Ramdhari singh dinkar biography in hindi pdf

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(Dinkar's Legacy)

दिनकर की विरासत उनकी कविता और उनके आदर्शों के माध्यम से आज भी जीवित है। सभी आयु और पृष्ठभूमियों के लोगों द्वारा उनकी कविता आज भी लोगों द्वारा पढ़ी जाती है और सुनी जाती है। उनके द्वारा रचित साहित्य को आज कही स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाता है। उनकी कविता कई नेताओं और आंदोलनों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का स्रोत भी है। उदाहरण के लिए, 1975-77 की आपातकाल में, विपक्ष के नेता जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली में एक रैली में दिनकर की प्रसिद्ध कविता 'सिंघासन खाली करो के जनता आती है' का पाठ किया। उनकी कविता को विभिन्न समूहों और समुदायों द्वारा प्रतिरोध और विरोध का प्रतीक भी उपयोग किया जाता है।

दिनकर को हिंदी साहित्य के महान कवियों में से एक और भारतीय संस्कृति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक के रूप में व्यापक रूप से माना जाता है। उनकी  जयंती (23 सितंबर) को भारत में राष्ट्रीय कवि दिवस (National Poet's Day) के रूप में मनाई जाती है। उनकी मूर्तियां कई जगहों पर स्थापित है, जैसे संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, पटना संग्रहालय, आदि। उनकी कृतियाँ विभिन्न भाषाओं में भी अनुवादित की गयी हैं, जैसे अंग्रेजी, बंगाली, तमिल, तेलुगू, आदि।

दिनकर एक ऐसे कवि का प्रकट उदाहरण है जिन्होंने अपनी कलम को अपने देश और अपने लोगों के लिए लड़ाई की उपकरण के रूप में उपयोग किया। वे उन सभी के लिए एक रोल मॉडल हैं जो अपनी मातृभाषा और अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं। वे एक सच्चे भारत के पुत्र और हिंदी साहित्य के सच्चे सूर्य हैं।

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Ramdhari Singh Dinkar Biography: भारत मे हिंदी भाषाक में रामधारी सिंह दिनकर अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय भाव को जनमानस की चेतना में नई स्फूर्ति प्रदान करने वाले कवि के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें हिंदी साहित्य के कालखंड में ‘छायावादोत्तर काल’ का प्रमुख कवि माना जाता है, साथ ही उन्हें प्रगतिवादी कवियों में भी उच्च स्थान प्राप्त है।

रामधारी सिंह दिनकर ने हिंदी साहित्य में गद्य और पद दोनों ही धाराओं में अपनी रचनाएँ लिखी हैं। वह एक कवि, पत्रकार, निबंधकार होने के साथ साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। क्या आप जानते हैं रामधारी दिनकर जी को ‘क्रांतिकारी कवि’ के रूप में भी ख्याति मिली हैं। उन्होंने ‘रश्मिरथी’, ‘कुरूक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ जैसी रचनाओं में अपनी जिस काव्यात्मक प्रतिभा का परिचय दिया, वह हिंदी साहित्य जगत में अविस्मरणीय रहेगा। आइए अब ‘राष्ट्रकवि’ की उपाधि से सम्मानित रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय और उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

त्वरित जानकारी:

◆ नाम- रामधारी सिंह दिनकर

◆ जन्म – 30 सितंबर 1908

◆ जन्म स्थान- सिमरिया ग्राम, बेगूसराय, बिहार

◆ पिता का नाम – रवि सिंह

◆ माता का नाम – मनरूप देवी

◆ भाषा- परिष्कृत खड़ीबोली

◆ प्रमुख रचनाएँ- उर्वशी, कुरुक्षेत्र, परशुराम की प्रतीक्षा, रेणुका आदि।

◆ उपाधि- राष्ट्रकवि

◆ सम्मान- साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्म भूषण आदि।

◆ निधन – 24 अप्रैल 1974, चेन्नई, तामिलनाडु

रामधारी सिंह दिनकर के मातपिता एवं शिक्षा

छायावादोत्तर काल के प्रमुख कवियों में एक रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय ज़िले के सिमरिया ग्राम में एक किसान परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम ‘रवि सिंह’ और माता का नाम ‘मनरूप देवी’ था। रामधारी सिंह दिनकर जी की प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही सीमित साधनों के बीच हुई थी। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए पटना चले गए और पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने वर्ष 1932 में B.A.

