Dr sarvepalli radhakrishnan in hindi biography
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डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म कब हुआ?
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तुर्माणी गांव में हुआ था।
Q. Sarvepalli Radhakrishnan)जन्म दिनांक 5 सितंबर 1888 जन्म भूमि तिरूतनी, तमिलनाडु मृत्यु 17 अप्रैल, 1975, चेन्नई, तमिलनाडु पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी माता का नाम सीताम्मा पत्नी सिवाकामू कर्म-क्षेत्र शिक्षाविद, महान् दार्शनिक, महान् वक्ता नागरिकता भारतीय शिक्षा एम.ए. पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के ज्ञानी, एक महान् शिक्षाविद, महान् दार्शनिक, महान् वक्ता होने के साथ ही साथ विज्ञानी हिन्दू विचारक थे। डॉक्टर राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में व्यतीत किए थे। वह एक आदर्श शिक्षक थे। डॉ.
Radhakrishnan Short Biography | Dr. Radhakrshanan Jivan Parichay in Hindi
Dr. Radhakrishnan Biography in Hindi
Q. Radhakrishnan Biography in Hindi:- सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को भारत के तमिलनाडु में स्थित एक छोटे से गांव तुर्माणी में हुआ था। सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे जिस वजह से उनके परिवार में अधिक सुख सुविधाएं नहीं थी मगर उनके पिता गांव के सबसे बड़े ज्ञानी माने जाते थे जिनकी संगत में सर्वपल्ली राधाकृष्णन को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक हुआ था।
अलग-अलग तरह के धर्म ग्रंथ के अलावा उस जमाने के अंग्रेजी किताबों को भी उन्होंने पढ़ना शुरू किया। मगर गांव में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था ना होने के कारण उनके पिता ने तिरुपति के लूथरसन मिशन में अपने बच्चे का दाखिला करवा दिया। 1886 ताकत तिरुपति में रहकर उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूर्ण किया। जब वह तिरुपति में पढ़ाई कर रहे थे तो उसी दौरान महज 16 साल की आयु में उनका विवाह उनकी दूर की चचेरी बहन सिवकमू से करा दिया गया। इनसे उन्हें पांच बेटी और एक बेटा हुआ। इनके बेटे सर्वपल्ली गोपाल भारत के बहुत जाने-माने इतिहासकार बने। भारत के प्रचलित क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण इन्ही के खानदान से ताल्लुक रखते थे।
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सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन | Dr. Radhakrshanan Parichay
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Radhakrishnan SarvepalliBiography ढूंढ रहे हैं तो आज इस लेख में हम डॉक्टर सर्वपल्ली के बारे में कुछ ऐसी जानकारियां से आपको अवगत करवाएंगे जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। हम शिक्षक दिवस के पीछे का कारण भी आपको बताना चाहेंगे कि आखिर क्यों 1962 से शिक्षक दिवस की परंपरा को सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर शुरू किया गया। भारत के महान राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में अधिक जानकारी जानने के लिए हमारे लेख के साथ अंत तक बने रहे।
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सर्वपल्ली राधाकृष्णन कहां के शिक्षक थे?
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज के शिक्षक रहे इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र पढ़ाया और इसके बाद मद्रास यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और बनारस यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे।
Q. राधाकृष्णन ने अनेक महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमिति के अध्यक्ष भी रहे। यह संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का एक अंग है और पूरे विश्व के लोगों की भलाई के लिए अनेक कार्य करती है। डॉ.
