Rajesh khanna biography in hindi

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कृष्णमूर्ति’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘राजा’ और ‘सोनू’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को राजेश खन्ना, शबाना आज़मी और विनोद महरा ने अभिनय किया था।

साल 1980 की बात करे तो उस साल राजेश खन्ना ने 5 फिल्मो में अभिनय किया था। उन सभी फिल्मो में से फिल्म ‘आँचल’ और ‘थोडीसी बेवफाई’ को सबसे अधिक पसंद किया गया था। इन दोनों ही फिल्मो को बॉक्स ऑफिस में टॉप फिल्मो की सूचि में दर्ज किया गया था।

साल 1981 में भी राजेश ने फिल्म ‘धनवान’ और ‘दर्द’ में मुख्य किरदारों को दर्शाया था। इन दोनों ही फिल्मो को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस में बेहतरीन कमाई के साथ अपना नाम सुपरहिट फिल्मो की सूचि में दर्ज किया था।

साल 1983 में राजेश ने 80 की दशक के सबसे लोकप्रिय फिल्म में अभिनय किया था। इस फिल्म का नाम ‘अवतार’ था जिसमे राजेश ने ‘अवतार कृशन’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस में बेहतरीन कमाई की थी। इसके बाद उसी साल उन्हें फिल्म ‘सौतन’ में देखा गया था। यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस में सुपरहिट रही थी।

साल 1984 में उन्होंने पहले फिल्म ‘आज का एम.

राजेश खन्ना का जीवन परिचय – Rajesh Khanna biography

राजेश खन्ना पत्नी, परिवार, उम्र, बेटी

एक ऐसा बच्चा जिसका बाप ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से अपने बेटे को अपने भाई को सौंप दिया, जो आगे चलकर वो बच्चा फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सुपरस्टार बना। हाँ मैं बात कर रहा हूँ राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की जिन्हे प्यार से लोग काका कहकर बहु पुकारते हैं लेकिन नाम है, हर कोई बस यही बोलता है कि ऊपर आका तो नीचे काका। भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना जी को माना जाता है।

राजेश खन्ना का जन्म व परिवार

राजेश खन्ना भारतीय फिल्मो के मशहूर अभिनेता हैं। उन्होंने अपने व्यवसाय जीवन की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में की थी लेकिन देखते ही देखते उन्होंने फिल्म निर्माता का काम करना और फिर राजनीती में अपनी उपस्थिति दर्शाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने अभिनय के वजह से बहुत सारी लोकप्रियता हासिल की है।

राजेश खन्ना द्वारा अभिनय किए गए फिल्मो की बात करे तो उन्होंने ‘आखरी खत’, ‘राज़’, ‘दो रस्ते’, ‘सफर’, ‘कटी पतंग’, ‘अंदाज़’, ‘दुश्मन’, ‘राजा रानी’, ‘आप की कसम’, ‘हमशकल’, ‘प्रेम कहानी’, ‘आइना’, ‘हत्यारा’, ‘भोला भाला’, ‘मुक़ाबला’, ‘बंदिश’, ‘नसीब’, ‘अवतार’, ‘घर का चिराग’, ‘सैटेल भाई’, ‘क्या दिल ने कहा’ जैसी फिल्मो में अभिनय किया था।

राजेश खन्ना ने कई सारे फिल्मो में अमिताभ बच्चन के साथ भी अभिनय किया है। उन्होंने अपने अभिनय की वजह से कई सारे अवार्ड्स को अपने नाम किया है। इसी के साथ ही उन्हें कई सारे सम्मानों से सम्मानित भी किया गया है।

राजेश खन्ना का प्रारंभिक जीवन

राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने एक पंजाबी परिवार में जन्म लिया था। राजेश खन्ना को जन्म देने वाले माता पिता का नाम ‘लाला हीरानंद’ और ‘चन्द्राणी खन्ना’ था। राजेश खन्ना को गोद लेकर पालने वाले माता पिता का नाम ‘छन्नीलाल खन्ना’ और ‘लीलावती खन्ना’ था। राजेश की एक बहन हैं जिनका नाम ‘कमला’ है।

राजेश ने अपने स्कूल की पढाई ‘सट.

ए. चोपड़ा, बिमल रॉय, जीपी सिप्पी, एच. राम अवतार’ में अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘दसरी नारायण राओ’ थे। फिल्म में राजेश ने ‘राम अवतार’ नाम का किरदार ही दर्शाया था। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘आवाज़’ में भी अभिनय किया था जिसमे उनके किरदार का नाम ‘एडवोकेट जयंत’ था। फिल्म के निर्देशक ‘शक्ति समानता’ थे और फिल्म में राजेश के साथ ‘जया प्रदा’ ने मुख्य किरदारों को दर्शाया था।

साल 1985 में भी राजेश ने कुल 14 फिल्मो में अभिनय किया था। इन सभी फिल्मो में से मात्र एक फिल्म को दर्शको ने सुपरहिट फिल्म के रूप में दर्ज किया था जिसका नाम ‘बाबू’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘ए.

ओम प्रकाश, मोहन सहगल शक्ति सामंथा इन सब प्रोड्यूसर के सामने राजेश खन्ना को परफॉर्म करने का मौका मिला। यह सब प्रड्यूसर उस जमाने के बेहतरीन प्रोड्यूसर थे। और जब प्रड्यूसर ने राजेश खन्ना के परफॉर्मेंस को देखा तो उन्हें मौका दिया, और बाकायदा राजेश खन्ना और कॉन्ट्रैक्ट मिला फिल्म करने के लिए।

राजेश खन्ना ने ऐसा परफॉर्मेंस दिया कि 10000 की भीड़ से निकल कर सीधा टॉप 10 में पहुंच गए राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) और वहां 8 लोगों को ऐसी टक्कर दी टॉप पर यानी नंबर वन पर पहुंच गए राजेश खन्ना और उन्होंने यह कांटेस्ट जीत लिया। लड़कियों में फरीदा जलाल ने कांटेक्ट जीता था और रनर अप रहे थे विनोद मेहरा और लीना चंदावरकर, प्राइज के तौर पर दो फिल्में ऑफर की गई। जी.पी.

