Ravi shankar biography in hindi language

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90 साल की उम्र में भी उनमें संगीत का जुनून जरा भी कम नहीं हुआ था. विश्व संगीत एल्बम पुरस्कार:-  उनका एल्बम, "फुल सर्कल: कार्नेगी हॉल 2000", 2002 में और ‘द लिविंग रूम सेशंस’ 2013 में सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम पुरस्कार जीता।

10.

कला अकादमी पुरस्कार:- भारत के संगीत, नृत्य और नाटक के राष्ट्रीय अकादमी ने उन्हें 1962 में नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।

3.पद्म पुरस्कार:- 1967 में रविशंकर को भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण मिला।

4.

रवि शंकर का पूरा नाम पंडित रवि शंकर है. उन्होंने 10 साल की उम्र से इस नृत्य मंडली के साथ अमरीका और यूरोप के कई दौरे किए और एक नर्तक के रूप में कई यादगार प्रदर्शन दिए. भीम राव अम्बेडकर की जीवनी, डॉ. रविशंकर 8 साल की उम्र तक अपने पिता से नहीं मिले थे और फिर वे अपने बड़े भाई के साथ रहने लगे. उनके पिता श्याम शंकर चौधरी शुरुआत में अंग्रेजों के अधीन एक स्थानीय बैरिस्टर के रूप में सेवा करते थे, उसके बाद वे एक वकील के तौर पर लंदन में काम करने चले गए.

उन्होंने 12 मई 1986 से 11 मई 1992 तक भारतीय संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्य किया.

पंडित रवि शंकर की मृत्यु, Pandit Ravi Shankar Death
रविशंकर का 11 दिसंबर, 2012 को सैन डिएगो, कैलिफोर्निया में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनकी बेटी अनुष्का शंकर एक सितार वादक के साथ-साथ संगीतकार भी हैं. इसके अलावा, इस अवधि के दौरान, उन्होंने अमेरिकी मूल के वायलिन वादक येहुदी मेनुहिन के साथ भी संगीत का प्रदर्शन और लेखन शुरू किया.

रवि शंकर

शिक्षा

इनकी आरंभिक संगीत शिक्षा घर पर ही हुई। उस समय के प्रसिद्ध संगीतकार और गुरु उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां को इन्होंने अपना गुरु बनाया। यहीं से आपकी संगीत यात्रा विधिवत आरंभ हुई। अलाउद्दीन ख़ां जैसे अनुभवी गुरु की आँखों ने आप के भीतर छिपे संगीत प्रेम को पहचान लिया था। उन्होंने आपको विधिवत अपना शिष्य बनाया। वह लंबे समय तक तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा ख़ाँ, किशन महाराज और सरोद वादक उस्ताद अली अकबर ख़ान के साथ जुड़े रहे। अठारह वर्ष की उम्र में उन्होंने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू किया।

परम्परागत भारतीय शैली

रविशंकर संगीत की परम्परागत भारतीय शैली के अनुयायी थे। उनकी अंगुलियाँ जब भी सितार पर गतिशील होती थी, सारा वातावरण झंकृत हो उठता था। अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय संगीत को ससम्मान प्रतिष्ठित करने में उनका उल्लेखनीय योगदान है। उन्होंने कई नई-पुरानी संगीत रचनाओं को भी अपनी विशिष्ट शैली से सशक्त अभिव्यक्ति पदान की।

प्रथम प्रस्तुति

  • पंडित रविशंकर ने पहला कार्यक्रम 10 साल की उम्र में दिया था।
  • भारत में पंडित रविशंकर ने पहला कार्यक्रम 1939 में दिया था।
  • देश के बाहर पहला कार्यक्रम उन्होंने 1954 में तत्कालीन सोवियत संघ में दिया था और यूरोप में पहला कार्यक्रम 1956 में दिया था।
  • 1944 में औपचारिक शिक्षा समाप्त करने के बाद वह मुंबई चले गए और उन्होंने फ़िल्मों के लिए संगीत दिया।
  • 1960 के दशक के मध्य में उन्होंने तीन यादगार प्रस्तुतियां मॉनटेरी पॉप फेस्टिवल, कंसर्ट फॉर बांग्लादेश, वुडस्टॉक फेस्टिवल दीं।

संगीत निर्देशन

रवि शंकर ने भारत, कनाडा, यूरोप तथा अमेरिका में बैले तथा फ़िल्मों के लिए भी संगीत कम्पोज किया। इन फ़िल्मों में 'चार्ली', 'गांधी' और 'अपू त्रिलोगी' भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आपने अनेक फ़िल्मों में भी अपने संगीत का जादू जगाया है।

  • सत्यजीत राय की बंगाली फ़िल्म 'अपू त्रिलोगी' एक बहुचर्चित फ़िल्म थी।
  • हिन्दी फ़िल्म अनुराधा में भी आपने ही संगीत दिया।
  • पंडित रविशंकर ने अपने लंबे संगीत जीवन में कई फ़िल्मों के लिए भी संगीत निर्देशन किया जिसमें प्रख्यात फ़िल्मकार सत्यजीत राय की फ़िल्में और गुलज़ार द्वारा निर्देशित "मीरा" भी शामिल है।
  • रिचर्ड एटिनबरा की फ़िल्म 'गांधी' में भी आपका ही सुरीला संगीत था।
  • आपने कई पाश्चात्य फ़िल्मों में भी संगीत दिया।