Radhakrshanan Jeevan Parichay:-
इसके बाद 1900 तक वेल्लूर में जाकर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपनी कॉलेज की शिक्षा को पूरा किया। यहां उन्होंने राजनीति में स्नातक की डिग्री हासिल की इसके बाद 1906 में मद्रास यूनिवर्सिटी से उन्होंने दर्शनशास्त्र में MA की डिग्री को हासिल किया। उन्होंने अपनी पूरी शिक्षा छात्रवृति से प्राप्त की इसके बाद उन्होंने 1909 में मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के अध्यापक के रूप में चुने गए। इसके बाद 1916 में मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज में वाइस प्रिंसिपल के पद पर नियुक्त हुए। इनके पढ़ाने के तरीके इतने प्रचलित हो चुके थे कि इन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए बुलाया गया और वहां के बच्चों को इनके पढ़ाने का तरीका इतना पसंद आया कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया।
मगर विदेश में उनका मन नहीं लगा इस वजह से वह वापस मद्रास के उसी कॉलेज में लौट आए जहां से उन्होंने MA की डिग्री की थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में उन्हें वाइस चांसलर बना दिया गया मगर 1 साल के अंदर उन्होंने इस कॉलेज को छोड़ दिया और बनारस विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के रूप में नियुक्त हुए। इस तरह शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति करते हुए जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजनीति में कदम रखते हैं और भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में देश को अपना जीवन समर्पित करते हैं।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का परिवार | Dr.
Radhakrshanan Family
जैसा कि हमने आपको बताया सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विवाह उनके दूर के चचेरी बहन शिवकामू से करा दिया गया था। जिनसे उन्हें पांच बेटी और एक बेटा हुआ था उनके बेटे का नाम सर्वपल्ली गोपाल था जो भारत के प्रचलित इतिहासकार बने थे। इसके बाद भारत के प्रचलित क्रिकेटर वी एस लक्ष्मण सर्वपल्ली राधाकृष्णन के परिवार से ही ताल्लुक रखते थे। उनके परिवार में मुख्य रूप से उनके माता-पिता पत्नी 5 बेटी और एक बेटा था।
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में वह अपने बड़े से परिवार में रहते थे। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जब पढ़ने गए तो कुछ साल के लिए अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वहीं बस गए थे। मगर उन्हें विदेश उतना रास नहीं आया इस वजह से अपने परिवार के साथ हो वापस मद्रास अपने गांव लौट आए थे।
डॉक्टर राधाकृष्णन सर्वपल्ली का शिक्षा में योगदान
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक थे। दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद उनके आदर्श थे। उन्होंने दर्शनशास्त्र को समझाने के लिए स्वामी विवेकानंद के तरीके का इस्तेमाल किया जिस तरह से स्वामी विवेकानंद उस वक्त अपने भाषण दिया करते थे सर्वपल्ली राधाकृष्णन उसी से प्रभावित होकर दर्शनशास्त्र पढ़ाने का प्रयास करते थे।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजनीति और दर्शनशास्त्र में स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी। शिक्षा को एक बेहतरीन ढंग से बच्चों के बीच लाने की कोशिश की थी जिसके लिए हर शिक्षक उन्हें अपना आदर्श मानने लगा था। उस वक्त दर्शनशास्त्र इतने बेहतरीन तरीके से सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पढ़ाया था कि अमेरिका के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के तरफ से उन्हें दर्शनशास्त्र पढ़ाने के लिए बुलाया गया था।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पुस्तकें | Dr.
Radhakrshanan Books
Dr. Sarvepalli Radhakrishnan / डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान भारतीय दर्शनशास्त्री थे जो स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने थे। इन्होने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। जिनका कार्यकाल 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक रहा। इनका नाम भारत के महान राष्ट्रपतियों की प्रथम पंक्ति में सम्मिलित है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के लिए संपूर्ण राष्ट्रीय का सदा ऋणी रहेगा। 5 सितम्बर को उनके जन्मदिन पर शिक्षक दिन मनाया जाता हैं।
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का परिचय – Dr.
