Dhirubhai ambani life story in hindi language
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Besse’ कंपनी ‘Shell Products’ की डिस्ट्रीब्यूटर बन गई और धीरुभाई का प्रमोशन हो गया और वे कंपनी के फिलिंग स्टेशन के मैनेजर बन गए।
शुरु से ही बिजनेस माइंडेड थे –
आपको बता दें कि धीरूभाई अंबानी का शुरू से ही बिजनेस मांइडेड थे, जब वे नौकरी कर रहे थे तभी से उनकी दिलचस्पी बिजनेस की तरफ ज्यादा थी। वे हमेशा बिजनेस करने के बारे में सोचते रहते और बिजनेस के नए मौकों की तलाश में रहते थे।
बिजनेस की तरफ उनका जुझारूपन तब सामने आया जब धीरूभाई अंबानी, उस दौर के बड़े-बेड़े बिजनेसमैन की बातें सुनने और व्यापार की बारीकियों को समझऩे के के लिए 1 रुपए खर्च कर चाय पीते थे, जबकि जिस कंपनी में वे काम करते थे महज 25 पैसे में चाय मिलती थी। धीरूभाई अंबानी ने बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ली।
रिलायंस कंपनी की शुरुआत –
आपको बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी यमन में रह रहे थे उसके कुछ समय बाद यमन में आजादी के लिए आंदोलन शुरु हो गए थे, जिसकी वजह से वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यापार के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे। जिसके बाद धीरूभाई अंबानी को साल 1962 मे यमन से भारत लौटना पड़ा।
ये दौर धीरूभाई अंबानी जी के जीवन का वो दौर था उनके पास न तो नौकरी थी और न ही कोई कारोबार की शुरुआत करने के लिए पूंजी। ऐसे में उन्होनें अपने चचेरे भाई चम्पकलाल दमानी के साथ मिलकर पॉलिस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात का काम शुरू किया।
इसके बाद उन्होंने महज 15 हजार रुपए की राशि के साथ रिलायंस कार्मशियल कॉरपोरेशन की शुरुआत मस्जिद बंदर के नरसिम्हा स्ट्रीट पर एक छोटे से ऑफिस के साथ की थी और यहीं से रिलायंस कंप़नी का उदय हुआ। वहीं उस समय धीरूभाई अंबानी और उनका परिवार भुलेस्वर स्थित जय हिन्द एस्टेट में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे।
आपको बता दें कि शुरूआती दौर में बिजनेस टाइकून धीरूभाई अंबानी का इरादा पॉलिएस्टर यार्न को आयात करने और मसाले निर्यात करने का था। इसके साथ ही आपको ये भी बता दें कि रिलायंस कॉरपोरेशन का पहला ऑफिस नर्सिनाथान स्ट्रीट में बना था।
जो कि महज एक 350 स्काव्यर फीट का एक कमरा था जिसमें सिर्फ एक टेलीफोन, एक टेबल और 3 कुर्सियां थी। शुरू में उनके पास सिर्फ दो सहकर्मचारी थे और उनके काम में उनकी मद्द करते थे।
दरअसल, धीरूभाई अंबानी और चंपकलाल दमानी दोनों का स्वभाव और बिजनेस करने का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग था इसी वजह से साल 1965 में धीरूभाई अंबानी ने चम्पकलाल दमानी के साथ बिजनेस में पार्टनरशिप खत्म कर दी। और अपने दम पर बिजनेस की शुरुआत की थी।
दरअसल चम्पकलाल दमानी एक सतर्क व्यापारी थे और उन्हें सूत बनाने के माल में कोई रूचि नहीं थी जबकि धीरूभाई अंबानी को रिस्क उठाने वाला व्यापारी माना जाता था। इसके बाद धीरूभाई अंबानी ने सूत के व्यापार में अपनी किस्मत आजमाई और सकारात्मक सोच के साथ इस बिजनेस की शुरुआत की।
धीरूभाई अंबानी को अपने माल की कीमत पहले से ही बढ़ने की उम्मीद थी और उससे उन्होंने जो मुनाफा कमाया वो उनके बिजनेस ग्रोथ के लिए काफी अच्छा था।
रिलायंस टेक्सटाइल्स की शुरुआत –
वहीं धीरे-धीरे धीरूभाई अंबानी को कपड़े के व्यापार की अच्छी खासी समझ हो गई थी। इस व्यापार में अच्छे मौके मिलने की वजह उन्होंने साल 1966 में अहमदाबाद के नैरोड़ा में एक कपड़ा मिल की स्थापना की जहां पर कपड़ों को बनाने में पोलियस्टर के धागों का इस्तेमाल हुआ और फिर धीरूभाई अंबानी ने इस ब्रांड का नाम ‘विमल’ ब्रांड रखा।
आपको बता दें कि इस ब्रांड का नाम विमल, धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमणिकलाल अंबानी के बेटे विमल अंबानी के नाम पर रखा गया था और इस ब्रांड का पूरे भारत में जमकर प्रचार-प्रसार भी किया गया वहीं धीमे-धीमे विमल ब्रांड भारत के छोटे-छोटे इलाको में भी घर-घर घरेलू नाम बन गया।
साल 1975 में विश्व बैंक की टेक्नीशियन टीम ने रिलायंस टैक्सटाइल्स के निर्माण इकाई का दौरा किया और उसे विकसित देशों के मानकों से भी अच्छा बताया।
वहीं 1980 के दशक में धीरूभाई अंबानी ने पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न निर्माण का सरकार से लाइसेंस ले लिया और इसके बाद लगातार धीरूभाई अंबानी सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए और उन्होनें कभी अपने करियर में पीछे मुड़कर नहीं देखा।
रिलायंस और स्टॉक मार्केट –
भारत में इक्विटी कल्ट की शुरुआत करने का क्रेडिट भी धीरूभाई अंबानी को ही जाता है। आपको बता दें कि जब 1977 में रिलायंस ने आईपीओ जारी किया तब 58,000 से ज्यादा निवेशकों ने उसमें निवेश किया। धीरुभाई गुजरात और दूसरे राज्यों के ग्रामीणों का हासिल करने में सफल रहे कि जो उनके कंपनी के शेयर खरीदेगा उसे अपने निवेश पर खूब मुनाफा होगा।
रिलायंस इंडस्ट्री का किया विस्तार –
दुनिया के जाने-माने बिजनेसमैन धीरूभाई अंबानी ने अपनी जिंदगी में रिलायंस के कारोबार का विस्तार अलग-अलग क्षेत्रों में किया। आपको बता दें कि इसमें मुख्य रूप से पेट्रोरसायन, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, बिजली, फुटकर, कपड़ा/टेक्सटाइल, मूलभूत सुविधाओं की सेवा, पूंजी बाज़ार और प्रचालन-तंत्र शामिल हैं। वहीं अब धीरूभाई अंबानी के दोनों बेटे नए मौका का पूरी तरह से इस्तेमाल कर रिलायंस इंडस्ट्री को आगे चला रही है।
आपको बता दें कि धीरूभाई अंबानी ने महज चंद पैसों से इतनी विशाल रिलायंस इंडस्ट्री की शुरुआत की थी।
आपको बता दें कि एक कमरे से शुरु हुई इस कंपनी में साल 2012 तक करीब 85 हजार कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि सेंट्रल गवर्नमेंट के पूरे टैक्स में से 5 प्रतिशत रिलायंस देती थी और 2012 में संपत्ति के हिसाब से दुनिया की 500 सबसे अमीर और विशाल कंपनियों में रिलायंस को भी शामिल किया गया था।