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चोपड़ा’ थे।

साल 1988 और 1989 में भी राजेश ने फिल्म ‘विजय’, ‘वो फिर आएगी’, ‘घर का चिराग’, ‘मैं तेरा दुश्मन’ जैसी फिल्मो में अभिनय किया था, लेकिन दर्शको को यह फिल्मे कुछ ज़्यादा खास पसंद नहीं आई थी।

साल 1990 में एक बार फिर राजेश ने सुपरहिट फिल्म ‘स्वर्ग’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘डेविड धवन’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘मिस्टर कुमार’ उर्फ़ ‘मालिक’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म को दर्सको ने बहुत पसंद किया था। उसी साल उन्होंने फिल्म ‘दुश्मन’ में भी अपनी मुख्य उपस्थिति को दर्शाया था।

साल 1991 की हिट फिल्म ‘घर परिवार’ में भी राजेश ने अभिनय किया था।

साल 1992 से लेकर साल 1999 तक राजेश ने कुल 5 फिल्मो में अभिनय किया था। उन सभी फिल्मो को दर्शको पसंद नहीं किया था और इसलिए सभी फिल्मो को बॉक्स ऑफिस में फ्लॉप फिल्मो की सूचि में दर्ज किया गया था।

राजेश खन्ना का फिल्मो का अंतिम सफर

साल 2001 में राजेश ने फिल्म ‘प्यार ज़िंदगी है’ में अभिनय किया था जिसमे उनके किरदार का नाम ‘हृदयनाथ’ था। इसके बाद अगले साल, यानी साल 2002 में उन्होंने फिल्म ‘क्या दिल ने कहा’ में अभिनय किया था। साल 2007 में भी राजेश खन्ना एक बड़ी फिल्म का हिस्सा बने थे लेकिन फिल्म में उन्होंने एक छोटा सा अपना खुदका किरदार ही दर्शाया था। फिल्म का नाम ‘ओम शांति ओम’ था।

साल 2014 में राजेश को अंतिम बार फिल्म में देखा गया था। इस फिल्म का नाम ‘रियासत’ था और फिल्म में उन्होंने ‘गॉडफादर डॉन साहेब’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘अशोक त्यागी’ थे।

राजेश खन्ना द्वारा अभिनय किए गए टीवी सीरियल

साल 2001 में राजेश को पहली बार टीवी सीरियलो में देखा गया था। उन्होंने सबसे पहले सीरियल ‘इत्तेफ़ाक़’ में अभिनय किया था जिसमे उन्होंने ‘मिस्टर गोपाल’ नाम का किरदार दर्शाया था।

साल 2002 में उन्हें ‘अपने पराय’ में देखा गया था। इसके बाद साल 2008 में भी राजेश खन्ना ने ‘ब्राह्मण’ नाम के सीरियल में अपनी उपस्थिति दर्शाई थी। इसके बाद उसी साल उन्होंने सीरियल ‘रघुकुल रीत सदा चली आई’ में भी अपनी उपस्थिति दर्शाई थी।

राजेश खन्ना द्वारा गाए गए गाने

  • साल 1967 में फिल्म ‘बहारों के सपने’ में ‘ओ मेरे सजना ओ मेरे बलमा’ गाने को गाया था।
  • साल 1969 में फिल्म ‘अराधना’ में ‘बागों में बहार है’ गाने को गाया था।
  • साल 1970 में फिल्म ‘सफर’ में ‘नदियां चले चले रे धरा’ गाने को गाया था।
  • साल 1972 में फिल्म ‘अमर प्रेम’ में ‘रैना बीती जाए’ गाने को गाया था।
  • साल 1972 में फिल्म ‘शेह्ज़ादा’ में ‘रिमझिम रिमझिम देखो बरस रहे हैं’ और ‘ना जाइयो ना जाइयो छोड़ के ना जइयो मेरी रानी’ गाने को गाया था।
  • साल 1973 में फिल्म ‘दाग: ए पोएम ऑफ़ लव’ में ‘मैं तो कुछ भी नहीं’ गाने को गाया था।
  • साल 1974 में फिल्म ‘पलकों की छाओं में’ में ‘लडख़ड़ाने दो मुझे’ गाने को गाय था।

राजेश खन्ना का राजनैतिक सफर

साल 1984 में राजेश खन्ना ने अपने मित्र ‘राजीव गाँधी’ के कहने पर ‘कांग्रेस’ पार्टी का प्रचार करना शुरू किया था। राजेश ने साल 1991 में लोक सभा के चुनावो के लिए ‘एल.

सी. अडवानी’ के खिलाफ इलेक्शन में खड़े होने का फैसला लिया था। राजेश कुल 1589 वोट्स ने उस इलेक्शन को हार गए थे। अगली बार उन्होंने एक बार फिर ‘शत्रुघ्न सिन्हा’ के सामने इलेक्शन में खड़े होने का फैसला लिया था और इस बार उन्होंने 25000 वोटो की बढ़ोतरी के साथ जीत हासिल की थी।

राजेश खन्ना पार्लियामेंट को छोडने के बाद भारतीय नेशनल कांग्रेस की तरफ से पंजाब इलेक्शन के लिए अपनी उपस्थिति को दर्शाते रहते थे। उन्होंने साल 2012 में हुए एलेक्शंस में भी अपनी उपस्थिति दर्शाई थी।

पुरस्कार और उपलब्धियां

राजेश खन्ना ने अपने अभिनय की वजह से कुल 100 से भी अधिक अवार्ड्स को अपने नाम किया था। इसी के साथ उन्हें कई सारे और सम्मानों से भी सम्मानित किया गया था जिसकी जानकारी नीचे मौजूद है।

  • साल 2009 में ‘आइफा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड्स’ से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2010 में ‘पीफा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड्स’ से सम्मानित किया गया था।
  • साल 2013 में ‘पद्मा भूषण’ अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

राजेश खन्ना का निजी जीवन

राजेश खन्ना का नाम सबसे पहले फैशन डिज़ाइनर ‘अंजू महेन्द्रू’ के साथ जुड़ा था। दोनों ने साल 1968 से 1972 तक एक दूसरे का साथ दिया था। साल 1980 में राजेश ने अभिनेत्री ‘टीना अम्बानी’ को डेट करना शुरू किया था। राजेश और टीना ने साल 1980 से 1987 तक एक दूसरे का साथ दिया था। उसी दौरान उनके शादी की खबरे भी ज़ोरो शोरो से सुनाई दे रही थी लेकिन अंत में दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला लिया था।

साल 1973 में राजेश की शादी अभिनेत्री ‘डिंपल कपाडिया’ के साथ हुए थी। दोनों ने एक साथ कुछ फिल्मो में अभिनय किया था। साल 1982 में राजेश और डिंपल का तलाख हो गया था। दोनों की दो बेटियां हैं जिनका नाम ‘ट्विंकल खन्ना’ और ‘रिंकी खन्ना’ है। अभिनेता अक्षय कुमार राजेश खन्ना के दमाद और ट्विंकल खन्ना के पति हैं।

राजेश खन्ना के पसंदीदा चीज़ो की बात करे तो उनके पसंदीदा अभिनेता गुरु दत्त और दिलीप कुमार हैं। अभिनेत्रियों में उन्हें मीना कुमारी और गीता बलि पसंद हैं। राजेश खन्ना का पसंदीदा रंग लाल है। राजेश खन्ना भारतीय फिल्मो के पहले अभिनेता थे जिन्होंने ‘सुपरस्टार’ का पद हासिल किया था। उन्होंने अपने 45 साल के अभिनय के व्यवसाय में कुल 180 फिल्मो में अभिनय किया था।

