As a social reformer, sensitive litterateur and skilled doctor, he gave a new direction towards improving the wellbeing of the society. खूबचंद बघेल (Dr. खूबचंद बघेल के साथ महंत लक्ष्मीनारायण दास एवं नंदकुमार दानी भी गिरफ्तार कर लिए गए । सन् 1933 में जेल से रिहा होने के पश्चात् उन्होंने गांधीजी के आह्वान पर हरिजन उत्थान का कार्य प्रारंभ कर दिया। कांग्रेस समिति द्वारा उन्हें प्रांतीय हरिजन सेवा समिति का मंत्री नियुक्त किया गया ।
सन् 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ होते ही वे पुनः राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए तथा घूम-घूम कर युद्ध विरोधी भावनाओं का प्रसार करने लगे। रायपुर तहसील से 1946 के कांग्रेस चुनाव में वे निर्विरोध चुने गए। इस तरह सन 1946 में उन्हे तहसील कार्यालय कार्यकारिणी के अध्यक्ष और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया।
स्वतंत्रता के बाद उन्हें प्रांतीय शासन ने संसदीय सचिव नियुक्त किया। 1950 में आचार्य कृपलानी के आह्वान पर वे कृषक मजदूर पार्टी में शामिल हुए। 1951 के बाद आम चुनाव में वे विधानसभा के लिए पार्टी से निर्वाचित हुए। 1965 तक विधानसभा के सदस्य रहे। 1965 में राज्यसभा के लिए चुने गए ओर राजनीति से 1968 तक जुड़े रहे। और इस तरह से उनका राजनीतिक सफर रहा।
डॉ.
Cabinet Minister Shri Tank Ram Verma and former Chief Minister Shri Bhupesh Baghel were also present on this occasion.
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, reflecting on Dr. Khubchand Baghel’s legacy, described him as the visionary of Chhattisgarh, renowned for his contributions as a distinguished doctor and litterateur.
Highlighting his government’s achievements in its seven-month tenure, Chief Minister Shri Sai noted, “With your blessings, I have been entrusted with the leadership of the government.
He affirmed, “We are committed to realizing the vision our ancestors had for Chhattisgarh.
खूबचंद बघेल एक अच्छे साहित्कार भी थे। उनके द्वारा की गई रचनाएं इस प्रकार से है-
ऊँच-नींच:– ऊँच-नींच डॉ. का दर्जा दिया गया।
विवाह
डॉ. भारत भूषण बघेल को गोद लिया था।
डॉ. खूबचंद बघेल का विवाह कम उम्र में ही कर दिया गया था, वे सिर्फ 10 वर्ष के थे और अपनी प्राथमिक कक्षा की पढ़ाई कर रहे थे। उसी समय उनका विवाह उनसे 3 साल छोटी कन्या राजकुँवर से करा दिया गया था। उनकी पत्नी राजकुँवर से 3 पुत्रियाँ पार्वती, राधा और सरस्वती का जन्म हुआ। बाद में उन्होंने पुत्र मोह के कारण डॉ.
Khubchand Baghel Ka Jeevan Parichay:
डॉ. का दर्जा दिया गया।
डॉ. 65 lakh families of the state are under the purview of this scheme. खूबचंद बघेल
महात्मा गाँधी के आव्हान पर अगस्त1942 में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय योगदान के कारण ढाई साल जेल में रहे।
अन्य जानकारी
1950 में आचार्य कृपलानी के आह्वान पर खूबचंद बघेल 'कृषक मजदूर पार्टी' में शामिल हुए। 1951 के बाद आम चुनाव में वे विधानसभा के लिए पार्टी से निर्वाचित हुए।
खूबचंद बघेल (अंग्रेज़ी: Khubchand Baghel, जन्म- 19 जुलाई, 1900, रायपुर; मृत्यु- 2 फ़रवरी, 1969, दिल्ली) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के महान नेता और साहित्यकार थे। वह विधायक और राज्य सभा के सांसद भी रहे। डॉ.
खूबचंद बघेल का जन्म
Dr. बघेल जी स्वयं मनवा कुर्मी के थे, परन्तु उन्होंने अपनी एक पुत्री का विवाह दिल्लीवार कुर्मी समाज में तथा सबसे छोटी बेटी का विवाह पटना के राजेश्वर पटेल जी से करवाया; फलस्वरूप उन्हें समाज के क्रोध के कारण कुर्मी समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। परन्तु वे हमेशा से इस उपजाति बंधन को तोड़ने में लगे रहे।
आंदोलन
'पंक्ति तोड़ो आंदोलन' छत्तीसगढ़ में व्याप्त एक कुप्रथा थी। इसमें शादी में समाज के आधार पर पंक्ति निर्धारित होती थी। उसी पंक्ति में बैठकर भोजन करना होता था। अगर कोई कुर्मी समाज का है तो सिर्फ कुर्मी समाज की पंक्ति में बैठकर ही भोजन कर सकता था। अन्य किसी पंक्ति में बैठना उसके लिए अपराध था। इसी कुरीति को तोड़ने के लिए डॉ.
खूबचंद बघेल की रचना
Dr. (बाद में सरकार द्वारा एम.बी.बी.एस. एम.
खूबचंद बघेल
पूरा नाम
डॉ.
खूबचंद बघेल की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुआ। और आगे की पढ़ाई के लिए उन्हे रायपुर के सरकारी स्कूल में दाखिला करवाया गया जहां से उन्होने अपनी मैट्रिक की शिक्षा पूरी की उसके बाद उन्होंने नागपुर के रॉबर्ट्सन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। उसी बीच देशभर में चलने वाले असहयोग आंदोलन के प्रभाव में आकर उन्होने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और आंदोलन में शामिल हो गये। बाद में घर वालों के समझाईस देने के उपरांत उन्होने फिर से एल.एम.पी. (लेजिस्लेटिव मेडिकल प्रक्टिसनर) नागपुर में दाखिला लिया और सन् 1923 में एल.एम.पी.
He inspired hundreds of youth by walking from village to village and connected them with the freedom struggle. खूबचंद बघेल की शिक्षा
डॉ. The plays written by him against social evils also made a deep impact on the public.
In the memory and honor of Dr. Baghel, the state level honor is given every year by the Government of Chhattisgarh to encourage significant achievement and research work in the field of agriculture.