इसके अलावा धीरूभाई अंबानी को एशिया के टॉप बिजनेसमैन के लिस्ट में भी शामिल किया जा चुका है।
कई आरोपों को भी झेला –
साफ है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए धीरूभाई अंबानी ने काफी आलोचनाओं को भी झेला था। उन पर उनपर लचीले मूल्यों और अनैतिक प्रवृति अपनाने के आरोप भी लगे थे और तो और बिजनेस की दुनिया के बेताज बादशाह धीरूभाई अंबानी पर अपनी जरूरतों के हिसाब से सरकारी नीतियों को बदलवाने के भी आरोप भी लगे थे।
यहां तक कि यह भी कहा गया कि कॉम्पटीटर को भी सरकारी नीतियों के सहारे मात दी। लेकिन धीरूभाई अंबानी पर आलोचनाों को कोई असर नहीं हुआ और वे अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते रहे।
मृत्यु –
महान उद्योगपति धीरुभाई अंबानी जी को 24 जून, 2002 में हार्ट अटैक की वजह से मुंबई के ब्रैंच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार खराब होती चली गई और 6 जुलाई, साल 2002 में भारत की इस महान शख्सियत ने अपनी अंतिम सांसे लीं।
उनकी मृत्यु के बाद उनके व्यापार को उनके बड़े बेटे मुकेश अंबानी ने बेहद कुशलता पूर्वक संभाला यही नहीं आज वे भारत के सबसे धनी और विश्व के सबसे सफलतम बिजनेसमैन की लिस्ट में शुमार हैं।
उपलब्धियां एवं पुरस्कार –
- साल 1998 में धीरूभाई अंबानी जी को पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी द्धारा “व्हार्टन डीन मैडल” दिया गया था।
- साल 1996, 1998 और 2000 में एशियावीक पत्रिका द्धारा ‘पॉवर 50 – मोस्ट पावरफुल पीपल इन एशिया’ की लिस्ट में शामिल किया गया।
- साल 1999 में धीरुभाई अंबानी जी को बिजनेस इंडिया-बिजनेस मैन ऑफ द ईयर सम्मान से नवाजा गया था।
- साल 2000 में भारत में केमिकल उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘केमटेक फाउंडेशन एंड कैमिकल इंजीनियरिंग वर्ल्ड’ द्वारा ‘मैन ऑफ़ द सेंचुरी’ सम्मान से नवाजा गया था।
- साल 2000 में ‘इकनोमिक टाइम्स अवॉर्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस’ के तहत ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
- साल 2011 में एशियन बिज़नस लीडरशिप फोरम अवॉर्ड्स द्धारा मरणोपरांत ‘एबीएलएफ ग्लोबल एशियन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
- साल 2000 में फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा ‘मैन ऑफ 20tH सेंचुरी’ घोषित किया गया।
- व्यापार और उद्योग में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए साल 2016 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक के रुप में पद्म विभूषण सम्मान के साथ सम्मानित किया गया।
वहीं जिस तरह धीरुभाई अंबानी ने तमाम संघर्षों को झेलकर अपने जीवन में असीम सफलताएं हासिल की और बाकी सभी के लिए एक मिसाल पेश की। वो वाकई तारीफ-ए-काबिल है। उनके जीवन से हर किसी को प्रेरणा लेने की जरुरत है।
“सपने हमेशा बड़े होने चाहिए, प्रतिबद्धता हमेशा गहरी होनी चाहिए और प्रयास हमेशा महान होने चाहिए।”
इस तरह बिजनेस की दुनिया के बेताज बादशाह धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्री की शुरूआत कर न सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल कायम भी की है।
Editorial Team
Dhirubhai Ambani in Hindi/ धीरजलाल हीरालाल अंबानी जिन्हें धीरुभाई भी कहा जाता है, भारत के एक प्रसिद्ध उद्योगपति थे जिन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना की। धीरूभाई अंबानी वो इंसान थे जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर किया। एक मध्य वर्ग परिवार में जन्मे धीरूबाई एक समय पेट्रोल पम्प में 300 रुपए वेतन में काम किये, लेकिन जब उन्होंने दुनिया से अलविदा किया उस समय उनकी सम्पति 62 हजार करोड़ रूपये से भी ज्यादा था। उन्होंने जिस मेहनत और लगन से तरक्की की है उसी वजह से भारत का हर युवा उनसें प्रेरणा लेता है। वे भारत ही नहीं, विश्व के प्रेरणादायी व्यक्तिवो में एक थे।
| नाम | धीरजलाल हीराचंद अंबानी (Dhirajlal Hirachand Ambani) |
| जन्म दिनांक | 28 दिसंबर 1932 |
| जन्म स्थान | चोरवाड़, गुजरात, भारत |
| मृत्यु | 24 जून, 2002 |
| पिता का नाम | हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी |
| माता का नाम | जमनाबेन |
| पत्नी | कोकिलाबेन |
| संतान | मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी और दो बेटियाँ नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर |
शुरुवाती जीवन – Early Life of Dhirubhai Ambani
धीरूभाई अंबानी के शुरुवाती जीवन कठिनमय रहा हैं। उनका जन्म 28 दिसंबर, 1932, को गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गाँव में एक सामान्य मोध बनिया परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी और माता का नाम जमनाबेन था। इनके पिता एक शिक्षक थे और माँ गृहणी। धीरूभाई के चार भाई—बहन और थे। इतने बड़े परिवार का लालन-पालन करना अध्यापक गोर्धनभाई के लिए सरल काम न था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें हाईस्कूल में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ गई। पिता की मदद करने के लिए धीरूभाई ने छोटे-मोटे काम करने शुरू कर दिए।
करियर – Dhirubhai Ambani Career Story in Hindi
उन्होंने सबसे पहले गिरनार के पास भजिए की एक दुकान लगाई, जो मुख्यतः यहां आने वाले पर्यटकों पर आश्रित थी। लेकिन इस काम में उन्हें असफलता हाथ लगी क्यूंकि यह काम पूरी तरह आने वाले पर्यटकों पर निर्भर था, जो साल के कुछ समय तो अच्छा चलता था बाकि समय इसमें कोई खास लाभ नहीं था। इसके बाद उनके पिता इन्हे नौकरी करने की सलाह दी। धीरूभाई के बड़े भाई रमणीक भाई उन दिनों यमन में नौकरी किया करते थे। उनकी मदद से धीरूभाई को भी यमन जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने ‘ए.
