Acharya pramod krishnam biography in hindi

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मुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूं और अपने रास्ते पर चलता रहूंगा."

राजीव को दिया वादा और कांग्रेस से दूरी...

2019 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह के खिलाफ उतारकर कांग्रेस ने कृष्णम को बड़ी जिम्मेदारी दी थी. आचार्य प्रमोद 19 फरवरी को यूपी के संभल जिले में कल्किधाम का शिलान्यास कार्यक्रम करा रहे हैं. 

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को न्योता दिया है.

कहा जाता है कि कलियुग के अंत में भगवान कल्कि धरती पर आएंगे. राजनीति इनके पेशेवर जीवन में दिखता है तो अध्यात्म निजी जीवन में. उन्हें तक्सीम न करना, नबी जितने तुम्हारे हैं, नही उतने हमारे हैं.'फिर तालियों की आवाज रुकती नहीं.

लेकिन प्रमोद कृष्णम धर्म की अपनी रुचि को सनातन से आगे ले गए. अब मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) के नेतृत्व वाली पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है.

कांग्रेस ने कहा है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम को 'अनुशासनहीनता' और पार्टी के खिलाफ बार-बार बयान देने के आरोप में शनिवार को निष्कासित कर दिया गया है.

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कौन हैं आचार्य प्रमोद कृष्णम?
आचार्य प्रमोद कृष्णम 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ से उतरे थे लेकिन करारी हार हुई थी.

जिनका धरती पर आगमन होना है. आचार्य प्रमोद, राम मंदिर (Ram Mandir) प्राण प्रतिष्ठा समारोह से वक्त से ही लगातार सुर्खियों में बने हैं. वे टीम प्रियंका गांधी का हिस्सा थे. हालांकि इस अलग पहचान के पीछे उनका कांग्रेसी अतीत भी है, जिससे अभी-अभी वो 'मुक्त'हो चुके हैं. क्या प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण स्वीकार करना पार्टी विरोधी है?'

प्रमोद कृ्ष्णम ने कहा, 'क्या श्री कल्की धाम का शिलान्यास करवाना पार्टी विरोधी है?

क्या अयोध्या जाना पार्टी विरोधी है? बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर ममता बनर्जी को समर्थन नहीं किया गया तो नरेंद्र मोदी को हराना मुश्किल हो जाएगा. 1990 में उत्तर प्रदेश के संभल में उन्होंने कल्कि फाउंडेशन की स्थापना की. कैसा रहा सियासी और आध्यात्मिक सफर?

लहराती सफेद दाढ़ी,सफेद वस्त्र और इन सफेदियों के बीच ललाट पर लाल तिलक.आचार्य प्रमोद कृष्णम पहली ही नजर में ठेठ हिन्दू संत से अपनी अलग एक छवि पेश करते हैं.हिन्दुत्व के भगवा ब्रांड के बीच उनका सफेद रंग चुनना उनकी विचारधारा और अध्यात्म को अलग पहचान देता रहा है.

जिन्होंने सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी. वहीं प्रमोद कृष्णम आज ये कहते नजर आ रहे हैं कि वे आजीवन प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े रहेंगे. अब उन पर कांग्रेस ने गाज गिरा दी है.

खुद प्रमोद कृष्णम कहते हैं कि जो लोग ये कहते हैं कि मैं पूजा करता हूं,प्रेम नहीं करता वे लोग झूठ बोलते हैं.

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भगवान कल्कि की भक्ति

राजीव को वचन देने की ये कहानी बताएंगे, लेकिन इससे पहले एक हिन्दू पौराणिक कथा समझनी होगी. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने यह प्रस्ताव दिया था.'

क्या है आचार्य प्रमोद की सफाई?
आचार्य प्रमोद ने कहा कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात केवल उन्हें कल्कि धाम उद्घाटन के लिए आमंत्रण देने के लिए थी.

क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को श्री कल्की धाम के शिलान्यास का निमंत्रण देना पार्टी विरोधी है?'

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Acharya Pramod Krishnam; छात्र जीवन से शुरू किया था कांग्रेस का सफर, छह वर्ष के लिए निष्कासित, अब भाजपा का थाम सकते हैं हाथ

डिजिटल डेस्क, मुरादाबाद। कांग्रेस पार्टी नेताओं को समय-समय पर नसीहत देते आ रहे कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम को आखिरकार कांग्रेस ने छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने छात्र जीवन से ही कांग्रेस की राजनीति शुरू की थी। विभिन्न पदों पर रहने के अलावा उत्तर प्रदेश में कई बार पार्टी के महासचिव बने। कांग्रेस की पालिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्य रहे। 2018 में पार्टी की तरफ से राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं पंजाब के आम चुनाव में स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी मिली। 2014 में संभल संसदीय सीट और 2019 में लखनऊ से पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े।

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कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना की थी

उनका साफ कहना था कि पार्टी में कुछ नेता वामपंथी विचारधारा के हैं, जो कांग्रेस को बर्बाद कर रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन का निमंत्रण पत्र ठुकराने को भी पार्टी नेताओं की आलोचना की थी। उनका कहना था कि गांधी परिवार को रामलला के दर्शन करने जाना चाहिए। भगवान सबके हैं। मंदिर के निर्माण का श्रेय भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया था।

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आचार्य ने साफ कहा, मोदी जी की वजह से मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। आचार्य ने तीन दिन पहले राहुल गांधी के मिलने का समय नहीं देने की बात भी कही थी। बोले-प्रधानमंत्री से तीन-चार दिन में मिलने का समय मिल गया। लेकिन, राहुल गांधी से महीनों बाद भी मिलना संभव नहीं हो पा रहा है।

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तब राजीव से मैंने वादा किया था.