Sarvepalli Radhakrishnan Biography
| पूरा नाम | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Dr. शिक्षक दिवस कब से मनाया जा रहा है? डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस 5 सितंबर 1962 से भारत में इस दिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। निष्कर्षआशिक में हमने आपको Dr. Radhakrishnan Biography in Hindi सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया। उम्मीद करते हैं इस लेख को पढ़ने के बाद अब डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन को एक नए नजरिए से देख पाए होंगे उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में शिक्षा और दर्शनशास्त्र को एक अलग मुकाम पर पहुंचाया। साथ ही चुनौती भरे वक्त में भारत के एक बेहतरीन राष्ट्रपति के रूप में भारत का नेतृत्व भी किया। अगर इस लेख को पढ़ने के बाद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से आप कुछ सीख पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें साथी अपने सुझाव और विचार को कमेंट में बताना ना भूलें। Sarvepalli Radhakrishnan Biography: आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति (Second President of India) के रूप में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Vice President Sarvepalli Radhakrishnan) का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। डॉ राधाकृष्णन का जन्म (Dr. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पत्नी कौन थी? डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विवाह महज 16 वर्ष की उम्र में शिवमुक से हुआ था जिनसे उन्हें पांच बेटी और एक बेटा हुआ। Q. और फिर राष्ट्रपतिराधाकृष्णन का जन्म और शुरुआती जीवनराधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतानी में हुआ था। ये जगह वर्तमान के चेन्नई शहर से करीब 64 किमी दूर है। वो एक मध्यम वर्गीय तेलुगु ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। जहां उनके पिता एक स्थानीय जमींदार के यहां राजस्व देखने का काम करते थे। वो नहीं चाहते थे कि उनका बेटा अंग्रेजी पढ़े। बल्कि वो तो उसे एक पुजारी बनाना चाहते थे। लेकिन राधाकृष्णन ने पढ़ना नहीं छोड़ा। सर्वपल्ली राधाकृष्णन की शिक्षाउनकी प्राथमिक शिक्षा भी Tirutani के प्राइमरी बोर्ड हाई स्कूल से हुई थी। फिर 1896 में वो तिरुपति के Hermansburg Evangelical Lutheran Mission School चले गए। हायर एजुकेशन के लिए उन्होंने पहले वूरी कॉलेज वेल्लौर में दाखिला लिया था। लेकिन फिर 17 साल की उम्र में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज चले गए। 1906 में वहीं से फिलॉसफी में मास्टर डिग्री ली। सर्वपल्ली सिर्फ 20 साल के थे जब उनकी एमए थीसिस प्रकाशित हुई थी। पूरी एकेडेमिक लाइफ में उन्हें ढेरों स्कॉलरशिप्स मिलीं। Philosophy से राधाकृष्णन का नाताफिलॉसफी में डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का काम अतुलनीय रहा है। लेकिन ये विषय उनकी पहली पसंद नहीं था। ओडिशा सरकार की ओडिशा रिव्यू मैगजीन में छपे लेख के अनुसार, इस सब्जेक्ट से उन्हें किस्मत ने जोड़ा। उस वक्त राधाकृष्णन आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थे। इसलिए जब उनके एक कजिन ने उसी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की तो अपनी किताबें सर्वपल्ली को दे दी। ये फिलॉसफी की किताबें थीं, क्योंकि कजिन ने उसी विषय की पढ़ाई की थी। तभी राधाकृष्णन ने फिलॉसफी की पढ़ाई करने का फैसला किया था। Sarvapalli Radhakrishnan: 16 साल में शादी, 6 बच्चेओडिशा रिव्यू मैगजीन के अनुसार, वर्ष 1904 में राधाकृष्णन की शादी उनकी दूर की कजिन शिवकामु से कर दी गई। तब वो 16 साल के थे। उनके 6 बच्चे हुए- 5 बेटियां और एक बेटा। उनके बेटे का नाम सर्वपल्ली गोपाल था। वो भी एक जाने माने इतिहासकार रहे हैं। सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक टीचर के रूप में1918 में राधाकृष्णन को मैसूर यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी का प्रोफेसर नियुक्त किया गया था। तब तक वो ढेरों लेख और जर्नल्स लिख चुके थे। अपनी पहली किताब 'द फिलॉसफी ऑफ रबींद्रनाथ टैगोर' भी पूरी कर ली थी। दो साल बाद 1921 में वो कलकत्ता यूनिवर्सिटी में फिलॉसफी के प्रोफेसर बने। यहां से उनके विदेश जाने का रास्ता खुला। 