Besse’ नामक कंपनी में एडेन शहर में महज 300 रूपये प्रति महीने की सैलरी पर ज्वाइन की थी। वहीं 2 साल बाद ‘A. धीरूभाई अंबानी का जन्म कहां हुआ था?
Ans – चोरवाड़, गुजरात, भारत में
Q. धीरूभाई अंबानी, जिनका पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था, भारत के उन गिने-चुने उद्यमियों में से हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता, और साहस से इतिहास रचा। Dhirubhai Ambani Life Story in Hindi यह सिखाती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसकी शुरुआत कितनी भी छोटी हो, बड़े सपनों और दृढ़ निश्चय के साथ असंभव को संभव बना सकता है। उनका मशहूर कथन, आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। यह कहानी Reliance Industries Success Story का आधार है, जो भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट साम्राज्यों में से एक है। इस लेख में हम How Dhirubhai Ambani Started Reliance उनके जीवन के संघर्ष, उनकी रणनीतियों और Impact of Dhirubhai Ambani on Indian Business को विस्तार से जानेंगे। Dhirubhai Ambani Biography in Hindi की शुरुआत 28 दिसंबर 1932 को गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक छोटे से गांव चोरवाड से होती है। धीरूभाई का जन्म एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता, हीराचंद गोवर्धनभाई अंबानी, एक स्कूल शिक्षक थे, जबकि उनकी मां, जमनाबेन अंबानी, परिवार का ख्याल रखती थीं। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण, धीरूभाई को बचपन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धीरूभाई की औपचारिक शिक्षा केवल हाई स्कूल तक सीमित रही। पारिवारिक जिम्मेदारियों ने उन्हें कॉलेज जाने से रोक दिया, लेकिन उनकी जिज्ञासु बुद्धि और व्यापार के प्रति रुचि ने उन्हें कभी पीछे नहीं हटने दिया। Indian Entrepreneur Success Story in Hindi में धीरूभाई का नाम इसलिए खास है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी औपचारिक डिग्री के अपनी प्रतिभा से सब कुछ हासिल किया। बचपन में, धीरूभाई छोटे-छोटे व्यापारिक प्रयोग करते थे। वे स्थानीय मेलों में भजिया बेचते, छोटे स्टॉल लगाते, और ग्राहकों से बातचीत के जरिए बाजार की गतिशीलता को समझते थे। इन अनुभवों ने उनकी व्यापारिक सोच को मजबूत किया। 16 साल की उम्र में, धीरूभाई ने अपने करियर की शुरुआत यमन (एडन) में की। वहां उन्होंने A. Besse & Co. में एक पेट्रोल पंप पर क्लर्क के रूप में काम शुरू किया। इस नौकरी ने उन्हें वैश्विक व्यापार की बारीकियां, आपूर्ति श्रृंखला, और ग्राहक व्यवहार को समझने का मौका दिया। यमन में बिताए आठ सालों ने Dhirubhai Ambani Business Journey की नींव रखी। यमन में उन्होंने मसालों और पोलिएस्टर यार्न के व्यापार को करीब से देखा। इस दौरान उन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम किया और व्यापार की गहरी समझ विकसित की, जो बाद में उनके व्यवसाय की आधारशिला बनी। 1958 में धीरूभाई भारत लौटे और अपने भाई चंपकलाल अंबानी के साथ मिलकर Reliance Commercial Corporation की स्थापना की। How Dhirubhai Ambani Started Reliance की कहानी मुंबई के मस्जिद बंदर इलाके में एक छोटे से कमरे से शुरू हुई। उनकी शुरुआती पूंजी मात्र 15,000 रुपये थी, लेकिन उनके सपने और आत्मविश्वास असीमित थे। धीरूभाई ने अपने व्यवसाय की शुरुआत मसालों के निर्यात से की। वे भारतीय मसालों को यमन भेजते थे, जहां उनकी मांग थी। इसके बाद, उन्होंने पोलिएस्टर यार्न के व्यापार पर ध्यान दिया। उस समय भारत में पोलिएस्टर की मांग तेजी से बढ़ रही थी। धीरूभाई ने इस अवसर को भुनाया और उच्च गुणवत्ता वाले यार्न को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया, जिससे उनका व्यवसाय तेजी से फला-फूला। Dhirubhai Ambani Life Story in Hindi में कई चुनौतियां दर्ज हैं:- फिर भी, धीरूभाई ने अपनी मेहनत, लगन, और रणनीतिक सोच से इन चुनौतियों को अवसरों में बदला। वे खुद माल खरीदते, बेचते, और हिसाब-किताब का प्रबंधन करते थे। उनकी यह मेहनत Reliance Commercial Corporation History को एक मजबूत आधार प्रदान करती थी। 1966 में धीरूभाई ने Reliance Textiles की स्थापना की, जो बाद में Reliance Industries के नाम से प्रसिद्ध हुई। उन्होंने Vimal ब्रांड के तहत पोलिएस्टर कपड़े का उत्पादन शुरू किया। Vimal Brand History बताती है कि यह ब्रांड जल्द ही भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में लोकप्रिय हो गया। धीरूभाई ने विमल के कपड़ों को किफायती दामों पर उपलब्ध कराया, जिसने इसे घर-घर में पहुंचाया। 