तथा भविष्यवक्ताओं ने यह भविष्यवाणी की थी कि ‘यह बालक पूर्व का अवश्य ही कोई सिद्ध योगीपुरुष हैं, जो अपना अधूरा कार्य पूरा करने के लिए ही अवतरित हुआ है | निश्चित ही यह एक अत्यधिक महान संत बनेगा…’ और आज अक्षरशः वही भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हो रही हैं |

सम्पूर्ण जीवनी -   DOWNLOAD

दादागुरु स्वामी श्रीलीलाशाहजी महाराज जीवनी - DOWNLOAD

Autobiography of a Yogi in Hindi PDF | योगी कथामृत

Title : योगी की आत्मकथा
Pages : 627
File Size : 158 MB
Author : परमहंस योगानन्द
Category : Biography
Language : Hindi
To read : Download PDF
For support : [email protected]

केवल पढ़ने हेतु : मनुष्य तो वही है जो स्वार्थ के लिए लड़ता न हो। अहंकार में पड़कर अपनी ही टांग हर जगह अड़ाये रखना

और दूसरे साथियों के उसमें से विचारों का भी मूल्य न समझना परस्पर के व्यवहार को चौपट कर देता है। घर और समाज का वही मालिक बु़द्विमान है जो प्रायः हर व्यवहार में अपने साथियों, परिवार वालों तथा अनुगामीयों से सम्पति लेता है। कहा है- "पंच सरीखे कीजै काज, हारे जीते नाहीं लाज"

साथियों से संपत्ति लेकर काम करने से अपनी श्रेष्ठता घटती नहीं। अपितु बढ़ जाती है। अनेक विचारों के मिल जाने पर प्रायः बिगड़ता नहीं। यदि समय से बिगड़ भी जाये तो उसकी हानि केवल व्यवस्थापक के अपने सिर पर नहीं आती। उसमें सब हिस्सेदार हो जाते हैं और परस्पर व्यवहार मधुर बना रहता है।

कई बार मनुष्य से गलती हो जाती है, परन्तु वह अपनी गलती को स्वीकारता नही है इससे भी व्यवहार बिगड़ जाता है। अपनी गलती न मानने के मूल में भी अहंकार ही है। मनुष्य समझता है कि हम अपनी गलती स्वीकार करेंगे तो लोग हमें ही यह हीन समझेंगे, परन्तु यह केवल भूल है। विनम्रता पूर्वक सच्चे हृदय से अपनी गलती स्वीकार लेने वाले पर सबकी श्रद्वा हो जाती है।

अतएव मनुष्य यदि अपना जीवन सुखी बनाना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह भौतिक भोगो को लालच, स्वार्थ की आसक्ति एवं अहम भावना का त्याग करके साथियों में मधुरतम प्रेम का व्यवहार स्थापित करे।

यदि साथी सचमुच बुरा बन जाता है तो व्यवहार नहीं बनता; परन्तु अधिकोशतः परस्पर का व्यवहार इसलिए बिगड़ जाता है कि एक दूसरे को ठीक से समझने में त्रुटि करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ती हमारे सुधार के लीए ऐसा शब्द कहता है जो हमें कटु लगता है और हम यह मान लेते हैं कि वह हमारी बुराइयों को देखता रहता है। यद्यपि कहने वाला का हृदय हमारे लिए साफ और सरल होता है।

कई बार हमारा साथी उत्तेजना में आकर सचमुच कटु कह देता है और इस आधार पर हम अपने साथी को अपना दोष-दर्शक, छिद्रान्वेषी और वैरी समझ लेते है; परन्तु वह हमें कटु कहने के तत्काल बाद उस पर घोर पश्चाताप करता है और मन ही मन सोचता है कि मैंने उसको नाहक कटु कहा।

More: ओशो की प्रसिद्ध पुस्तक 'संभोग से समाधी की ओर' (PDF)

हम कई बार यह माने रहते हैं कि अमुक व्यक्ति हमसे द्वेष करता है और इसलिए हमें उसके यहां नहीं जाना चाहिए; परन्तु यदि हम उसके यहां चले जाते हैं तो वह हमारी आवभगत करता है, प्रसन्न होता है और पूर्व और पूर्व का धूमिल व्यवहार निखर जाता है।

.

PDF डाउनलोड करने के लिए लिंक नीचे दिया गया है

Autobiography of a Yogi PDF Hindi Book | योगी कथामृत

योगी कथामृत पुस्तक का विवरण : योगानन्दजी की “आत्मकथा” का महत्त्व इस तथ्य के प्रकाश में बहुत अधिक बढ़ जाता है कि यह भारत के ज्ञानो पुरुषों के विषय में अंग्रेज़ी में लिखी गयी गिनी-चुनी पुस्तकों में से एक है, जिसके लेखक महोदय न तो पत्रकार हैं और न कोई विदेशी, बल्कि वे स्वयं वैसे ही ज्ञानी महापुरुषों में से एक हैं-सारांश यह कि योगियों के विषय में स्वयं एक योगी द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक है।…………

Tap to unlock your next Hindi story

Yogi Kathamrita Pustak ka Vivaran : Yogaanandajee ki “aatmakatha” ka mahattv is tathy ke prakaash mein bahut adhik badh jaata hai ki yah bhaarat ke gyaano purushon ke vishay mein angrezee mein likhee gayee ginee-chunee pustakon mein se ek hai, jisake lekhak mahoday na to patrakaar hain aur na koee videshee, balki ve svayan vaise hee gyaanee mahaapurushon mein se ek hain-saaraansh yah ki yogiyon ke vishay mein svayan ek yogee dvaara likhee gayee yah pustak hai………….

Short Description of the Yogi Kathamrita PDFBook : The importance of Yoganandji’s “autobiography” increases greatly in the light of the fact that it is one of the few books written in English about the wise men of India, whose author is neither a journalist nor a journalist.

जन्म परिचय

संत श्री आसारामजी महाराज का जन्म सिंध प्रान्त के नवाबशाह जिले में सिंधु नदी के तट पर बसे बेराणी गाँव में नगरसेठ श्री थाऊमलजी सिरूमलानी के घर दिनांक 17 अप्रैल 1941 तदनुसार विक्रम संवत 1998को चैत्रवद षष्ठी के दिन हुआ था | आपश्री की पुजनीया माताजी का नाम महँगीबा हैं | उस समय नामकरण संस्कार के दौरान आपका नाम आसुमल रखा गया था |

2.