आप अपने विचार और सुझाव नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

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सिप्पी ने बनाई फिल्म राज़ जिसके डायरेक्टर थे रविंद्र दव्वे और यह दोनों ही फिल्में कमाल की हिट रही आखिरी खत तो ऐसी फिल्म थी जिसका नॉमिनेशन हुआ ऑस्कर में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज एंट्री के लिए। वो 2 साल था 1967 और राज फिल्म ऐसी थी जिसमें उन्होंने डबल रोल निभाया। यानी पहली दो फिल्मों में इन्होंने ऐसा काम कर दिया जो कि आगे बहुत लेट नसीब होता है या फिर नसीब ही नहीं होता।

राज फिल्म से जुड़ा एक किस्सा राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने खुद बताया था हिंदू न्यूज़ पेपर में जब पहली फिल्म मिली थी राज तो इनके सामने हीरोइन थी बबीता और वह पहले से ही बड़ी जानी-मानी हीरोइन थी उनको देखकर राजेश नर्वस हो गए और लगातार तीन शार्ट खराब दिए। डायलॉग सही बोल रहे थे पर बॉडी लैंग्वेज मोमेंट बिल्कुल गड़बड़ हो रहे थे। इतने खराब हो रहे थे कि बार-बार कट बोलना पड़ रहा था और ऐसे में डायरेक्टर रविंद्र दवे ने खुद वो सीन करके दिखाया और राजेश खन्ना को कहा सीन को इस तरह से कीजिए यह बात सोच कर राजेश खन्ना भी हंसते रहे कि मैं कैसा नर्वस हो गया था।

इसके बाद 1967 में इन्हे फिल्म मिली “औरत” और “बहारों के सपने” और उसके बाद वो साल आया जिसने इन्हें बहुत सी फिल्में दी और बना दिया भारतीय सिनेमा का पहला फेमस सुपरस्टार। 1969 में उन्होंने डोली, इत्तेफाक और आराधना फिल्म की थी। आराधना वो फिल्म थी, जिसमें राजेश खन्ना को सुपरस्टार बना दिया इसी फिल्म से राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) को देशभर में पसंद किया जाने लगा और क्रिटिक्स ने कहा था सुपर स्टार ऑफ इंडिया।

1969 की ये आराधना फिल्म बहुत सारे किस्सो को लिए हुए था। शुरुआत में इस फिल्म का नाम था वंदना लेकिन वह आदमी बन गया आराधना इस फिल्म को सचिन भौमिक ने लिखी थी। ऐसी फिल्म इन्होंने एक और लिखी थी, एक श्रीमान एक श्रीमती (1969) और साल भी वहीं था। जब यह बात शक्ति सामंथा को पता चली कि उनकी स्टोरी आराधना से मिलती जुलती है तो उन्होंने नहीं बनाई। और आराधना में राजेश खन्ना जी नजर आए, सैफ अली खान उस वक्त शर्मिला टैगोर के पेट में थे, जब ये फिल्म बन रही थी।

इस फिल्म में जो यह गाना है “सपनों की रानी तू कब आएगी तू” इस गाने को भी शक्ति समांथा ने कुछ अलग तरीके से शूट किया। और साथ में शर्मिला टैगोर उस वक्त सत्यजीत रे की फिल्म शूटिंग कर रहे थे। और शूटिंग लोकेशन पर नहीं पहुंच पाई, और दार्जिलिंग में अकेले ही जीप में घूम रहे थे राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)उस गाने के शूटिंग के दौरान। और बाद में वह ट्रेन वाला सीन किसी स्टूडियो में शूट किया गया अलग जगह पर और मिक्स कर दिया। 

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) के इस गाने में जो ट्रेन नजर आती है, वही ट्रेन संयोग से सैफ अली खान के एक फिल्म में नजर आती है। उस फिल्म का नाम था परिणीता और वह भी एक गाने के दौरान सूट के लिए किया गया। आखिर इतना बड़ा सहयोग कैसे हो सकता है यह तो अचंभे वाली बात हो गई। आराधना फिल्म में सुभाष घई भी थे सुभाष गए उस समय स्ट्रगलिंग अभिनेता थे वो स्ट्रगल कर रहे थे। और उस फिल्म में सुभाष भाई ने राजेश खन्ना का दोस्त का किरदार निभाया।

शक्ति सामंथा ने सुभाष घई से पूछा तुम्हें कार चलानी आती है। तो सुभाष घई को कार चलानी आती तो नहीं थी लेकिन उन्होंने झूठ कह दिया कि हां मुझे कार चलानी आती है। और जब कुछ सालों के बाद सुभाष घई नहीं खुद जैकी श्रॉफ के साथ हीरो फिल्म बनाई। तो वही बात उन्होंने जैकी श्रॉफ से पूछा कि जैकी तुम्हें कार चलानी आती हैं। तब उन्हें या बात ख्याल आया कि जब आराधना फिल्म के शूटिंग के दौरान शक्ति सामंथा ने उनसे पूछा था तो उन्होंने झूठ बोला था।

जिसके कारण बाद में उनको बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उसके बाद सुभाष घर ने फिर से जैकी श्रॉफ से पूछा कि सच में तुम्हें कार चलाने आती है या नहीं। इसी फिल्म से किशोर कुमार बन गए थे राजेश खन्ना के ऑफिशियल प्लेबैक सिंगिंग वॉइस। राजेश खन्ना की फिल्म आराधना पहले हिंदी फिल्म चाहिए जो कि 100 हफ्तों तक सिनेमाघरों में दिखाई गई थी साउथ इंडिया ईस्ट इंडिया के नॉन स्पीकिंग लोगों ने बहुत पसंद किया था। आराधना के बाद “कटी पतंग” “सच्चा झूठा” “हाथी मेरे साथी” “अमर प्रेम” “आप की कसम” “रोटी” “प्रेम कहानी” “छैला बाबू” और कुदरत जैसी बहुत सी फिल्में है जो नॉन हिंदी राज्यों में भी सुपर डुपर हिट रही।

रोटी फिल्म कादर खान ने लिखी और ऐसी लिखी कि इस फिल्म के लिए उन्हें टेलीविजन दे दिया मनमोहन देसाई ने, और उन्होंने कहा था कादर खान ने कि मैं ₹21000 फिल्म देखने के लूंगा मनमोहन देसाई ने कहा तुम्हारा पेमेंट 21 नहीं 1 लाख 21 हजार रूपए होगा। मुमताज ने बताया कि जब ये फिल्म सूट हो रही थी क्लाइमेक्स शूट हो रहा था और स्नो में दौड़ना था उन्हें, और जब स्नो पर शूटिंग हुई तो यह शूटिंग करीब 8 दिनों तक चली। और मुमताज बताते हैं कि रोजाना सुबह राजेश खन्ना आकर उन्हें कहते ऐ मोटी चल आजा मेरे कंधे पर और कंधे पर लेकर दौड़ा करते थे।