1929 में उन्हें मैनचेस्टर कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में खाली पद पर बुलाया गया। उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को लेक्चर देने का मौका मिला। अपनी उपलब्धियों से इतर वो अपने पढ़ाने और सिखाने के तरीकों के लिए अपने छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। नाम से बड़ा स्वाभिमानशिक्षा में उनके योगदान के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1931 में उन्हें नाइटहुड दिया। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने नाम में 'सर' टाइटल का प्रयोग नहीं किया। बल्कि नाम में 'डॉक्टर' लगाने को प्राथमिकता दी। 1931 से 1936 तक वो आंध्र यूनिवर्सिटी के वीसी रहे। 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने उन्हें उनके बाद बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का आमंत्रण दिया। राधाकृष्णव 1948 तक बीएचयू के वीसी रहे। भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन1947 में जब भारत आजाद हुआ, डॉ राधाकृष्णन ने यूनेस्को में देश का प्रतिनिधित्व किया। बाद में सोवियत यूनियन में भारत के राजदूत रहे। संविधान सभा के लिए भी चुने गए। 1952 में डॉ राधाकृष्णन को भारत के उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया। फिर 1962 में वो देश के दूसरे राष्ट्रपति बने। एक शिक्षाविद् का इस पद पर आसीन होना देश के लोकतंत्र के लिए गौरव की बात थी। वो चाहते थे कि उनका जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। Radhakrishnan Sarvepalli Books:- जैसा कि हमने आपको बताया डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक दार्शनिक थे। जिन्होंने अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज में दर्शनशास्त्र की शिक्षा दी है। उन्होंने अपने करियर में दर्शनशास्त्र की अलग-अलग पुस्तकों को भी लिखा है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने पूरे जीवन में 60 से अधिक दर्शनशास्त्र की किताबों को लिखा है। आज भी सर्वपल्ली राधाकृष्णन के द्वारा लिखी गई दर्शनशास्त्र के किताबों को अलग-अलग कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाता है। सभी पुस्तकों में से तीन पुस्तकें विश्व भर में बहुत प्रचलित हुई थी –
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शैक्षणिक विचारडॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने बढ़ाने की प्रक्रिया में कुछ बेहतरीन शिक्षण विचारों को बच्चों को समझाते थे। उनके शैक्षणिक विचार को नीचे सूचीबद्ध किया गया है ताकि आप इस महान शिक्षक के विचारों को समझ सके और उसके आधार पर अपने जीवन में को निर्मित कर सकें –
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का विद्यार्थियों को संदेशसर्वपल्ली राधाकृष्णन ने बच्चों को शिक्षा देने के दौरान विभिन्न प्रकार का संदेश भी देते थे वह अपने संदेश में बताते थे कि किस प्रकार जीवन को ज्यादा सुखद और बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने अपने छात्र छात्राओं को विभिन्न प्रकार का ज्ञान दिया है जिसमें से कुछ बेहतरीन संदेश की सूची नीचे प्रस्तुत की गई है –
डॉ राधाकृष्णन का राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल1947 में जब देश आजाद हुआ तब देश के नियम कानून और गणतंत्र मजबूत नहीं थे इस वजह से जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर एक सफल व्यक्ति के रूप में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राजनीति में आने का निमंत्रण दिया गया। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1947 से 1949 तक स्वाधीनता निर्मात्री सभा में राजदूत के रूप में काम किया और सोवियत संघ रूस के एक राजदूत के रूप में भारत के तरफ से भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक लगातार दो बार भारत के उपराष्ट्रपति बने और भारतीय राजनीति में उस वक्त जितने भी लोग थे सब डॉक्टर सर्वपल्ली से बहुत प्रभावित थे और उनकी प्रशंसा करते थे। इसी दौरान 5 सितंबर 1962 को उनके जन्म दिवस को बड़े ही हर्षोल्लास से मनाने की तैयारी की जा रही थी जिस वक्त उन्होंने अपने जन्मदिवस को देश के सभी शिक्षकों को समर्पित करने का निवेदन किया। जिसके बाद 5 सितम्बर 1962 से डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसके बाद 1962 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भारत का दूसरा राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। मगर डॉ राजेंद्र प्रसाद की तुलना में इनका कार्यकाल ज्यादा चुनौती भरा था क्योंकि यह वह दौर था जब भारत पाकिस्तान और चीन से लड़ाई लड़ रहा था। 