में स्नातक की डिग्री हासिल की।

स्वतंत्रता आंदोलन का दौर

इसके पश्चात् उन्होंने अपनी आजीविका चलाने के लिए माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक के रूप में कार्य किया। फिर उन्होंने कुछ समय तक बिहार सरकार में सब-रजिस्टार की नौकरी की। यह वो समय था जब भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर था। रामधारी सिंह दिनकर भी अंग्रेजों के खिलाफ अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से जन भावना में देश के प्रति नई चेतना को जगाने का कार्य कर रहे थे। उन्हें हिंदी भाषा के साथ साथ संस्कृत, उर्दू, बांग्ला और अंग्रेजी का भी अच्छा ज्ञान था।

चेन्नई में हुआ निधन

वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् रामधारी सिंह दिनकर ने मुज़फ़्फ़रपुर के एक कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1952 में उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में चुन लिया गया जहाँ उन्होंने तीन कार्यकालों तक अपना अहम योगदान किया। फिर उन्हें ‘भागलपुर विश्वविद्यालय’ में कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया और इसके एक वर्ष बाद ही भारत सरकार ने उन्हें अपना मुख्य ‘हिंदी सलाहकार’ बना दिया। यहाँ उन्होंने 1965 से 1971 तक कार्य किया। वहीं 24 अप्रैल 1974 को हिंदी साहित्य के इस महान कवि का चेन्नई, तमिलनाडु में इनका निधन हो गया।

रामधारी सिंह दिनकर का साहित्यिक परिचय

रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी काव्य रचनाओं की शुरुआत हाई स्कूल के समय ही कर दी थी। सबसे पहले उन्होंने सुप्रसिद्ध साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा प्रकाशित ‘युवक’ पत्रिका में ‘अमिताभ’ नाम से अपनी रचनाएँ भेजनी शुरू की थीं। इसके बाद वर्ष 1928 में उनका ‘बारदोली विजय संदेश’ नामक पहला काव्य-संग्रह प्रकाशित हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर ने काव्य के साथ-साथ अन्य गद्य साहित्य में भी लेखन कार्य किया है।

आपको बता दें कि रामधारी सिंह दिनकर की काव्य प्रतिभा ने उन्हें हिंदी साहित्य जगत में अपार प्रसिद्धि प्रदान की। उन्होंने राष्ट्र-प्रेम, सौन्दर्य और लोक कल्याण को अपने काव्य का विषय बनाया। लेकिन उनकी राष्ट्रीय भाव पर आधारित कविताओं ने भारतीय जनमानस को सबसे अधिक प्रभावित किया।

रामधारी सिंह दिनकर की रचनाएँ:

रामधारी सिंह दिनकर की समग्र साहित्यिक कृतियां निम्नलिखित है:-

काव्य  विधा की कृतियाँ

काव्य कृति ——–प्रकाशन वर्ष

बारदोली-विजय संदेश- वर्ष 1928

रेणुका- वर्ष 1935

हुंकार- वर्ष 1938

रसवन्ती- वर्ष 1939

द्वंद्वगीत – वर्ष 1940

कुरूक्षेत्र- वर्ष 1946

इतिहास के आँसू- वर्ष 1951

रश्मिरथी- वर्ष 1952

उर्वशी- वर्ष 1961

परशुराम की प्रतीक्षा- वर्ष 1963

हारे को हरिनाम – वर्ष 1970

रश्मिलोक- वर्ष 1974

गद्य विधा की कृतियाँ

रचना—-  प्रकाशन —- वर्ष

मिट्टी की ओर – वर्ष 1946

अर्धनारीश्वर – वर्ष 1952

रेती के फूल- वर्ष 1954

हमारी सांस्कृतिक एकता – वर्ष 1955

भारत की सांस्कृतिक कहानी – वर्ष 1955

संस्कृति के चार अध्याय- वर्ष 1956

उजली आग – वर्ष 1956

काव्य की भूमिका- वर्ष 1958

राष्ट्रभाषा आंदोलन और गांधीजी – वर्ष 1968

भारतीय एकता – वर्ष 1971

मेरी यात्राएँ- वर्ष 1971

दिनकर की डायरी – वर्ष 1973

चेतना की शिला- वर्ष 1973

आधुनिक बोध – वर्ष 1973

रामधारी सिंह दिनकर की भाषा शैली

रामधारी सिंह दिनकर प्रगतिवादी एवं मानवतावादी कवि थे। इनकी भाषा अत्यंत प्रवाहपूर्ण, ओजस्वी और सरल है। वे सीधी और प्रामाणिक भाषा में अपना संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते थे। वहीं उनकी रचनाओं में विचार और संवेदना का अनुपम समन्वय दिखाई देता है। जबकि उनकी कुछ कृतियों में प्रेम और सौंदर्य का चित्रण भी देखने को मिलता है।

उनकी कविताओं में राष्ट्र प्रेम, वीरता और संघर्ष की भावनाओं का उच्चतम प्रदर्शन मिलता है। उन्होंने अपने लेखन में समाज सुधार, स्वतंत्रता, न्याय और वीरता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उनकी कविताएँ न केवल विचारों को व्यक्त करती हैं, बल्कि चित्रात्मक दृष्टिकोण से भी भरपूर होती है।

पुरस्कार एवं सम्मान

रामधारी सिंह दिनकर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है, जो इस प्रकार हैं:-

★ वर्ष 1946 में प्रकाशित ‘कुरुक्षेत्र’ रचना के लिए उन्हें काशी नागरी प्रचारिणी सभा, उत्तर प्रदेश और भारत सरकार से सम्मान मिला था।

★ इसके बाद उन्हें वर्ष 1959 में ‘संस्कृति के चार अध्याय’ रचना के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।

★ भारत के प्रथम राष्ट्रपति ‘डॉ.

किस रचना के लिए रामधारी सिंह दिनकर को ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से नवाजा गया था?

A. (Birthplace of Ramdhari Singh Dinkar)

दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसिडेंसी, सिमरिया गाँव (अब बिहार के बेगूसराय जिले में) में एक भूमिहार परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम बाबू रवि सिंह और मनरूप देवी था। उनकी शादी बिहार के समस्तीपुर जिले के तभका गाँव में हुई थी। उनका बचपन कठिनाइयों और सामाजिक भेदभाव के सामना करने के रूप में बीता, और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने और अपने साहित्यिक रुचियों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

राम धारी सिंह दिनकर के कवि बनने की कहानी (How Ramdhari Singh Dinkar Become a Poet)

दिनकर ने अपने बचपन में ही कविता के प्रति रुचि दिखाई। उन्हें विभिन्न कवियों जैसे रवींद्रनाथ टैगोर, कीट्स, मिल्टन, आदि को पढ़ा और वह इनसे बहुत  प्रभावित हुए। उन्होंने हिंदी, संस्कृत, मैथिली, बंगाली, उर्दू और अंग्रेजी भाषाएँ भी सीखीं। उन्होंने कविता लिखना शुरू किया था जब वह मोकामा हाई स्कूल के छात्र थे। उनका पहला कविता 1924 में 'छात्र सहोदर' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। उनका पहला कविता संग्रह, 'रेणुका,' 1935 में प्रकाशित हुआ था।

राम धारी सिंह दिनकर की काव्य रचनाएँ?

रामधारी सिंह 'दिनकर' - Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह 'दिनकर' ' (23 सितम्‍बर 1908- 24 अप्रैल 1974) हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं।

'दिनकर' स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद 'राष्ट्रकवि' के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति की पुकार है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तिय का चरम उत्कर्ष हमें उनकी कुरुक्षेत्र और उर्वशी नामक कृतियों में मिलता है।

सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास राजनीति विज्ञान में बीए किया। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। बी.

रेणुका, रामधारी सिंह दिनकर का लोकप्रिय काव्य-संग्रह

.

रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता कौन सी है?