8 दिनों के बाद पता चला कि राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) के बाएं कंधे पर लाल रंग के धब्बे या दाग हो गए थे जो कि हीरोइन को उठाने से हुआ था। आपको जानकर यह हैरानी होगी कि राजेश खन्ना का हर फिल्म का लगभग एक गाना बर्फीली जगह पर सूट होती थी और वह जम्मू-कश्मीर होती थी और या डिमांड भी राजेश खन्ना जी ही करते थे।  फिल्म बनाने से पहले राजेश खन्ना कहते थे कि एक गाने की सूट जम्मू कश्मीर में जरूर होनी चाहिए। और इस तरह आप उनके हर एक फिल्म में एक गाना में बर्फीली जगह के जरूर देखते होंगे।

साल 1969 से लेकर 1972 तक राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) हर प्रड्यूसर से कहते थे कि मेरे फिल्म में आप किशोर कुमार से गाना गवाईए। और इसी वजह से किशोर कुमार की भी मदद हो जाती थी, और इस प्रकार 1969 से लेकर 1987 तक जितने भी राजेश खन्ना ने फिल्मी की लगभग उनकी सारी फिल्मों में किशोर कुमार ने ही गाने गाए्। और यह दौर ऐसा था जब राजेश खन्ना ऐसे अभिनेता थे जो फिल्मों में अभिनय करने के पेमेंट यानी फिस बहुत ज्यादा लिया करते थे।

जब फिल्म दुश्मन का एक गाना रिकॉर्ड किया जाना था “वादा तेरा वादा” का और जब लक्ष्मीकांत करेंगे इस गीत के लिए किशोर कुमार को बुलाया तो उसने कहा कि मुझसे अच्छा इस गाने को मोहम्मद रफी जी गा सकते हैं यह गाना उसी पर जमेगा यह कहकर उन्होंने गाने से मना कर दिया। उसके बाद लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने किशोर कुमार का राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)के साथ मीटिंग करवाई। उसके बाद भी किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े हुए थे लेकिन राजेश खन्ना ने कुछ ऐसी बात कह दी कि किशोर कुमार मान गए।

राजेश खन्ना ने कहा अगर ऐसा है तो इस गाने को ही फिल्म से ही हटा दिया जाएगा। अगर इस गाने को कोई गाए गा तो वह मेरा दोस्त किशोर कुमार यह सब सुनने के बाद किशोर कुमार मान गए और गाना गाने के लिए राजी हो गए। राजेश खन्ना के लिए किशोर कुमार ने आखिरी गाना गाया था, फिल्म का नाम था “ममता की छांव में” गाने का नाम था “मेरा गीत अधूरा है” इस फिल्म को अमित कुमार ने प्रोड्यूस की थी। और इस फिल्म के डायरेक्टर थे खुद किशोर कुमार जी।

जब साल 1987 में किशोर कुमार की जब मृत्यु हुई थी, तो राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने उनके बेटे अमित कुमार और लीना गांगुली को हेल्प किया था इस फिल्म को पूरी करने के लिए। और ये फिल्म 1989 में प्रदर्शित हुई, करीब 132 फिल्मों में राजेश खन्ना और किशोर कुमार जी ने एक साथ काम किया। जब राजेश खन्ना ने साल 1985 में फिल्म “अलग अलग” बनाएं तब किशोर कुमार ने उनके इस फिल्म के गाने गए थे। और राजेश खन्ना से इस फिल्म में गाए गए गाने के लिए एक भी पैसा नहीं लिया।

आर डी बर्मन ने एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना के बारे में बताया था और कहा था मैंने हमेशा से बेस्ट ट्यून काका के लिए बचा (रिजर्व) करके रखी थी। और मुझे इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता कि मुझे कोई कुछ भी कहे। क्योंकि मैं तो काका का दीवाना था क्योंकि काका है डीजर्व करते थे। आर डी बर्मन जी ने राजेश खन्ना के करीब 40 फिल्मों में म्यूजिक दिया था। जब प्रड्यूसर ने इनको काम देना बंद कर दिया था। राजेश खन्ना है जिन्होंने इन को सपोर्ट किया। अपने दोस्त किशोर कुमार के मृत्यु के बाद जब तक आर डी बर्मन जिंदा रहे राजेश खन्ना उन्हें काम देते रहे।

आर डी बर्मन के बाद लक्ष्मीकांत प्यारे का नाम आता है जिसके साथ राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)की जोड़ी रही। जब राजेश खन्ना के आर डी बर्मन से कुछ अनबन हुई थी। तब शक्ति सामंत आने फिल्म अनुरोध गाने के लिए लक्ष्मीकांत प्यारे को साइन किया था। लक्ष्मीकांत प्यारे जी ने राजेश खन्ना के करीब 26 फिल्मों में म्यूजिक दिया। लक्ष्मीकांत प्यारे लाल जी कहते हैं राजेश खन्ना हमारे लिए और हम इनके लिए लकी रहे। साल 1984 में लक्ष्मीकांत प्यारे लाल अपने पहले ओवरसीज कंसर्ट के लिए जब बाहर विदेश गए तब राजेश खन्ना ने उनके वहां तीन गानों पर डांस किया दोस्ती के लिए। 

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) और डिम्पल कपाड़िया से शादी से होने के बाद दो बच्चे हुए बेटी ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना, राजेश खन्ना के दमाद बने फिल्म इंडस्ट्री के आज के जमाने के सबसे बड़े अभिनेता अक्षय कुमार जी। एक फिल्म ऐसी भी आने वाली थी जिसमें राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया एक साथ हीरो हीरोइन के रूप में काम करने वाले थे लेकिन कुछ दिन की शूटिंग के बाद ही वह फिल्म की शूटिंग बंद हो गई। फिल्म का नाम जय शिव शंकर रखा गया था लेकिन किसी कारणवश इस फिल्म की शूटिंग बंद हो गई।

उसके बाद कभी भी इस फिल्म की शूटिंग शुरू नहीं हुई। राजेश खन्ना के अभिनय इतनी जबरदस्त होती थी कि लोग तारीफ करते थकते नहीं थे इनको देखकर लोगों की आंखों में आंसू आ जाते थे, तो कभी हंसते हंसते लोटपोट हो जाते थे।उसके बाद राजेश खन्ना जी राजनीति में चले गए, और कांग्रेस की तरफ़ से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट चुनकर आए।

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)

जी को 3 बार बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला फिर उसके बाद फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। भारतीय डाक सेवा ने 3 मई साल 2013 को राजेश खन्ना के नाम पर याद के तौर पर डाक टिकट भी जारी किया गया। मुंबई के गिरगांव इलाके में एक चौक का नाम भी सुपर स्टार राजेश खन्ना रखा गया। अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार सबसे पहले एज अभिनेता राजेश खन्ना जी को ऑफर हुई थी।

