Tenali ramakrishna autobiography in hindi
Home / Historical Figures / Tenali ramakrishna autobiography in hindi
उन्होंने अपने जीवन काल में कई तरह की कविताएं लिखी हैं और वो अपने बुद्धि और हास्य के लिए काफी जाने जाते थे. ये तीनों गुड़िया दिखने में एक जैसी थी. लेकिन बाद में उन्होंने वैष्णव धर्म को अपना लिया और भगवान विष्णु की भक्ति करने लगे. वहीं इस वक्त भी सब टीवी पर उनके जीवन पर आधारित एक कार्यक्रम आता है. तेनाली रामा को आवाज सुनकर शक हो गया कि कुछ चोर उनके घर चोरी करने आए हैं.
इतना ही नहीं उनकी समझ के कारण बड़ी सी बड़ी परेशानी को हल किया जाता था.
तेनाली रामा से जुड़ी कुछ रोचक बातें- (Tenali Rama facts)
- कहा जाता है कि तेनाली रामा भगवान शिव के भक्त हुआ करते थे. इसलिए वो गुड़िया अच्छी है. उनकी मां के गांव का नाम ‘तेनाली’ था.
पूरा नाम तेनाली रामाकृष्ण जन्म तिथि 16वीं शताब्दी उपनाम “विकट कवि” जन्म स्थान गुंटूर जिले, आंध्रप्रदेश पत्नी का नाम जानकारी नहीं पेशा कवि तेनाली रामा की शिक्षा (Tenali Rama Education)
आप लोगों को ये जानकर हैरानी होगी, कि इतने महान कवि ने किसी भी तरह की शिक्षा प्राप्त नहीं की थी.
तेलानी ने कहा कि उसकी बिल्ली को दूध पीना पंसद नहीं है. तेनाली ने उनसे वादा किया कि वो किसी को भी कुछ नहीं बताएंगे. जिसके बाद राजा ने उन्हें अपने दरबार में एक कवि का कार्य सौपा था. और तेलानी को राजा द्वारा कोई दंड नहीं दिया और गाय का सारा दूध तेलानी को मिलने लगा.
ऊपर बताई गई कहानी से साफ पता चलता है कि तेनाली अपनी समझ से किस तरह हर बार लोगों को हैरान कर देते थे.
ताकि चूहों को बिल्ली खा लें और परेशानी का समाधान निकल जाए. फिर तेनाली रामा ने सबके सामने एक गुड़िया के कान में एक तार डाली और वो तार गुड़िया के मुंह से निकल आई. तेनाली रामा की ये तरकीब काम कर गई और बिल्ली जब भी दूध पीने जाती तो गर्म दूध देख वो दूध को पी नहीं पाती थी. लेकिन उनको चोरी छोड़नी पड़ेगी, जिसके बाद इन चोरों ने मेहनत करके पैसे कमाने शुरू कर दिए.
तेनाली और बिल्ली की कहानी (The Story Of Tenali Rama And The Cat that hat milk)
एक बार राज्य में चूहों ने लोगों को काफी परेशान कर दिया था.
वहीं माना जाता है कि तेनाली जी ने वैष्णव धर्म अपना लिया था. उस व्यापारी को भी समझ आ गया, कि उसने जो राजा के मंत्री की बुद्धिमानी के बारे में सुना था वो एकदम सही था.
चोरों को पकड़ने की कहानी (Tenali Raman And Two Thieves stories)
एक बार तेनाली रामा अपनी पत्नी के साथ रात को अपने घर में सो रहे थे.
इसलिए वो रोज बिल्ली के लिए गर्म दूध रखते थे ताकि बिल्ली उस दूध को पी ना सकें. रंगा ने किया था। इस फिल्म में अनंत नाग ने कवि रामकृष्ण जी का किरदार निभाया था, इसके अलावा आरती भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थी। इसके अलावा उनके जीवन पर आधारित सब टीवी चैनल पर ”तेनालीरामा” नाम का धारावाहिक भी टेलीकास्ट किया गया था।
वहीं 1990 में दूरदर्शन पर भी टी.एस.
जिसके चलते रामा अपने जीवन में कभी भी शिक्षा हासिल नहीं की.
