Biography of varahagiri venkata giri in hindi

Home / Political Leaders & Public Figures / Biography of varahagiri venkata giri in hindi

गिरि को यह विश्वास था कि सभी समस्याओं का व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण से समाधान किया जा सकता है. गिरि का बचपन और प्रारंभिक जीवन

वराह गिरि वेंकट गिरि (वी.वी.गिरि) का जन्म 10 अगस्त, 1894 को ओडिशा के बेहरामपुर में एक तेलुगू भाषी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्होंने दो बार क्रमशः वर्ष 1926 और 1942 में ‘ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया.

भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने के लिए वी. वी. उनका सपना था कि वे कानून के विशेषज्ञ बनें, परन्तु जब उन्हें आयरिश (आयरलैंड) राष्ट्रवादियों के प्रभाव में आने और गांधी के संपर्क में आने का मौका मिला, तो उन्होंने अपने देश के लिए काम करने का फैसला किया। उन्होंने महसूस किया कि अगर भारत की श्रम-शक्ति को संगठित किया जाय तो न केवल उनके हालत में सुधार किया जा सकता है बल्कि वे ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी के संघर्ष में एक शक्तिशाली ताकत के रूप में काम आ सकते हैं.

स्रोत: http://presidentsofindia.netii.net/data1/images/varahagiri_venkata_giri.jpg

वी.वी.

उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. गिरि

जन्म: 10 अगस्त 1894, बहरामपुर, ब्रिटिश इंडिया

मृत्यु: 23 जून 1980, मद्रास, तमिल नाडु

कार्य क्षेत्र: श्रम आंदोलन के नेता, भारत के चौथे राष्ट्रपति

भारतीय उद्योगों और अन्य क्षेत्रों में आज श्रमिकों के अधिकारों की जो बढ़ी हुई ताकत दिखाई देती है उसका श्रेय करिश्माई कार्यकर्ता और सामाज सुधारक वी.वी.

वी. अपनी कानून की शिक्षा के लिए उन्होंने वर्ष 1913 में डबलिन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. वी. 85 वर्ष की अवस्था में 23 जून 1980 को उनका निधन चेन्नई में हो गया.

वर्ष 1974 में भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने ‘श्रम से संबंधित मुद्दों पर शोध, प्रशिक्षण, शिक्षा, प्रकाशन और परामर्श’ के लिए एक स्वायत्त संस्था की स्थापना की.

ब्रिटिश काल में सामाजिक  पतन कमजोर वर्गों के लिए चिंता का विषय था, परन्तु वी.वी. वर्ष 1931-1932 में एक प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया. गिरी सन 1967 में ज़ाकिर हुसैन के काल में भारत के उप राष्ट्रपति एवं जब ज़ाकिर हुसैन के निधन के समय भारत के राष्ट्रपति का पद खाली रह गया था, तो उनको कार्यवाहक राष्ट्रपति का स्थान दिया गया। इसके बाद निर्वाचन हुआ और सन 1969 में वी.वी.

उन्होंने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गृहनगर में पूरी की. वे कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में वर्ष 1936 के आम चुनाव (ब्रिटिश कालीन) में खड़े हुए और इसके साथ ही राजनीति से उनका वास्ता शुरू हुआ. वर्ष 1957 में जब राज्यपाल बने, उसके बाद भी वे ‘इंडियन कांफ्रेंस ऑफ़ सोशल वर्क’ के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहे. उनके प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 1957 में ‘द इंडियन सोसाइटी ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स’ की स्थापना की गयी.

ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए अपनी प्रतिबद्धता और मेहनत के कारण वे ‘आल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन’ के अध्यक्ष निर्वाचित किये गए. गिरि को उच्चायुक्त के रूप में सीलोन (श्रीलंका) भेजा गया था। वहाँ से अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वे भारत लौट आए और पहली लोकसभा के लिए वर्ष 1952 में चुने गए तथा वर्ष 1957 तक कार्य किया। इस दौरान गिरि को केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य बनाया गया और वे भारत के श्रम मंत्री बने। वे इस मंत्रालय में वर्ष 1952 से 1954 तक बने रहे।

लोकसभा में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्हें प्रतिष्ठित शिक्षाविदों के समूह का नेतृत्व करने, श्रम एवं औद्योगों से संबंधित मामलों के अध्ययन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने का कार्य सौंपा गया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 1957 में ‘द इंडियन सोसाइटी ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स’ की स्थापना की गयी।

वे उत्तर प्रदेश, केरल, मैसूर में राज्यपाल भी नियुक्त किए गए। वी.वी.

उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में भी सक्रीय रूप से भाग लिया.

आजादी से पूर्व वी.वी.

biography of varahagiri venkata giri in hindi

गिरि भारत के राष्ट्रपति पद के आलावा उत्तर प्रदेश, केरल और कर्णाटक के राज्यपाल भी रहे।

वी.वी. गिरि ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के लिए श्रमिक आंदोलन में लौट आए। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद वर्ष 1946 के आम चुनाव के बाद वे श्रम मंत्री बनाए गए। वी.वी.