उसके बाद जबरदस्त लेखक जोड़ी जावेद और सलीम ने राजेश खन्ना को मौका दिया हाथी मेरे साथी मे अभिनय करने का। साल 2012 में पता चला कि राजेश खन्ना की बीमारी बढ़ती ही जा रही है। कई बार इनको हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। लेकिन अंत में 18 जुलाई साल 2012 को अपने बंगला आशीर्वाद में दम तोड़ दिया और सब को छोड़कर हमेशा के लिए बस एक याद बन गया। इनको श्रद्धांजलि देने फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी अभिनेता पहुंचे। 

इन्होने अपनी फिल्म आनन्द का एक डायलॉग बोला था जो इनपर एकदम चरितार्थ (फिट) हो गया। की जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नही। फिल्म इंडस्ट्री में राजेश खन्ना का जैसा कोई दूसरा अभिनेता न था और न है। 

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Anshuman Choudhary

I live in Jharia area of ​​Dhanbad, I have studied till Intermediate only after that due to bad financial condition of home I started working, and today I work and write post together in free time............

Rajesh Khanna Biography in Hindi | राजेश खन्ना जीवन परिचय

Rajesh Khanna real nameजतिन खन्ना
Changed nameराजेश खन्ना
Nick nameकाका
Rajesh Khanna Birth date29 दिसम्बर 1942
Rajesh Khanna Age69 वर्ष
Rajesh Khanna Birth placeअमृतसर (पंजाब)
Rajesh Khanna father’s nameलाला हीरानंद (प्रिन्सपल)। चुन्नीलाल खन्ना/लीलावती खन्ना – गोद लेने वाले
Rajesh Khanna mother’s nameचंद्ररानी खन्ना
Rajesh Khanna brother’s nameनरेंद्र खन्ना
Rajesh Khanna sister’s nameएक बहन – कमला (डॉ) चंचल, विजय और मंजू
Schoolसंत सेबेस्टियन गोआन हाई स्कूल मुम्बई
Collage/Universityके.

सी. सीपी और नासिर हुसैन बने इनकी लाइफ के पहले प्रड्यूसर जिन्होंने राजेश खन्ना को साइन किया 1966 में आखिरी खत राजेश खन्ना की पहली फिल्म रिलीज हुई जो कि बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई जिसके निर्देशक थे देव आनंद के भाई चेतन आनंद चेतन आनंद।

और जी.पी. कॉलेज, मुंबई

शैक्षिक योग्यता कला में स्नातक
डेब्यू फिल्म (अभिनेता)- आख‍िरी खत (1966)

पार्श्व गायक- "ओ मेरे सजना ओ मेरे बलमा" (बहारों के सपने) लता मंगेशकर के साथ में

राजनीति- वर्ष 1984 में, राजेश खन्ना ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए प्रचार शुरू किया।
परिवार पिता - लाला हिरानंद (जैविक पिता, हेडमास्टर), चुन्नीलाल खन्ना (गोद लेने वाले पिता)
माता- चंद्रराणी खन्ना (जैविक माँ), लीलावती खन्ना (गोद लेने वाली माँ)

भाई- कोई नहीं
बहन- कमला
धर्म हिन्दू
पता आशीर्वाद, कार्टर रोड, बांद्रा, मुंबई
शौक/अभिरुचिकुंडली पढ़ना, खाना बनाना
विवाद राजेश खन्ना की मौत के बाद, अनीता आडवाणी नामक एक महिला ने मुआवजे का दावा करते हुआ राजेश खन्ना के परिवार को एक नोटिस भेजा, उनका कहना था, की वह राजेश खन्ना के साथ एक रिश्ते में थी।
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा अभिनेता गुरु दत्त, दिलीप कुमार
पसंदीदा अभिनेत्रियाँ मीना कुमारी, गीता बाली
पसंदीदा रंगलाल
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
विवाह तिथि मार्च 1973
गर्लफ्रेंड व अन्य मामले अंजू महेंद्रू (फैशन डिजाइनर और अभिनेत्री 1968-1972)

टीना मुनीम (टीना अंबानी), (अभिनेत्री 1980-1987)

अनीता आडवाणी (अफवाह)
पत्नी डिंपल कपाड़िया, (अभिनेत्री, तलाक अप्रैल 1982)
बच्चेबेटा- कोई नहीं
बेटी- ट्विंकल खन्ना (इंटीरियर डिजाइनर, अभिनेत्री)

रिंकी खन्ना (अभिनेत्री)
वास्तविक नाम जतिन खन्ना
उपनाम काका, पहला भारतीय सुपर स्टार
व्यवसाय अभिनेता, निर्माता, राजनीतिज्ञ
शारीरिक संरचना
लम्बाई (लगभग)से० मी०- 173
मी०- 1.73
फीट इन्च- 5’ 8”
वजन/भार (लगभग)90 कि० ग्रा०
आँखों का रंग काला
बालों का रंग सफेद
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 29 दिसंबर 1942
मृत्यु तिथि28 जुलाई 2012
आयु (28 जुलाई 2012 के अनुसार)69 वर्ष
जन्मस्थान अमृतसर, पंजाब, भारत
स्वर्गवास स्थलमुंबई, महाराष्ट्र, भारत
मृत्यु का कारणकैंसर
राशि मकर
राष्ट्रीयता भारतीय
हस्ताक्षर
गृहनगर मुंबई, महाराष्ट्र
स्कूल/विद्यालय सेंट सेबेस्टियन गोअन हाई स्कूल, मुंबई
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयनौरोजी वाडीया कॉलेज, पुणे
के.सी.

कॉलेज मुंबई, नौरोजी वाडिया कॉलेज (पुणे)

Education QualificationGraduate in Arts (स्नातक)
Rajesh Khanna Home townअमृतसर (पंजाब)
Rajesh khanna house/Addआशीर्वाद कार्टर रोड बांद्रा, मुंबई (महाराष्ट्र)
Rajesh Khanna Professionअभिनेता
Rajesh Khanna wife nameडिम्पल कपाड़िया
Rajesh Khanna Son’s nameएक भी नहीं हुआ
Rajesh Khanna Daughter’s nameरिंकी खन्ना, ट्विंकल खन्ना (Twinkle Khanna)
Rajesh Khanna death date28 जुलाई 2012

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर पंजाब में हुआ, पिता का नाम लाला हीरानंद खन्ना और माता जी का नाम चंद्ररानी खन्ना है।  जन्म का समय इनका नाम जतिन खन्ना रखा गया था। इनका एक बड़ा भाई भी था नरेंद्र खन्ना। राजेश खन्ना का असली नाम जतिन खन्ना ही था। इनके पिता लाला हीरानंद एक अध्यापक हुआ करते थे जो बुरेवाला वेहारी पंजाब में पड़ता था। जो अब पाकिस्तान में स्थित है। राजेश खन्ना के पिता जी के बुरेवाला में एक खानदानी हवेली भी है, जिसका नाम था खन्ना हवेली, इसी आंगन में राजेश खन्ना का बचपन गुजरा और उस आंगन में राजेश खन्ना जी बहुत क्रिकेट खेलते थे।