1962 में चीन के साथ भारत का एक युद्ध हुआ जिसमें भारत को हार का सामना करना पड़ा और उसी दौरान पाकिस्तान से लगातार दो बार भारत को युद्ध करना पड़ा। हालांकि पाकिस्तान के साथ भारत ने दोनों बार जीत हासिल की और उसके बाद भारत के 2 प्रधानमंत्री का निधन सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कार्यकाल के दौरान ही हुआ जिस वजह से बहुत सारे राजनीतिक गतिविधियों में उन्हें अलग-अलग प्रकार के विवाद का सामना करना पड़ा। मगर 1972 में उन्होंने स्वयं को राजनीति से अलग कर लिया और बहुत अधिक बीमार रहने लगे मगर 13 अप्रैल 1975 को वे बीमारी के साथ अपनी जंग हार गए और परम समाधि में लीन हो गए। उसी साल मरणोपरांत उन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। FAQ’s: Dr.
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| नाम | डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन |
| जन्म तिथि | 5 सितंबर 1888 |
| जन्म स्थान | भारत के तमिलनाडु के तुर्माणी गांव |
| शिक्षक दिवस कब से मनाया जा रहा है | 5 सितंबर 1962 से |
| कार्य | भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति |
| प्रचलित होने का कारण | एक सफल शिक्षक और सफल राष्ट्रपति |
| शिक्षा | MA in Psychology |
| पत्नी | शिवमूक |
| मृत्यू | 13 अप्रैल 1975 |
| सम्मन | 1975 में भारत रत्न |
Teachers Day 2023 | डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी
डॉ.
सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिभा का ही असर था कि, उन्हें स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। 1952 में जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर राधाकृष्णन सोवियत संघ के विशिष्ट राजदूत बने और इसी साल वे उपराष्ट्रपति के पद के लिये निर्वाचित हुए।
1962 में राजेन्द्र प्रसाद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति का पद संभाला। 13 मई, 1962 को 31 तोपों की सलामी के साथ ही डॉ.
राधाकृष्णन सन् 1949 से सन् 1952 तक रूस की राजधानी मास्को में भारत के राजदूत पद पर रहे। भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था।
शुरुआती जीवन – Early Life of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुतनी गाँव में जो मद्रास(चेन्नई) से लगभग 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 5 सितंबर 1888 को हुआ था। यह एक ब्राह्मण परिवार से संबंधित है। इनका जन्म स्थान एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात रहा है। (वैसे डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि उनका जन्म 20 सितंबर 1887 को हुआ था लेकिन सरकारी कागजातों में अंकित उनकी जन्मतिथि को ही आधिकारिक जन्मतिथि माना जाता है)
डॉक्टर राधाकृष्णन के पुरखे पहले सर्वपल्ली नामक गाँव में रहते थे और 18वी शताब्दी के मध्य में उन्होंने तिरुपति ग्राम की ओर निष्क्रमण किया था। लेकिन इनके पुरखे चाहते थे, कि उनके नाम के साथ उनके जन्म स्थल के ग्राम का बोध भी सदा रहना चाहिए। इसी कारण उनके परिजन अपने नाम के पूर्व ‘सर्वपल्ली’ धारण करने में लगे थे।
डॉक्टर राधाकृष्णन एक गरीब किंतु विद्वान ब्राह्मण की दूसरी संतान के रूप में पैदा हुए। इनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सितम्मा था। इनके पिता राजस्व विभाग में वैकल्पिक कार्यालय में काम करते थे। उन पर बड़े परिवार के भरण पोषण का दायित्व था। इनके पिता काफी कठिनाई के साथ परिवार का निर्वाह कर रहे थे। इस कारण बालक राधाकृष्णन को बचपन में कोई विशेष सुख नहीं प्राप्त हुआ।
शिक्षा और शादी
डॉक्टर राधाकृष्णन का बाल्यकाल तिरुतनि एवं तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों पर ही व्यतीत हुआ। बालक राधाकृष्णन ने अपनी शुरुआती शिक्षा क्रिश्चन मिशनरी संस्था लूथर मिशन स्कूल तिरुपति में 1896 से 1900 के बीच प्राप्त की। फिर अगले 4 वर्ष की शिक्षा वेल्लूर में हुई। इसके बाद इन्होने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास में शिक्षा प्राप्त की।
उस समय मद्रास के ब्राह्मण परिवारों में भी कम उम्र में ही शादी संपन्न हो जाती थी और राधाकृष्णन इसके अपवाद नहीं रहे। 1903 में 16 वर्ष की आयु में ही इनका विवाह दूर के रिश्ते की बहन सिवाकामू के साथ संपन्न हो गया। उस समय उनकी पत्नी की आयु मात्र 10 वर्ष थी। अत: 3 वर्षों बाद इनकी पत्नी ने इनके साथ ररहना आरंभ किया।
कैरियर – Dr.