FAQ
Ans- तेनाली रामा चार वेद पारंगत तत्वेत्ता, राज सलाहगार थे।
Ans- तेनाली रामा का जन्म 22 सितंबर 1480 को गुंटूर में हुआ।
Ans- तेनाली रामा की दो पत्नियां थी।
Ans- तेनाली रामा चतुर, ईमानदार और बुद्धिमान व्यक्ति थे।
Ans- तेनाली रामा ने देवी काली को प्रसन्न किया।
अन्य पढ़े:
Tenali Rama in Hindi
तेनाली रामकृष्ण, यानि तेनाली रामा एक महान कहानीकार और प्रख्यात तेलुगू कवि थे। उनके द्धारा लिखी गईं कहानियां बच्चों द्धारा खूब पसंद की जाती हैं। यही नहीं तेनाली रामा की कहानियों का स्कूल की किताबों में भी जिक्र किया जाता है। उन्हें ”विकट कवि” के रुप में भी जाना जाता है।
उनकी ख्याति एक महान कवि के रुप में ही नहीं, बल्कि वे अपने चतुर बुद्धि और हास्य के लिए भी मशहूर थे। उन्होंने हिंदुत्व पर भी काफी शानदार ढंग से रचनाएं की हैं। वे विजयनगर राज्य के सम्राट कृष्णदेवराय के दरबार के अष्टदिग्गज उर्फ आठ कवियों में से एक थे।
उनकी और विजयनगर के सम्राट कृष्णदेवराय की जोड़ी काफी प्रसिद्ध थी, उनकी जोड़ी को भी अकबर और बीरबल की जोड़ी कहा जाता था। यही नहीं तेनाली रामा के महान जीवन से प्रेरित होकर उन पर कई फिल्में और नाटक भी बनाए गए हैं। आइए जानते हैं तेनाली रामा और उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में विस्तार से-
तेनाली रामा की जीवन कहानी – Tenali Rama
तेनाली रामा के बारे में एक नजर में – Tenali Rama Information
| पूरा नाम (Name) | तेनाली रामाकृष्ण |
| जन्म (Birthday) | 16वीं सदी, गुंटूर जिले, आंध्रप्रदेश |
| पिता (Father Name) | गरलापति रमय्या |
| माता (Mother Name) | लक्ष्मम्मा |
| शिक्षा (Education) | अशिक्षित |
तेनाली रामा का जन्म, प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा – Tenali Rama Biography
तेनाली रामा 16वीं सदी में आंध्रप्रदेश के एक छोटे से गांव में रहने वाले ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे गरलापति रमय्या और मां लक्ष्मम्मा के बेटे रामलिंग के रुप में जन्में थे। उनके पिता गरलापति रमय्या थे रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर के प्रतिष्ठित पंडित थे।
जबकि, उनकी मां एक घरेलू महिला थीं। जब वे बहुत कम आयु के थे, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मां ने उनकी नाना-नानी के घर ”तेनाली गांव” में किया था।
तेनाली रामा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वे बपचन में शिव के काफी बड़े भक्त थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपना धर्म बदलकर वैष्णव धर्म अपना लिया था फिर भगवान विष्णु की भक्ति में तल्लीन रहने लगे थे और अपना नाम रामकृष्ण रख लिया था।
तेनाली रामा की शिक्षा – Tenali Rama Education
वहीं प्रख्यात कवि तेनाली रामा की अगर शिक्षा की बात करें तो उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं की। अनपढ़ और अशिक्षित होने के बाबजूद भी उन्हें तमिल, कन्नड़, मराठी, समेत कई भाषाओं की अच्छी जानकारी थी।
दरअसल, तेनाली रामा जी को शुरु से ही ज्ञान पाने की भूख थी इसलिए अशिक्षित होने के बाबजूद भी वे एक महान ज्ञानी और विद्धान बने। युवावस्था में रामकृष्ण जी की मुलाकात एक साधू बाबा से हुई। उन्होंने रामकृष्ण को देवी काली उपासना करने की सलाह दी, लेकिन बाद में तेनाली रामा जी विजयनगर की ”भगवत मेला” की मशहूर मंडली में शामिल हो गए और इस मंडली का हिस्सा बनकर उन्होंने कई तरह के कार्यक्रम कर न सिर्फ वहां की जनता के दिलों में जगह बनाई।