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) जब 6 साल के हुए थे तब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा शुरू हो गया था, उसके बाद राजेश खन्ना के पिता जी भारत को चुनाव किया और वह वेस्ट पंजाब अमृतसर के गली तिवारियन में आकर बस गए, और रहने लगे। एक जगह से दूसरी जगह आने के बाद राजेश खन्ना के पिता जी के पास कोई दूसरी नौकरी भी नहीं थी। क्योंकि जो कुछ भी था उस वक्त भारत विभाजन से पहले वह भारत विभाजन के बाद सब छोड़ छाड़ के वे भारत आ गए। और यहां पर अमृतसर में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा, क्योंकि आर्थिक स्थिति उस वक्त इनकी बहुत खराब थी।

बच्चों का पालन पोषण तक नहीं कर पा रहे थे एक टाइम का खाना मिलना मुश्किल हो हो रहा था। और अंत में राजेश खन्ना के पिता जी ने मुंबई में रह रहे अपने भाई चुन्नीलाल खन्ना और उनकी पत्नी लीलावती खन्ना के पास मात्र 6 साल की उम्र में राजेश खन्ना जी ने जिम्मेदारी सौंप दी। राजेश खन्ना के दूसरे पिता चुन्नीलाल खन्ना मुंबई में एक रेलवे कांट्रेक्टर के रूप में काम किया करते थे। और मुंबई में सरस्वती निवास ठाकुरद्वार गिरगांव के पास चरनी रोड पर इनका घर था। और इस तरह राजेश खन्ना जी पहुंच गए 6 साल की उम्र में अपने दूसरे पिताजी के पास मुंबई में।

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) जी को बचपन से इनके परिवार वाले काका कहकर बुलाया जाता था, पंजाबी भाषा में काका छोटे बच्चे को कहा जाता है। और आगे भविष्य में पूरी दुनिया इन्हे काका कहकर बुलाने लगे। इनकी बहने थी कमला, चंचल, विजय और मंजू इनमे एक बहन कमला यूके में एक डेंटिस्ट भी रह चुकी है।

राजेश खन्ना का फिल्मी करिअर (Rajesh Khanna Career)

मात्र 10 साल की उम्र में राजेश खन्ना जी नाटक में भाग लिया करते थे, स्कूल में राजेश खन्ना जी को बोंगू और ड्रम बजाने का भी बड़ा शौक था। और बहुत अच्छा भी बजाते थे, खन्ना जी के साथ में स्कूलों में एक और अभिनेता पढ़ा करते थे जो उस वक्त वह भी एक बच्चा ही थे उनका नाम था रवि कपूर जो बाद में आगे चलकर जितेंद्र कुमार बने। राजेश खन्ना जी कॉलेज के पहले 2 साल पढ़ें नौरोजी वाडिया कॉलेज में नवरोजी वादिया कॉलेज पुणे में 1959 से 1961 तक और उसके बाद किशनचंद चेलाराम कॉलेज मुंबई में राजेश खन्ना ने सन 1961 से लेकर 1963 तक पढ़ाई की और बीए की डिग्री पूरी कर ली।

इनकी पढ़ाई के दिनों में खूब ड्रामा में रुचि रहा करती थी, स्टेज शोज में इंटर कॉलेज ड्रामा में बहुत पार्टिसिपेट किया करते थे बहुत से ड्रामा में इन्हें अवार्ड दिए गए और बेस्ट एक्टर के खिताब भी मिले फिर मिला ऐसा नाटक जिसने इन्हें आगे बढ़ने की रास्ता दिखा दिए। 1962 में धर्मवीर भारती के लिखे नाटक अंधा युग में एक घायल सैनिक का किरदार निभाया था राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने स्टेज पर उन्होंने ऐसा किरदार निभाया चीफ गेस्ट ने कहा तुम्हें बेटा फिल्मों में काम करना चाहिए पर जतिन खन्ना यानी राजेश खन्ना के पिता को यह मंजूर नहीं था नहीं चाहते थे कि जतिन फिल्मों में काम करें।

लेकिन जतिन ने तो तय कर लिया था कि नहीं जाना है इन्होंने अपने मामा को बताया और ऐसे में इनके मामा की तलवार ने जतिन से इनका नाम बदल कर रख दिया राजेश खन्ना(Rajesh Khanna)। राजेश खन्ना अमीर परिवार में पहुंच चुके थे और हमेशा स्पोर्ट्स कारों में जाने के शौकीन थे और ऑडिशन देने भी जब फिल्मों के लिए जाने लगे तो कार हुआ करती थी एमजी स्पोर्ट्स कार उस में बैठकर ऑडिशन देने जाते और उस वक्त ऐसी कार किसी फिल्म स्टार के पास भी हो यह मुमकिन नहीं हुआ करता था। 

उनकी कार अक्सर खड़ी होती थी चर्चगेट के पास एक रेस्टोरेंट के बाहर वहां पर कई निर्माता निर्देशकों का आना जाना लगा रहता था और ऐसे में लोग कहा करते थे कि कोई छोटा जूनियर आर्टिस्ट का रोल भी अगर आप मुझे दे दे तो अच्छा हो सपोर्ट मिल जाए तो भी मेरे लिए अच्छा होगा लेकिन राजेश खन्ना को सभी लोग अवॉइड कर दिया करते थे और वही उसके आसपास जो बिल्डिंग थी बालकनी से लड़कियां राजेश खन्ना को देखा करती थी क्योंकि राजेश खन्ना अलग प्रकार की कारों में आते थे और स्मार्ट दिखते थे। शंकर जयकिशन ने भी इंटरव्यू में कहा था कि वह कई बार वहां जाते थे

लेकिन उस वक्त राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) एक्टर नहीं थे और हम उन्हें पहचानते नहीं थे। फिर आया साल 1965 जब यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स मिलकर एक आल इंडिया टैलेंट हंट शो करवाया जिसमें 10000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था उनमें से एक नाम था राजेश खन्ना इनकी उम्र 23 साल। यहां पर ध्यान देने वाली चीज यह है कि राजेश खन्ना जी उस जमाने में टैलेंट हंट के हिस्सा हुआ करते थे। उस जमाने के यूनाइटेड फिल्म टैलेंट हंट जिसमें राजेश खन्ना जी अव्वल आएं।