1977 में, धीरूभाई ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया और Reliance Textiles का Initial Public Offering (IPO) लॉन्च किया। यह Reliance IPO History का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। Dhirubhai Ambani Share Market Story में यह कदम भारत के शेयर बाजार को बदलने वाला साबित हुआ। धीरूभाई ने मध्यमवर्गीय भारतीयों को शेयर बाजार में निवेश के लिए प्रेरित किया, जिससे लाखों लोग रिलायंस के शेयरधारक बने। उनका सपना था कि हर भारतीय के पास शेयर हो। इस कदम ने How Reliance Changed Indian Stock Market की कहानी लिखी और रिलायंस की पूंजी को कई गुना बढ़ा दिया। Reliance Industries Success Story केवल कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं रही। धीरूभाई ने रिलायंस को विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित किया:- धीरूभाई की सफलता उनकी अनूठी सोच और कार्यशैली का परिणाम थी। Business Lessons from Dhirubhai Ambani निम्नलिखित हैं:- उनका प्रेरणादायक कथन : “बड़ा सोचो, तेजी से सोचो, और आगे की सोचो। विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है।” Dhirubhai Ambani Life Story in Hindi में कई विवाद भी शामिल हैं। उन पर राजनीतिक और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे। कुछ लोगों ने उन्हें सरकार के साथ नजदीकी संबंधों का लाभ उठाने वाला बताया। Reliance vs Tata Competition और अन्य कॉर्पोरेट घरानों के साथ उनकी प्रतिस्पर्धा भी चर्चा में रही। लेकिन Challenges Faced by Dhirubhai Ambani ने उन्हें कभी रोक नहीं पाया। हर बार वे और मजबूत होकर उभरे। धीरूभाई ने कोकिलाबेन अंबानी से विवाह किया। उनके दो बेटे, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी, और दो बेटियां, नीना कोठारी और दीप्ति सलगांवकर, हैं। Dhirubhai Ambani Family की एकजुटता उनकी सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। 2002 में धीरूभाई के निधन के बाद Mukesh Ambani and Anil Ambani Business Split हुआ। मुकेश अंबानी ने Reliance Industries को संभाला, जिसमें Reliance Jio Success Story, रिटेल, और ऊर्जा शामिल हैं। अनिल अंबानी ने Reliance Communications, Finance और Infrastructure क्षेत्र को चुना। धीरूभाई को उनके योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए: Dhirubhai Ambani Legacy आज भी Reliance Industries के रूप में जीवित है। उनके बेटे मुकेश अंबानी ने Reliance Jio Success Story के साथ टेलीकॉम क्षेत्र में क्रांति ला दी। धीरूभाई का सपना था कि हर भारतीय शेयर बाजार का हिस्सा बने, और आज रिलायंस के लाखों शेयरधारक इस सपने को साकार करते हैं। Impact of Dhirubhai Ambani on Indian Business आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था में देखा जा सकता है। Dhirubhai Ambani Success Story in Hindi हमें सिखाती है कि मेहनत, साहस, और सही दृष्टिकोण के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। How to Achieve Success Like Dhirubhai Ambani का जवाब उनकी जिंदगी में छिपा है। एक छोटे से गांव से शुरू करके उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उनकी कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहता है। उनका संदेश : “अगर आप सपने देख सकते हैं, तो उन्हें सच भी कर सकते हैं।” क्या आप Dhirubhai Ambani Motivational Story से प्रेरित हुए? अगर आप और Inspirational Stories in Hindi पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे न्यूजलेटर को सब्सक्राइब करें और Facebook, Instagram और Twitter पर हमारे साथ जुड़ें। How to Achieve Success Like Dhirubhai Ambani के लिए आज ही अपने सपनों को बड़ा सोचें और कदम बढ़ाएं! धीरजलाल हीरालाल अंबानी जो ज्यादातर धीरूभाई अंबानी जिन्हें कौन नहीं जानता, इनकी ख्याति देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। धीरूभाई अंबानी बिजनेस की दुनिया के बेताज बादशाह थे। धीरूभाई अंबानी का नाम उन सफल बिजनेसमैन की लिस्ट में शुमार था जिन्होंने अपने दम पर सपने देखे और उन्हें हकीकत में बदलकर पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिखाया कि अगर खुद पर कुछ करने का विश्वास हो तो निश्चित ही सफलता आपके कदम चूमती है। धीरूभाई अंबानी का मानना था कि – “जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं, वो पूरी दुनिया को जीत सकते हैं” धीरुभाई अंबानी भारत की ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंन न सिर्फ बिजनेस की दुनिया में अपना बड़ा नाम किया, बल्कि भारत को उद्योग के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलवाई। एक गरीब खानदान में पैदा हुए धीरुभाई ने बड़े बिजनेसमैन बनने के सपने देखे और अपने कठोर दृढ़संकल्पों और मेहनत के बल पर उन्हें हकीकत में भी बदला। आइए जानते हैं भारत के सबसे सफल और बड़े बिजनेसमैन धीरुभाई अंबानी के प्रेरणादायी जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में- गुजरात के जूनागढ़ के पास एक छोटे से गांव चोरवाड़ के एक साधारण शिक्षक के घर में धीरूबाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर, साल 1932 में हुआ था। उनकी माता जमनाबेन एक घरेलू महिला थी और उनके पिता गोर्धनभाई अंबानी एक साधारण टीचर थे, जिनके लिए अपने इतने बड़े परिवार का लालन-पालन करना काफी चुनौतीपूर्ण था। वहीं उनकी नौकरी से घर खर्च के लिए भी पैसे पूरे नहीं पड़ते थे। ऐसे में चार और भाई- बहनों के बीच धीरूभाई का शिक्षा ग्रहण करना काफी मुश्किल था। ऐसी स्थिति में धीरूभाई अंबानी को हाईस्कूल की अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और अपने घर की मालीय हालात को देखते हुए परिवार का गुजर-बसर करने के लिए अपने पिता के साथ भजिया इत्यादि बेचने जैसे छोटे-मोटे काम करने पड़े। धीरुभाई