बल्कि अपने प्रदर्शन से विजयनगर के सम्राट कृष्णदेवराय को भी प्रभावित किया, जिसके बाद कृष्णदेवराय जी ने उन्हें अपने दरबार में हास्य कवि के रुप में रख लिया और फिर बाद में वे उनके दरबार के अष्टदिग्गज कवि में शामिल हो गए।
तेनाली और राजा कृष्णदेवराय की मशहूर जोड़ी – Tenali Rama And Krishnadevaraya Story
महान कवि तेनाली रामा जी बाद में विजयनगर राज्य सम्राट कृष्णदेवराय जी के सबसे करीबी के तौर पर पहचाने जाने लगे। राजा कृष्णदेवराय जी और तेनाली रामा की जोड़ी को सम्राट अकबर और बीरबल की जोड़ी के रुप में देखा जाने लगा।
राज कृष्णदेवराय जी के अष्टदिग्गज कवियों में से एक तेनाली जी कई बार अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से विजयनगर के सम्राट को कठिन परिस्थितियों से उबारने में उनकी मद्द की थी एवं बाद में अपनी चतुराई से विजयनगर राज्य को दिल्ली सल्तनत से बचाया था।
तेनाली रामकृष्ण के साहित्यिक कार्य – Tenali Rama Books
तेनाली रामा अपनी चतुराई, बुद्धिमत्ता और प्रतिभा के लिए प्रख्यात थे। उन्होंने अपनी साहित्यिक प्रतिभा के बल पर अपनी छवि एक प्रख्यात कवि के रुप में बनाई थी। प्रमुख रुप से उन्होंने तेलुगू साहित्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके द्धारा रचित ”पांडुरंग महात्मयं” को तेलुगू साहित्य के पंच महाकाव्यों में शामिल किया गया है।
उन्होंने अपनी इस रचना को स्कंदपुराण से प्रभावित होकर लिखा था। इसके अलावा ‘चतुवु’ नामक नाम से तेनाली रामा जी ने उपन्यास और कविताओं की रचनाओं की है। वहीं तेनाली रामकृष्ण जी को जब विजयनगर के सम्राट कृष्णदेवराय जी ने अपना दरबार के आठ कवियों में स्थान दिया था, उसी समय से तेनाली रामा जी की प्रसिद्धि और अधिक बढ़ गई थी। यही नहीं उनकी ख्याति एक लोकनायक के रुप में भी फैली हुई थी।
इसके अलावा तेनाली रामा जी ने धर्म पर भी कुछ रचनाएं की हैं। वहीं उनके द्धारा रचित कविताओं में उद्भटाराध्य चरितामु आज भी काफी लोकप्रिय है। उनकी यह कविता पालाकुरिकी सोमनाथ की बसवा पुराण पर आधारित है। जबकि रामलिंग और रायलू उनके जीवन की सबसे अधिक प्रख्यात कहानियां हैं।
वहीं तेनाली रामा जी के महान कामों की वजह से उन्हें कुमार भारती जी की उपाधि दी गई थी। यही नहीं उनके सम्मान में संस्कृत कविता महिषासुरमर्दिनी स्त्रोतम की भी रचना की गई है।
तेनाली रामा पर बने नाटक और फिल्में – Tenali Rama Serial
तेनाली रामा जी एक ऐसे कवि थे, जिनके प्रभावशाली जीवन से प्रभावित होकर कई फिल्में और नाटक बनाए गए हैं। आपको बता दें कि उनके जीवन पर लिखा गया नाटक ” द एडवेंचर ऑफ तेनाली रामा”काफी प्रसिद्ध है। साल 2003 में कार्टून नेटवर्क ” द एडवेंचर ऑफ तेनाली रामण” नाम की एक एनिमेटेड सीरीज भी शुरु की गई थी।
यही नहीं तेनाली रामा जी के जीवन पर एक कन्नड़ फिल्म ”हस्यरतना रामकृष्ण”, साल 1982 में बनाई गई थी, जिसका निर्देशन बी.एस.
तेनाली ने राजा कृष्णदेवराय के दरबार में एक कवि के रूप में काम करना शुरू किया था. जिसके बाद वहां तेनाली आए और उन्होंने चोरों का धन्यवाद करते हुए कहा कि, शुक्रिया आप लोगों ने मेरे बाग में फूलों को पानी दिया और कुएं को साफ कर दिए.