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) कि पहली फिल्म

साल 1966 जब आया तब राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) को फिल्म में काम करने का मौका मिला और उनकी पहली फिल्म “आखरी खत” जिसको चेतन आनंद ने डायरेक्ट किया था जिसमें राजेश खन्ना को काम करने का मौका मिल और इस तरह उन्होंने फिल्मी दुनिया में अपना कदम रखा। फिर राजेश खन्ना जी को दूसरी फिल्म मिली जिसका नाम था राज जिसको रविंद्र दुबे ने डायरेक्ट की। उनकी पहली फिल्म “आखरी खत” भारत की तरफ से ऑस्कर के बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म के लिए चुना गया।

इनकी थोड़ी बहुत तारीफ तो हो रही थी लेकिन इनकी फिल्म कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर रही थी। उसी समय उस जमाने के बेहतरीन प्रोड्यूसर शक्ति समांथा राजेश खन्ना का एक जबरदस्त कहानी सुनाई जिसमें मेन लीड रोल अभिनेत्री का था। राजेश खन्ना जी ने कहा इसमें लीड रोल तो अभिनेत्री का इसमें मेरा क्या काम है। और इस फिल्म को करने से मना कर दिया, किसी तरह शक्ति सामंथा ने राजेश खन्ना जी को किसी तरह समझा-बुझाकर इस फिल्म को करने के लिए मना लिया।

इसके बाद राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने इस फिल्म में ऐसा काम किया कि लोग इनके फैन, इस फिल्म में इनका शायद डबल (जुड़वा) रोल था। इस फिल्म का नाम था आराधना, और फिल्म इंडस्ट्री के राजेश खन्ना बन ग‌ए उस जमाने के  पहला सुपरस्टार। राजेश खन्ना की जोड़ी शर्मिला टैगोर के साथ खूब सराही गई, बाद में आशा पारेख और मुमताज के साथ भी देखना पसंद किया था। तनुजा के साथ भी इनकी जोड़ी को सराहा गया, खास करके मेरे जीवन साथी फिल्म में। राजेश खन्ना की दीवानगी ऐसी थी लोगों में खास करके लड़कियों में की लड़कियां राजेश खन्ना के गाड़ियों को चुमते थे।

ऐसी दीवानगी किसी और दूसरे सुपरस्टार में नहीं थी, जिस रास्ते से राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) जी गुजरते थे अपनी गाड़ी लेकर जो धूल उड़ती थी उससे लड़कियां अपने मांग भर लेती थी। इतना या नहीं बहुत सी लड़कियां तो राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)की तस्वीर से ही शादी कर लिया करती थी उस जमाने में ऐसी दीवानगी थी राजेश खन्ना की।

एक साथ राजेश खन्ना ने कई सारे सुपरहिट फिल्में दी, बड़े बड़े अभिनेताओं की कुर्सी इन्होंने उस जमाने में हिला के रख दी थी। जबरदस्त डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म “आनंद” में ऐसा भी नहीं किया कि लोगों को हटाया गया और आया भी कुछ ऐसा फिल्म ही था। उसके बाद राजेश खन्ना को लेकर “नमक हराम” फिल्म बनाई जो सुपरहिट रही। इस फिल्म में इनके सपोर्टिंग हीरो थे अमिताभ बच्चन जी, और उस वक्त राजेश खन्ना और अंजुम महेंद्रु से अलग होने के बाद राजेश खन्ना ने जमाने के प्रसिद्ध अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से शादी कर ली। इन दोनों के बीच की उम्र काफी अंतर था,

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) की शादी

मार्च 1973 में राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने डिंपल कपाड़िया के साथ शादी की थी। और उसी समय ऋषि कपूर के साथ बॉबी फिल्म की शूटिंग हो रही थी और वह फिल्म अभी पूरी शूटिंग नहीं हुई थी। 

जिस कारण राजेश खन्ना जी को बी.आर.

सेबेस्टियन’स गायन हाई स्कूल’, मुंबई से पूरी की थी। अभिनेता जितेंदर और राजेश खन्ना ने एक साथ इसी स्कूल से अपनी पढाई पूरी की थी और दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे मित्र भी थे। इसके बाद उन्होंने ‘नौरोसजी वाडिआ कॉलेज’ पुणे और ‘के. आर. एस. एल. कॉलेज’, मुंबई से अपने ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की थी।

राजेश खन्ना का पहले का नाम ‘जतिन खन्ना’ था। राजेश के अंकल ‘केके तलवार’ ने उनका पहला नाम ‘जतिन’ बदल कर उन्हें ‘राजेश’ नाम दिया था और वहीं से शुरू हुआ था ‘जतिन खन्ना’ से ‘राजेश खन्ना’, द सुपर स्टार बनाने का सफर।

18 जुलाई 2012 को मुंबई महाराष्ट्र में राजेश खन्ना का दिहांत हुआ था। राजेश काफी लम्बे समय से बीमार थे जिसकी वजह से उन्होंने कई समय अस्पतालों में भी गुज़ारे थे। साल 2012 में उन्होंने सभी को अल्विदा कह दिया था।

व्यवसाय जीवन

राजेश खन्ना का फिल्मो का शुरुआती दौर

राजेश खन्ना साल 1965 में पहले ऐसे भारतीय बने थे जिन्होंने लगभग 10000 से भी ज़्यादा प्रतियोगियों को पीछे छोड़ ‘आल इंडिया टैलेंट कांटेस्ट’ में भाग लिया था और साथ ही इस प्रतियोगिता के विजयता भी बने थे। इसके बाद, साल 1966 में उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत की थी। उनकी पहली फिल्म का नाम ‘आखरी खत’ था जिसके निर्देशक ‘चेतन आनंद’ थे। यह फिल्म दर्शको को बहुत पसंद आई थी।

उसके बाद साल 1967 में राजेश ने फिल्म ‘राज़’ और ‘औरत’ में भी अभिनय किया था। दोनों ही फिल्मो को बॉक्स ऑफिस में ठीक ठाक सफलता मिली थी। इसके बाद उसी साल उन्होंने फिल्म ‘बहारों के सपने’ में भी अभिनय किया था जिसके निर्देशक ‘नासिर हुसैन’ थे। साल 1968 में राजेश को फिल्म ‘श्रीमानजी’ में देखा गया था जिसमे उन्होंने एक कैमिओ किरदार दर्शाया था।

साल 1969 में राजेश को फिल्म ‘बंधन’ में देखा गया था। इस फिल्म में उन्होंने ‘चर्मचन्द’ उर्फ़ ‘धर्मा’ नाम का किरदार अभिनय किया था।

उसी साल राजेश खन्ना ने एक बड़ी फिल्म में अभिनय किया था जिसका नाम ‘अराधना’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘शक्ति समानता’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘अरुण’ और ‘सूरज प्रसाद सक्सेना’ नाम के दो किरदारों को दर्शाया था। इस फिल्म में मुख्य किरदार को राजेश खन्ना और शर्मीला टैगोर ने दर्शाया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था।