अंबानी ने गुजरात की कोकिलाबेन से शादी की थी, जिनसे उन्हें दो बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी पैदा हुए एवं दो बेटियां नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर पैदा हुए थे। धीरुभाई अंबानी ने अपने घर की आर्थिक हालत को देखते हुए सबसे पहले फल और नाश्ता बेचने का काम शुरु किया, लेकिन इसमें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने गांव के पास ही एक धार्मिक और पर्यटक स्थल में पकौड़े बेचने का काम शुरु कर दिया, लेकिन यह काम वहां आने-जाने वाले पर्यटकों पर पूरी तरह निर्भर था, जो कि साल में कुछ समय के लिए ही चलता था। बाद में धीरूभाई जी को अपना यह काम मजबूरन बंद करना पड़ा था। वहीं किसी भी काम में सफल नहीं होने के बाद अपने पिता की सलाह में उन्होंने फिर नौकरी ज्वॉइन कर ली। नौकरी करने के बाबजूद भी किया बिजनेस: तमाम असफलताएं मिलने के बाद धीरुभाई अंबानी ने अपने बड़े भाई रमणीक की मदत से यमन में नौकरी करने का फैसला लिया। उन्होंने शेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर अपनी पहली नौकरी की और करीब 2 साल तक नौकरी करने के बाद वे अपनी कार्यकुशलता और योग्यता के बल पर मैनेजर के पद पर पहुंच गए। हालांकि,नौकरी करने के दौरान भी वे हमेशा बिजनेस करने के अवसर तलाशते रहते थे। वे शुरुआत से ही बिजनेस करने का कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। शायद उनके इसी जुनून ने ही उन्हें दुनिया के सबसे सफल बिजनेसमैन की सूची में शामिल किया था। वहीं, धीरुभाई अंबानी के बिजनेस के प्रति उनका रुझान का अंदाजा उनके जीवन में घटित इस घटना से लगाया जा सकता है कि, जब वे शेल कंपनी के पेट्रोल पंप पर 300 रुपए प्रति माह के हिसाब से नौकरी करते थे। उस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को चाय महज 25 पैसे में मिलती थी, लेकिन धीरुभाई वो 25 पैसे की चाय न खरीदकर एक बड़े रेस्टोरेंट में 1 रुपए की चाय पीने जाते थे। वो ऐसा इसलिए करते थे, ताकि उस रेस्टोरेंट में आने वाले बड़े-बड़े व्यापारियों की बात सुन सकें, और बिजनेस की बारीकियों को समझ सकें। इस तरह धीरुभाई ने अपने बड़े बिजनेसमैन के सपने को पूरा करने के लिए अपने तरीके से बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा ग्रहण की और बाद में वे एक सफल बिजनेसमैन बनकर खरे उतरे। इसके अलावा धीरूभाई अंबानी के अंदर बड़े बिजनेसमैन बनने की योग्यता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि, उन्होंने यमन में प्रलचित चांदी के सिक्कों की गलाई लंदन की एक कंपनी में करनी यह जानकर शुरु कर दी कि, सिक्कों की चांदी का मूल्य सिक्कों के मूल्य से अधिक है। वहीं जब इस बात की खबर यमन सरकार को लगी, तब तक धीरूभाई अंबाई अच्छा खासा मुनाफा कमा चुके थे। धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन में तमाम संघर्षों को पार कर सफलता की असीम ऊंचाईयों को हासिल किया था। दरअसल, धीरुभाई जब यमन में नौकरी कर रहे थे। उसी दौरान यमन की आजादी के लिए आंदोलन की शुरुआत हो गई, हालात इतने बिगड़ गए कि यमन में रह रहे भारतीयों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। ऐसे में धीरूभाई अंबानी भी अपनी नौकरी छोड़ भारत वापस लौट आए। फिर बिजनेसमैन बनने का ख्वाब संजो रहे धीरूभाई ने बिजनेस करने का फैसला लिया। हांलाकि किसी भी बिजनेस को शुरु करने के लिए निवेश करने की जरूरत थी और धीरुभाई के पास बिजनेस शुरु करने के लिए रकम नहीं थी। जिसके बाद उन्होंने अपने चचेरे भाई त्रयम्बकलाल दामाणी के साथ पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात के व्यापार की शुरुआत की। अंबानी जी के औद्योगिक सफर की शुरुआत: क्या आप कभी सोच सकते हैं कि एक पकौड़ा बेचने वाला इंसान इतना बड़ा बिजनेसमैन बन सकता है। जी हां धीरूभाई अंबानी जी ने अपने कारोबार करियर की शुरुआत अपनी छुट्टियों के दिन गिरनार पर्वत पर आने वाले तीर्थयात्रियों को चाट-पकौड़े बेचकर की थी। आपको बता दें कि इससे पहले वे फल और नाश्ता बेचने का काम करते थे लेकिन उन्हें इस काम में कुछ खास मुनाफा नहीं दिखा था तो उन्होनें सोचा कि गिरनार पर्वत एक टूरिस्ट प्लेस है जहां पर चाट -पकौड़े बेचकर वे खासा मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन ये व्यापार पूरी तरह से पर्यटकों पर ही निर्भर था, जो कि साल के कुछ समय तो अच्छा चलता था बाकि समय में इसमें कोई खास फायदा नहीं होता था, जिसके चलते धीरूभाई ने इस व्यापार को बंद कर दिया। इन दोनों ही काम में कुछ खास सफलता नहीं मिलने के बाद उनके पिता नें उन्हें नौकरी करने की सलाह दी जिसके बाद वे नौकरी करने यमन चले गए, उस समय उनकी उम्र महज 16 साल थी। धीरूभाई अंबानी ने अपनी पहली जॉब ‘A. नीचे कमेंट करें और अपने विचार साझा करें! धीरूभाई अंबानी की कुंडली Ans – धीरूभाई अम्बानी की राशि मकर राशि हैं। इनकी कुंडली एक करामाती ग्रह राहु है। Please Note : – Dhirubhai Ambani Biography & Life History In Hindi मे दी गयी Information अच्छी लगी हो तो कृपया हमारा फ़ेसबुक (Facebook)पेज लाइक करे या कोई टिप्पणी (Comments) हो तो नीचे Comment Box मे करे। Dhirubhai Ambani Birth Anniversary: आज 28 दिसंबर है और आज भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में गिने जाने वाले धीरूभाई अंबानी का जन्मदिन है। यह सिर्फ एक उद्योगपति का जन्मदिन नहीं, बल्कि उस सोच के जश्न का दिन है, जिसने आजादी के बाद के भारत में पूंजी, बाजार और आम निवेशकों की परिभाषा बदल दी। दो कमरों के छोटे से घर में पले-बढ़े धीरूभाई ने बेहद कम उम्र में समझ लिया था कि गरीबी से बाहर निकलने के लिए बड़े सपने और साहस चाहिए। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें 16 साल की उम्र में घर छोड़कर विदेश गए, बाजार को समझा, मौके पहचाने और जोखिम उठाया। यही सफर आगे चलकर अरबों के साम्राज्य की नींव (Dhirubhai Ambani success story) बना। आज उनके जन्मदिन (Dhirubhai Ambani birthday today) पर जानिए कि कैसे धीरूभाई ने इतिहास रच दिया। 28 दिसंबर 1932 को गुजरात के सौराष्ट्र इलाके के चोरवाड़ गांव में जन्मे धीरूभाई का बचपन अभावों में बीता। पिता हीराचंद अंबानी स्कूल मास्टर थे- ईमानदार और सख्त अनुशासन वाले, लेकिन आमदनी बेहद सीमित। मिट्टी के फर्श वाला दो कमरों का घर, सीमित साधन और बड़ा परिवार यही धीरूभाई की शुरुआती दुनिया थी। धीरूभाई ने बहुत कम उम्र में समझ लिया था कि गरीबी सिर्फ सुविधा नहीं, आत्मसम्मान भी छीनती है। यही एहसास उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना। जूनागढ़ के बहादुर कंजी हाई स्कूल में पढ़ते हुए धीरूभाई आजादी के आंदोलन से जुड़े। वे जूनागढ़ विद्यार्थी संघ के सचिव बने। इसी दौर में उनकी वह खासियत दिखी जो आगे चलकर पहचान बनी- कानून की भाषा को समझकर रास्ता निकालना। एक कार्यक्रम में पुलिस ने राजनीतिक भाषण पर रोक लगाई। धीरूभाई ने लिखित में आश्वासन दे दिया, लेकिन भाषण खुद न देकर किसी और से करवा दिया। नियम नहीं टूटा, पर मकसद पूरा हो गया। यह छोटी घटना उनके भविष्य के बड़े फैसलों की झलक थी। यह भी पढ़ें- धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा के बीच है यह खास कनेक्शन, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं 1949 में मैट्रिक के बाद घर में हालात ऐसे थे कि आगे पढ़ाई संभव नहीं थी। धीरूभाई ने वही किया जो उस दौर में सौराष्ट्र के कई बनिया युवक करते थे- देश छोड़कर कमाने निकल पड़े। 16 साल की उम्र में वे यमन के अदन (Dhirubhai Ambani Aden Yemen) पहुंचे, जो तब ब्रिटिश कॉलोनी और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग हब था। यहां उन्हें A. Besse & Company में नौकरी मिली। अदन का बाजार सूक, उनके लिए असली यूनिवर्सिटी साबित हुआ। अदन में धीरूभाई ने देखा कि यमन की मुद्रा 'रियाल' चांदी से बनी है और उसकी चांदी की असली कीमत, सरकारी कीमत से ज्यादा है। उन्होंने बाजार से सिक्के खरीदे, पिघलवाए और चांदी बेच दी। तीन महीने में सरकार को भनक लगी और यह रास्ता बंद हो गया, लेकिन तब तक धीरूभाई लाखों रुपए कमा चुके थे। यह कोई जुआ नहीं था। यह जानकारी, समय और जोखिम की समझ थी। यहीं से उनकी सोच बनी- मुनाफा छोटा हो सकता है, लेकिन मौका कभी छोटा नहीं होता। अदन में धीरूभाई ने सिर्फ पैसा नहीं कमाया, बल्कि सिस्टम सीखा। अकाउंटिंग, सप्लाई चेन, अनुशासन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की भाषा सीखी। वे सादगी से रहते, कम खर्च करते और पूंजी जोड़ते रहे। यही वह दौर था जब उन्होंने धैर्य सीखा। जल्दी अमीर बनने की नहीं, लंबी दौड़ की सोच को बारीकी से समझा। कुछ साल बाद धीरूभाई भारत लौटे। उनके पास बड़ी पूंजी नहीं थी, लेकिन बाजार की गहरी समझ थी। उन्होंने सीधे फैक्ट्री नहीं लगाई, बल्कि ट्रेडिंग बिजनेस से शुरुआत की। मसाले और यार्न (धागे) का आयात-निर्यात किया। पूंजी कम थी, लेकिन अनुभव और जोखिम उठाने का हौसला काफी बड़ा था। उस दौर का भारत लाइसेंस-परमिट राज में जकड़ा था- हर फाइल एक 'जिंदा सांप' जैसी। धीरूभाई ने सिस्टम से लड़ने के बजाय उसे समझा, साधा और मोड़ा। वे अफसरशाही से टकराते नहीं थे- रिश्ते, भरोसे और धैर्य से रास्ता बनाते थे। धीरूभाई नियमों की भाषा को गहराई से सशब्द पढ़ते, ताकि उसी दायरे में रास्ता निकाला जा सके। ट्रेडिंग से मिले अनुभव और पूंजी ने उन्हें अगला कदम उठाने की ताकत दी। उन्होंने देखा कि भारत में कपड़े की भारी मांग है और भविष्य पॉलिएस्टर का है। यही सोच आगे चलकर उद्योग की ओर ले गई। भारत वापसी के बाद धीरूभाई की सबसे बड़ी ताकत यही रही- छोटे कदम, साफ रणनीति और बड़े सपनों की तैयारी। यही मॉडल बाद में एक विशाल कारोबारी साम्राज्य की नींव बना और खड़ी हो गई अरबों की कंपनी। जिसका नाम है- रिलायंस इंडस्ट्रीज। आज जिसकी मार्केट वैल्यू 21,09,983 करोड़ रुपए है। बता दें कि धीरूभाई अंबानी की निधन 6 जुलाई 2002 को हुआ था।धीरूभाई अंबानी का प्रारंभिक जीवन (Dhirubhai Ambani Early Life)
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
शिक्षा और शुरुआती रुचियां
यमन में पहला कदम (How Dhirubhai Ambani Started His Career)
भारत वापसी और रिलायंस की नींव (How Dhirubhai Ambani Started Reliance)
रिलायंस कमर्शियल कॉर्पोरेशन की स्थापना
मसाले और पोलिएस्टर यार्न का व्यापार
शुरुआती चुनौतियां (Challenges Faced by Dhirubhai Ambani)
रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थापना और विस्तार (Reliance Industries Success Story)
रिलायंस टेक्सटाइल्स और विमल ब्रांड की शुरुआत