Sarvepalli Radhakrishnan Career
21 वर्ष की उम्र अर्थात 1909 में राधाकृष्णन ने मद्रास प्रेसिडेंसी कॉलेज में कनिष्ठ व्याख्याता के तौर पर दर्शन शास्त्र पढ़ना आरंभ किया। यह उनका परम सौभाग्य था कि उनको अपनी प्रकृति के अनुकूल आजीविका प्राप्त हुई थी। यहां उन्होंने 7 वर्षों तक ना केवल अध्यापन कार्य किया बल्कि स्वंय भी भारतीय दर्शन और भारतीय धर्म का गहराई से अध्ययन किया। उन दिनों व्याख्याता के लिए यह आवश्यकता था की अध्यापन हेतु वह शिक्षण का परिशिक्षण भी प्राप्त करें।
- 1940 में प्रथम भारतीय के रूप में ब्रिटिश अकादमी में चुने गए।
- 1939 से 1948 तक बनारस के हिंदू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे।
- ऑक्स्फर्ड विश्वविद्यालय के 1936 से 1952 तक प्रोफेसर रहे।
- डॉक्टर राधाकृष्णन वाल्टेयर विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के 1931 से 1936 तक वाइस चांसलर है।
- कोलकाता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले जॉर्ज पंचम कॉलेज के प्रोफेसर के रूप में 1937 से 1941 तक कार्य किया।
- 1953 से 1962 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के चांसलर रहे।
- 1948 में उनेस्को में भारत के प्रतिनिधित्व के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
भारत के राष्ट्रपति का पदभार – Former President of India Dr.
Sarvepalli Radhakrishnan
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की राष्ट्रपति के पद पर ताजपोशी हुई।
जब वे भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ मित्रो और विद्यार्थियों ने उनसे कहा की वे उन्हें उनका जन्मदिन (5 सितम्बर) मनाने दे। तब राधाकृष्णन ने बड़ा ही प्यारा जवाब दिया, “5 सितम्बर को मेरा जन्मदिन मनाने की बजाये उस दिन अगर शिक्षको का जन्मदिन मनाया जाये, तो निच्छित ही यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।” और तभी से उनका जन्मदिन भारत में शिक्षक दिन के रूप में मनाया जाता है।
प्रसिद्द दार्शनिक बर्टेड रसेल ने डॉ राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने पर कहा था – “यह विश्व के दर्शन शास्त्र का सम्मान है कि महान भारतीय गणराज्य ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को राष्ट्रपति के रूप में चुना और एक दार्शनिक होने के नाते मैं विशेषत: खुश हूँ। प्लेटो ने कहा था कि दार्शनिकों को राजा होना चाहिए और महान भारतीय गणराज्य ने एक दार्शनिक को राष्ट्रपति बनाकर प्लेटो को सच्ची श्रृद्धांजलि अर्पित की है।“
डॉ.