A. (Ramdhari Singh Dinkar's Peoms)

दिनकर ने कविता लिखी जो विभिन्न मुद्दों के बारे में उनके भावनाओं और विचारों को व्यक्त करती थी, जैसे राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा, इतिहास, संस्कृति, आदि। उन्होंने वीर रस (वीर भावना), शृंगार रस (रोमांटिक भावना), करुण रस (दु:खदायक भावना), आदि जैसे विभिन्न भावना रसों में कविता लिखी। उन्होंने हिन्दू पौराणिक कथाओं और महाभारत जैसे ग्रंथों पर आधारित कविता भी लिखी। उनके कुछ प्रसिद्ध काम हैं 'रश्मिरथी' (सूर्य के रथचक्री कर्ण ), 'कुरुक्षेत्र' (कुरुक्षेत्र), 'उर्वशी' (देवी उर्वशी), 'परशुराम की प्रतीक्षा' (परशुराम की आशा), आदि।

फलेगी डालों में तलवार - रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध रचना

धनी दे रहे सकल सर्वस्व, तुम्हें इतिहास दे रहा मान; 

सहस्रों बलशाली शार्दूल चरण पर चढ़ा रहे हैं प्राण। 

दौड़ती हुई तुम्हारी ओर जा रहीं नदियाँ विकल, अधीर; 

करोड़ों आँखें पगली हुईं, ध्यान में झलक उठी तस्वीर। 

पटल जैसे-जैसे उठ रहा, फैलता जाता है भूडोल। 

हिमालय रजत-कोष ले खड़ा, हिंद-सागर ले खड़ा प्रवाल, 

देश के दरवाज़े पर रोज़ खड़ी होती ऊषा ले माल। 

कि जाने तुम आओ किस रोज़ बजाते नूतन रुद्र-विषाण, 

किरण के रथ पर हो आसीन लिए मुट्ठी में स्वर्ण-विहान। 

स्वर्ग जो हाथों को है दूर, खेलता उससे भी मन लुब्ध। 

धनी देते जिसको सर्वस्व, चढ़ाते बली जिसे निज प्राण, 

उसी का लेकर पावन नाम क़लम बोती है अपने गान। 

गान, जिनके भीतर संतप्त जाति का जलता है आकाश; 

उबलते गरल, द्रोह, प्रतिशोध, दर्प से बलता है विश्वास। 

देश की मिट्टी का असि-वृक्ष, गान-तरु होगा जब तैयार, 

खिलेंगे अंगारों के फूल, फलेगी डालों में तलवार। 

चटकती चिनगारी के फूल, सजीले वृंतों के शृंगार, 

विवशता के विषजल में बुझी, गीत की, आँसू की तलवार। 

उन्हें भारत के राष्ट्रीय कवि क्यों कहा जाता है?

‘संस्कृति के चार अध्याय’ रचना के लिए रामधारी सिंह दिनकर को ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।

Q. (Ramdhari Singh Dinkar's Death)

दिनकर का निधन 24 अप्रैल 1974 को उम्र 65 वर्ष के होने पर कैंसर के कारण हुआ। उनका अंत्यसंस्कार दिल्ली के राज घाट पर पूर्ण राज्य गौरव के साथ किया गया। उनकी मृत्यु पर उनके जीवन में उनकी कविता और उनके आदर्शों के प्रति समर्पित लाखों भारतीयों ने शोक व्यक्त किया, जो उन्हें एक कवि और एक देशभक्त के रूप में प्रेम करते और सम्मान करते थे।

उनकी विरासत क्या है?

ए. (Ramdhari Singh Dinakar's Achievements)

दिनकर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि एक विद्वान, एक शिक्षाविद, और एक राजनेता भी थे। उन्होंने विभिन्न विषयों पर ऐतिहासिक, दार्शनिक, राजनीतिक, साहित्यिक, आदि पर निबंध और जीवनियाँ लिखीं। उनके कुछ प्रमुख कृतियाँ 'संस्कृति के चार अध्याय' (Four Chapters on Culture), 'दिनकर की डायरी' (Dinkar's Diary), 'भगवान परशुराम' (Lord Parshuram), आदि हैं। उन्होंने विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य को पढ़ाया। वे 1960 के दशक के प्रारम्भ में बिहार के भागलपुर विश्वविद्यालय के उपाचार्य भी रहे थे।

दिनकर ने राजनीति और सार्वजनिक सेवा में भी भाग लिया। उन्होंने 1952 से 1964 तक तीन बार राज्य सभा (भारतीय संसद के उच्च सदन) में चुनाव जीते। उन्हें 1959 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) से सम्मानित किया गया। उन्हें कई बार भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार (सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार) के लिए नामांकित किया गया लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार किया।

उनका निधन कब और कैसे हुआ?