शेयर बाजार में क्रांति (Reliance IPO History)
रिलायंस का बहुआयामी विस्तार
धीरूभाई अंबानी के सफलता के सिद्धांत (Dhirubhai Ambani Success Mantra)
चुनौतियां और विवाद (Dhirubhai Ambani Controversies)
निजी जीवन और परिवार (Dhirubhai Ambani Family)
धीरूभाई अंबानी की उपलब्धियां और सम्मान (Dhirubhai Ambani Awards)
धीरूभाई अंबानी की विरासत (Dhirubhai Ambani Legacy)
निष्कर्ष : धीरूभाई अंबानी की प्रेरणा (Dhirubhai Ambani Motivational Story)
धीरुभाई अंबानी का जीवन परिचय – Dhirubhai Ambani Biography in Hindi
एक नजर में –
पूरा नाम (Name) धीरजलाल हीरालाल अम्बानी जन्म (Birthday) 28 दिसम्बर 1932, चोरवाड़, गुजरात पिता (Father Name) श्री हीराचंद गोर्धन भाई अम्बानी माता (Mother Name) श्री मति जमनाबेन जी भाई (Brother) रमणिकलाल अंबानी, नटवरलाल बहन (Sister) त्रिलोचना बेन, जसुमतिबेन पत्नी (Wife) श्रीमती कोकिला बेन जी बच्चे (Children Name) मुकेश अम्बानी, अनिल अम्बानी, नीता कोठारी, दीप्ती सल्गोकार शैक्षणिक योग्यता (Education) मैट्रिक पास मृत्यु (Death) 06 जुलाई 2002, मुंबई, भारत पुरस्कार (Awards) साल 2016 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) जन्म, प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा –
विवाह एवं निजी जीवन –
बिजनेस में मिली असफलता के बाद ज्वॉइन की नौकरी –
जीवन के उतार-चढ़ाव –
धीरूभाई अंबानी के प्रसिद्ध अनमोल विचार – Dhirubhai Ambani Quotes in Hindi
और अधिक लेख –
Dhirubhai Ambani Birthday: दो कमरों का घर, गरीबी में पले-बढ़े, 16 साल की उम्र में घर छोड़ खड़ा किया अरबों का साम्राज्य
धीरूभाई को दो कमरों के घर में मिली सबसे बड़ी प्रेरणा
स्कूल से राजनीति तक: सिस्टम को समझने की पहली ट्रेनिंग
16 साल की उम्र में घर छोड़ा, देश छोड़ा और जब लौटे तो...
चांदी के सिक्कों से लाखों कमाने की पहली बड़ी कहानी (dhirubhai ambani yemen coins story)
जल्दी अमीर बनने की नहीं, लंबी दौड़ की सोच
भारत वापसी: 'जिदा सांप' पकड़ने का खेल
छोटे कदम, साफ रणनीति और बड़े सपनों की तैयारी
बेस्सी और कंपनी’ जब ‘शेल’ नामक कंपनी के उत्पादों के वितरक बन गए तब धीरुभाई को एडन बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिलिंग स्टेशन में प्रबंधक की नौकरी मिली।
वहीँ से धीरुभाई के मन में व्यवसाय की बारीकियां जानने को लेकर उत्सुकता पैदा हुई। उनका मन इसमें कम और व्यवसाय करने के मौको की तरफ ज्यादा रहा। उन्होंने उस हरेक संभावना पर इस समय में विचार किया कि किस तरह वे सफल बिजनेस मैन बन सकते हैं।
धीरूभाई अंबानी को बिज़नेस का बारीकी सिखने की इतनी ललक थी की जब वे शेल कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहां काम करने वाला कर्मियों को चाय महज 25 पैसे में मिलती थी, लेकिन धीरूभाई पास ही एक बड़े होटल में चाय पीने जाते थे, जहां चाय के लिए 1 रूपया चुकाना पड़ता था। उनसे जब इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उसे बड़े होटल में बड़े-बड़े व्यापारी आते हैं और बिजनेस के बारे में बाते करते हैं। उन्हें ही सुनने जाता हूं ताकि व्यापार की बारीकियों को समझ सकूं। इस बात से पता चलता हैं की धीरूभाई अंबानी को बिज़नेस का कितना जूनून था।
धीरूभाई अंबानी ने सोच लिया था की उन्हें अपना कारोबार शुरू करना हैं इसलिए हमेशा पैसो का इन्तिजाम में लगे रहते थे। उन दिनों में यमन मे चांदी के सिक्कों का प्रचलन था। धीरूभाई को एहसास हुआ कि इन सिक्कों की चांदी का मूल्य सिक्कों के मूल्य से ज्यादा है और उन्होंने लंदन की एक कंपनी को इन सिक्कों को गलाकर आपूर्ति करनी शुरू कर दी। यमन की सरकार को जब तक इस बात का पता चलता वे मोटा मुनाफा कमा चुके थे। और इस तरह उन्होंने शुरुवाती पैसो का इन्तिजाम किया।
कुछ समय बाद यमन में आजादी के लिए आन्दोलन शुरू हो गए, इस कारण वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यवसाय के सारे दरवाज़े बंद कर दिए। इसके बाद लगभग 1950 के दशक के शुरुआती सालों में धीरुभाई अंबानी यमन से भारत लौट आये और अपने चचेरे भाई चम्पकलाल दमानी (जिनके साथ वो यमन में रहते थे) के साथ मिलकर पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात-निर्यात का व्यापार प्रारंभ किया। रिलायंस कमर्शियल कारपोरेशन की शुरुआत मस्जिद बन्दर के नरसिम्हा स्ट्रीट पर एक छोटे से कार्यालय के साथ हुई। यही से जन्म हुआ रिलायंस कंपनी का और अंबानी परिवार का इतिहास। इस व्यापार के पीछे धीरुभाई का लक्ष्य मुनाफे पर ज्यादा ध्यान न देते हुए ज्यादा से ज्यादा उत्पादों का निर्माण और उनकी गुणवत्ता पर था। इस दौरान अम्बानी और उनका परिवार मुंबई के भुलेस्वर स्थित ‘जय हिन्द एस्टेट’ में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहता था।
वर्ष 1965 में धीरुभाई अम्बानी और चम्पकलाल दमानी की व्यावसायिक साझेदारी समाप्त हो गयी। दोनों के स्वभाव और व्यापार करने के तरीके बिलकुल अलग थे इसलिए ये साझेदारी ज्यादा लम्बी नहीं चल पायी। एक ओर जहाँ पर दमानी एक सतर्क व्यापारी थे, वहीं धीरुभाई को जोखिम उठानेवाला माना जाता था।