इसके बाद राजेश को फिल्म ‘इत्तेफ़ाक़’ में देखा गया था जिसके निर्देशक ‘यश चोपड़ा’ थे। फिल्म में राजेश के किरदार का नाम ‘दिलीप रॉय’ था और फिल्म में मुख्य किरदार को राजेश खन्ना, नंदा, बिंदु, मदन पूरी और इफ़्तेख़ार ने दर्शाया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था।

साल 1970 में राजेश को फिल्म ‘सच्चा झूठा’, ‘आन मिलो सजना’, ‘सफर’, ‘खामोशी’ और ‘कटी पतंग’ में देखा गया था। इस सभी फिल्मो में से राजेश खन्ना की तीन फिल्मो को दर्शको ने बहुत पसंद किया था। उन फिल्मो के नाम ‘सच्चा झूठा’, ‘सफर’ और ‘कटी पतंग’ था। तीनो फिल्मो को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्मो ने अपना नाम सुपरहिट फिल्मो की सूचि में दर्ज भी किया था।

साल 1971 में राजेश ने फिल्म ‘गुड्डी’ में एक कैमिओ किरदार दर्शाया था। इसके बाद उसी साल एक बार फिर राजेश एक सुपरहिट फिल्म का हिस्सा बने थे जिसका नाम ‘आनंद’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘हृषिकेश मुख़र्जी’ थे और फिल्म के डायलॉग को गुलज़ार ने लिखा था। फिल्म में राजेश के साथ अमिताभ बच्चन, सुमिता सान्याल, रमेश देओ और सीमा देओ ने मुख्य किरदारों को दर्शाया था। फिल्म को दर्शको ने भी बहुत पसंद किया था।

इसके बाद उसी साल उन्हें फिल्म ‘दुश्मन’ में देखा गया था, जिसमे उन्होंने ‘सुरजीत सिंह’ नाम का किरदार अभिनय किया था। इस फिल्म में मुख्य किरदारों को मीना कुमारी, मुमताज़ और राजेश खन्ना ने दर्शाया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था।

साल 1972 में राजेश खन्ना को सबसे पहले फिल्म ‘अमर प्रेम’ में देखा गया था जिसके निर्देशक ‘शक्ति समानता’ थे। फिल्म में राजेश ने ‘आनंद बाबू’ नाम का किरदार अभिनय किया था और उनके साथ फिल्म में शर्मीला टैगोर, विनोद महरा, अभी भट्टाचार्य और मदन पूरी ने अभिनय किया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने भी अपना नाम सुपरहिट फिल्मो की सूचि में दर्ज किया था।

उसी साल राजेश एक और सुपरहिट फिल्म का हिस्सा बने थे। इस फिल्म का नाम ‘बावर्ची’ था और फिल्म में राजेश खन्ना के किरदार का नाम भी ‘रघु’ उर्फ़ ‘बावर्जी’ ही था। फिल्म के निर्देशक ‘हृषिकेश मुख़र्जी’ थे और फिल्म में राजेश के साथ जया बाधुरी ने मुख्य किरदार को दर्शाया था। फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था और फिल्म ने अपना नाम सुपरहिट फिल्मो की सूचि में दर्ज किया था।

उसी साल राजेश को फिल्म ‘अनुराग’, ‘मालिक’, ‘दिल दौलत दुनिया’, ‘अपना देश’ जैसी फिल्मो में अभिनय किया था।

साल 1973 में राजेश खन्ना ने तीन सुपरहिट फिल्मो में अभिनय किया था। इनमे से सबसे पहली फिल्म का नाम ‘दाग: ए पोएम ऑफ़ लव’ था जिसके निर्देशक ‘यश चोपड़ा’ थे। फिल्म में राजेश के किरदार का नाम ‘सुनील कोहली’ था। इसके बाद उसी साल की दूसरी सुपरहिट फिल्म का नाम ‘नमक हराम’ था। इस फिल्म के निर्देशक ‘हृषिकेश मुख़र्जी’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘सोमनाथ’ उर्फ़ ‘सोमू’ और ‘चन्दर सिंह’ नाम के किरदारों को दर्शाया था।

उसी साल की तीसरी सुपरहिट फिल्म का नाम ‘बॉम्बे सुपरस्टार’ था जो की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म थी। इस फिल्म में उन्होंने अपने ही किरदार को दर्शाया था।

साल 1974 में भी राजेश चार सुपरहिट फिल्म का हिस्सा बने थे जिनका नाम ‘आप की कसम’, ‘प्रेम नगर’, ‘आविष्कार’ और ‘रोटी’ था। इन चारो फिल्मो में राजेश खन्ना ने मुख्य किरदारों को दर्शाया था और फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था।

साल 1975 और साल 1976 में भी राजेश खन्ना ने दो बड़ी फिल्मो में अभिनय किया था। साल 1975 में आई फिल्म का नाम ‘प्रेम कहानी’ था जिसके निर्देशक ‘राज खोसला’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘राजेश कमलेश्वर नारायण’ नाम का किरदार दर्शाया था। साल 1976 में आई फिल्म का नाम ‘मेहबूबा’ था जिसके निर्देशक ‘शक्ति समानता’ थे। इस फिल्म में राजेश ने ‘प्रकाश’ और ‘सूरज’ नाम के दो किरदारों को दर्शाया था।

साल 1977 में राजेश ने 10 फिल्मो में अभिनय किया था लेकिन उन में से सिर्फ एक ही फिल्म को सुपरहिट फिल्मो की सूचि में दर्ज किया गया था। उस फिल्म का नाम ‘अनुरोधा’ था जिसके निर्देशक ‘शक्ति समानता’ थे। फिल्म में मुख्य किरदार को राजेश के साथ विनोद महरा, डिंपल कपाडिया, रीता बहादुरी और अशोक कुमार ने दर्शाया था।

साल 1978 में राजेश ने फिल्म ‘भोला भाला’, ‘नौकरी’, ‘चमत्कार’ और ‘चक्रव्यू’ में अभिनय किया था। इन सभी फिल्मो में से फिल्म ‘चक्रव्यू’ को दर्शको ने सबसे ज़्यादा पसंद किया था।

साल 1979 में भी राजेश खन्ना ने सुपरहिट फिल्म ‘अमर दीप’ में अभिनय किया था। इस फिल्म के निर्देशक ‘आर.

के. रवैल, नासिर हुसैन, जे. सी. तिरुलोकचन्द्र’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘बाबू’ नाम के किरदार को ही दर्शाया था।

साल 1986 की सुपरहिट फिल्म का नाम ‘अमृत’ था। इस फिल्म को दर्शको ने बहुत पसंद किया था। फिल्म के निर्देशक ‘मोहन कुमार’ थे और फिल्म में राजेश ने ‘अमृत लाल शर्मा’ नाम का ही किरदार अभिनय किया था। साल 1987 में राजेश को फिल्म ‘आवाम’ में देखा गया था जिसके निर्देशक ‘बी.