‘कुरूक्षेत्र’ काव्य-संग्रह के रचनाकार कौन है?

A. ‘बारदोली-विजय संदेश’ रामधारी सिंह दिनकर का प्रथम काव्य-संग्रह है।

Q. उर्वशी, रश्मिरथी, रेणुका, परशुराम की प्रतीक्षा और कुरूक्षेत्र रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविताएं हैं।

Q. रामधारी सिंह दिनकर का निधन कब हुआ था?

A. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक विद्यालय में अध्यापक हो गये। १९३४ से १९४७ तक बिहार सरकार की सेवा में सब-रजिस्टार और प्रचार विभाग के उपनिदेशक पदों पर कार्य किया। १९५० से १९५२ तक मुजफ्फरपुर कालेज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे, भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति के पद पर कार्य किया और उसके बाद भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार बने।

भारत के राष्ट्रकवि राम धारी सिंह दिनकर - Ramdhari Singh Dinkar Biography in Hindi

राम धारी सिंह दिनकर आधुनिक हिंदी साहित्य के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली कवियों में से एक थे। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, एक देशभक्त, एक शैक्षिक, और एक राजनेता भी थे। उन्होंने कविताएँ, निबंध, और जीवनियाँ लिखीं जिनमें उनके देश के प्रति उनका प्यार, न्याय के प्रति उनका जोश, और मानवता के प्रति उनकी दृष्टि प्रकट होती थी। उन्हें उनके कलम के नाम से "दिनकर" कहा जाता था, जिसका अर्थ संस्कृत में "सूरज" होता है। उन्हें उनकी प्रेरणादायक और क्रांतिकारी कविता के लिए भी राष्ट्रकवि (राष्ट्रीय कवि) और युगचरण (युग के चरण) कहा जाता था, जिनके द्वारा उन्होंने जनमानस को जागरूक किया और अत्याचारीओं का सामना किया।

उन्होंने कब और कहाँ जन्म लिया था?

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म कहाँ हुआ था?

A. यह रामधारी सिंह दिनकर का लोकप्रिय काव्य-संग्रह है जिसका प्रकाशन वर्ष 1946 में हुआ था।

Q. रामधारी सिंह दिनकर का 24 अप्रैल 1974 को चेन्नई, तमिलनाडु में निधन हुआ था।

Q. राजेंद्र प्रसाद’ ने उन्हें वर्ष 1959 में ‘पद्म विभूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया था।

★ वर्ष 1961 में रामधारी सिंह दिनकर उनकी प्रसिद्ध काव्य रचना ‘उर्वशी’ के लिए ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

★ बिहार राज्य के राज्यपाल ‘जाकिर हुसैन’ जो बाद में भारत के तीसरे राष्ट्रपति भी बने। उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर जी को ‘डाक्ट्रेट’ की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।

★ वर्ष 1999 में भारत सरकार ने उनकी स्मृति में ‘डाक टिकट’ भी जारी किया था।

★ इसके अतिरिक्त, उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए कई सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नाम, उनके नाम पर रखे गए हैं।

FAQs

Q.

ramdhari singh dinkar biography in hindi pdf

उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय ज़िले के सिमरिया ग्राम में हुआ था।

Q. रेणुका किसकी रचना है?

A. रामधारी सिंह दिनकर के प्रथम काव्य-संग्रह का क्या नाम है?

A. (Why Ramdhari Singh Dinkar is Called National Poet of India)

दिनकर को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के माध्यम से उनकी कविता के महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत के राष्ट्रीय कवि कहा जाता है। उन्होंने कविताएँ लिखीं जो लोगों को ब्रिटिश औपचारिक शासन के खिलाफ लड़ने और अपने अधिकारों और गरिमा की मांग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने वह कविताएँ भी लिखीं जो भारतीय समाज में मौजूद सामाजिक बुराइयों और असमानताओं की आलोचना करतीं। भारत और उसकी संस्कृति की महिमा और विविधता के बारे में भी काव्य रचना का कार्य किया। वह महात्मा गांधी और उनके अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों के प्रबल समर्थक भी थे। उन्होंने अन्य स्वतंत्रता सेनानियों जैसे लाला लाजपत राय, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, आदि सेनानियों का भी सम्मान किया।

उनकी अन्य उपलब्धियाँ क्या थीं?