इसके बाद धीरुभाई ने सूत के व्यापार में हाथ डाला जिसमे पहले के व्यापर की तुलना में ज्यादा हानि की आशंका थी। पर वे धुन के पक्के थे उन्होंने इस व्यापार को एक छोटे स्टार पर शुरू किया और जल्द ही अपनी काबिलियत के बल बूते धीरुभाई बॉम्बे सूत व्यापारी संगठन के संचालक बन गए।
अब तक धीरुभाई को वस्त्र व्यवसाय की अच्छी समझ हो गयी थी। इस व्यवसाय में अच्छे अवसर की समझ होने के कारण उन्होंने वर्ष 1966 में अहमदाबाद के नैरोड़ा में एक कपड़ा मिल स्थापित किया। यहाँ वस्त्र निर्माण में पोलियस्टर के धागों का इस्तेमाल हुआ और धीरुभाई ने ‘विमल’ ब्रांड की शुरुआत की जो की उनके बड़े भाई रमणिकलाल अंबानी के बेटे, विमल अंबानी के नाम पर रखा गया था। उन्होंने “विमल” ब्रांड का प्रचार-प्रसार इतने बड़े पैमाने पर किया कि यह ब्रांड भारत के अंदरूनी इलाकों में भी एक घरेलु नाम बन गया।
‘रिलायन्स’ के इस मील ने पहले साल में ही 9 करोड़ का कारोबार करके 13 लाख का मुनाफा कमाया। 1977 को ‘रिलायन्स’ ने खुद के लिये पहली बार बाजार में शेअर बेच कर पैसा खड़ा किया किया। 1975 को जब ‘रिलायन्स’ एक छोटी कंपनी थी, उस समय में भी भारत में के 24 कपडा मील की जाँच करने के लिये आये हुये विश्व बॅक के एक टिम ने ऐसा कहा था की विकसीत देशो में की मीलों से तुलना करने लायक भारत में एकमेव मील ये रिलायन्स ही है।
1980 के दशक में धीरूभाई ने पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न निर्माण का सरकार से लाइसेंस लेने सफलता हासिल की। इसके बाद धीरूभाई सफलता का सीडी चढ़ाते गए। धीरुभाई को इक्विटी कल्ट को भारत में प्रारम्भ करने का श्रेय भी जाता है। जब 1977 में रिलायंस ने आईपीओ (IPO) जारी किया तब 58,000 से ज्यादा निवेशकों ने उसमें निवेश किया। धीरुभाई गुजरात और दूसरे राज्यों के ग्रामीण लोगों को आश्वस्त करने में सफल रहे कि जो उनके कंपनी के शेयर खरीदेगा उसे अपने निवेश पर केवल लाभ ही मिलेगा।
अपने जीवनकाल में ही धीरुभाई ने रिलायंस के कारोबार का विस्तार विभिन क्षेत्रों में किया। इसमें मुख्य रूप से पेट्रोरसायन, दूरसंचार, सूचना प्रोद्योगिकी, उर्जा, बिजली, फुटकर (retail), कपड़ा/टेक्सटाइल, मूलभूत सुविधाओं की सेवा, पूंजी बाज़ार और प्रचालन-तंत्र शामिल हैं। धीरुभाई की कैरियर 1970 व 80 के नियंत्रित अर्थव्यवस्था में बड़ी, उनके दोनों पुत्र 1991 के बाद मुक्त अर्थव्यवस्था के कारण निर्माण हुये नये मौको का पूरा उपयोग करके ‘रिलायन्स’ की पीढ़ी सफल तरिके से आगे चला रहे है।
धीरुभाई अंबानी ने जो कंपनी कुछ पैसे के लगत पर खड़ी की थी उस रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2012 तक 85000 कर्मचारी हो गये थे और सेंट्रल गवर्नमेंट के पुरे टैक्स में से 5% रिलायंस देती थी। और 2012 में संपत्ति के हिसाब से विश्व की 500 सबसे अमीर और विशाल कंपनियों में रिलायंस को भी शामिल किया गया था। धीरुभाई अंबानी को सन्डे टाइम्स में एशिया के टॉप 50 व्यापारियों की सूचि में भी शामिल किया गया था। अंबानी ने 1977 में रिलायंस कंपनी को लाया और 2007 तक उनकी संपत्ति 60 बिलियन $ थी, जिसने अंबानी को विश्व का तीसरा सबसे अमीर परिवार बनाया।
हालाँकि इस बिच धीरूभाई अंबानी पर सरकार की नीतियों को प्रभावित करने और नीतियों की कमियों से लाभ कमाने के आरोप भी लगते रहे। नपर यह आरोप लगा कि उन्होंने सरकारी नीतियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुकूल चालाकी से बदलवाया और अपने प्रतिद्वंदियों को भी सरकारी नीतियों के सहारे पठखनी दी।
निजी जीवन – Dhirubhai Ambani Personal Life
धीरूभाई अंबानी का विवाह कोकिलाबेन के साथ हुआ था और उनको दो बेटे थे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी और दो बेटियाँ नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर।
निधन – Dhirubhai Ambani Death
दिल का दौरा पड़ने के बाद धीरुभाई को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 24 जून, 2002 को भर्ती कराया गया। इससे पहले भी उन्हें दिल का दौरा एक बार 1986 में पड़ चुका था, जिससे उनके दायें हाँथ में लकवा मार गया था। 6 जुलाई 2002 को धीरुभाई अम्बानी ने अपनी अन्तिम सांसें लीं।
पुरूस्कार और सम्मान – Dhirubhai Ambani Awards
- एशियन बिज़नस लीडरशिप फोरम अवार्ड्स 2011 में मरणोपरांत ‘एबीएलएफ ग्लोबल एशियन अवार्ड’ से सम्मानित।
- भारत में केमिकल उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘केमटेक फाउंडेशन एंड कैमिकल इंजीनियरिंग वर्ल्ड’ द्वारा ‘मैन ऑफ़ द सेंचुरी’ सम्मान, 2000।
- एशियावीक पत्रिका द्वारा वर्ष 1996, 1998 और 2000 में ‘पॉवर 50 – मोस्ट पावरफुल पीपल इन एशिया’ की सूची में शामिल।
- 1999 में बिजनेस इंडिया-बिजनेस मैन आॅफ द ईयर
- वर्ष 1998 में पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय द्वारा अप्रतीम तेत्रित्व के लिए ‘डीन मैडल’ प्रदान किया गया।
- वर्ष 2001 में ‘इकनोमिक टाइम्स अवार्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस’ के अंतर्गत ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड।
- फेडरेशन ऑफ़ इंडियन चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा ‘मैन ऑफ 20th सेंचुरी’ घोषित।
FAQ
Q.
धीरूभाई अंबानी के कितने बच्चे हैं?
Ans – 4 जिसमे दो बेटे मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी और दो बेटियाँ नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर.
Q.