सहृदय रवि शंकर

रवि शंकर ने वर्ष 1971 में 'बांग्लादेश मुक्ति संग्राम' के समय वहां से भारत आ गए लाखों शरणार्थियों की मदद के लिए कार्यक्रम करके धन एकत्र किया था। हिन्दुस्तानी संगीत को रविशंकर ने रागों के मामले में भी बड़ा समृद्ध बनाया है। यों तो उन्होंने परमेश्वरी, कामेश्वरी, गंगेश्वरी, जोगेश्वरी, वैरागी तोड़ी, कौशिकतोड़ी, मोहनकौंस, रसिया, मनमंजरी, पंचम आदि अनेक नये राग बनाए हैं, पर वैरागी और नटभैरव रागों का उनका सृजन सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ। शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जब रेडियो पर कोई न कोई कलाकार इनके बनाए इन दो रागों का न गाता-बजाता हो।

जुगलबन्दी

प्रारम्भ में पंडित जी ने अमेरिका के प्रसिद्ध वायलिन वादक येहुदी मेन्युहिन के साथ जुगलबन्दियों में भी विश्व-भर का दौरा किया। तबला के महान् उस्ताद अल्ला रक्खा भी पंडित जी के साथ जुगलबन्दी कर चुके हैं। वास्तव में इस प्रकार की जुगलबन्दियों में ही उन्होंने भारतीय वाद्य संगीत को एक नया आयाम दिया। पंडित जी ने अपनी लम्बी संगीत-यात्रा में अपने और अपने सम्बन्ध में कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं। ‘माई म्यूजिक माई लाइफ’ के अतिरिक्त उनकी ‘रागमाला’ नामक पुस्तक विदेश के एक सुप्रसिद्ध प्रकाशक ने प्रकाशित की है।

सम्मान और पुरस्कार

  • पंडित रवि शंकर को विभिन्न विश्वविद्यालयों से डाक्टरेट की 14 मानद उपाधियां मिल चुकी हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्गत संगीतज्ञों की एक संस्था के सदस्य रहे।
  • रवि शंकर को तीन ग्रेमी पुरस्कार मिले हैं।
  • रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण तथा भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्‍न भी मिल चुका है।
  • रवि शंकर को भारतीय संगीत ख़ासकर सितार वादन को पश्चिमी दुनिया के देशों तक पहुंचाने का श्रेय भी दिया जाता है।
  • 1968 में उनकी 'यहूदी मेनुहिन' के साथ उनकी एल्बम 'ईस्ट मीट्स वेस्ट' को पहला ग्रैमी पुरस्कार मिला था। फिर 1972 में 'जॉर्ज हैरिसन' के साथ उनके 'कॉनसर्ट फॉर बांग्लादेश' को ग्रैमी दिया गया। संगीत जगत् का ऑस्कर माने जाने वाले ग्रैमी पुरस्कार की विश्व संगीत श्रेणी में पंडित रविशंकर के साथ स्पर्धा में ब्रिटेन के प्रख्यात संगीतकार जॉन मेक्लॉलिन और ब्राज़ील के गिलबर्टो गिल और मिल्टन नेसिमेल्टो भी शामिल थे।

राज्यसभा मानद सदस्य

1986 में राज्यसभा के मानद सदस्य चुनकर भी उन्हें सम्मानित किया गया। 1986 से 1992 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। सितार वादक पंडित रविशंकर भारत के उन गिने चुने संगीतज्ञों में से थे जो पश्चिम में भी लोकप्रिय रहे। रवि शंकर अनेक दशकों से अपनी प्रतिभा दर्शाते रहे। 1982 के दिल्ली एशियाड (एशियाई खेल समारोह) के 'स्वागत गीत' को उन्होंने कई स्वर प्रदान किये थे। उनको देश-विदेश में कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

निधन

पंडित रविशंकर का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अमेरिका में सैन डिएगो के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। पंडित रविशंकर को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद ला जोल्ला के स्किप्स मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने स्थानीय समयानुसार मंगलवार11 दिसम्बर, 2012 को शाम 4.30 बजे अंतिम सांस ली। मशहूर सितार वादक पंडित रविशंकर के अमेरिका के एक अस्पताल में निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि वह राष्ट्रीय सम्पदा थे। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से लिखे संदेश में कहा गया है, 'पंडित रविशंकर के निधन से एक युग का अंत हो गया है, मेरे साथ-साथ पूरा देश उनकी प्रतिभा, कला तथा विन्रमता को श्रद्धांजलि देता है।'

बाहरी कड़ियाँ

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पंडित रविशंकर एक भारतीय संगीतकार और कंपोजर थे, जिन्हें पूरी दुनिया में भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्र सितार को लोकप्रिय बनाने के लिए जाना जाता है.

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बेस्ट चैंबर म्यूजिक परफॉर्मेंस:- येहुदी मीनुहिन के साथ उनके एल्बम ने 1967 में बेस्ट चैंबर म्यूजिक परफॉर्मेंस के लिए ग्रैमी जीता।

8.

उन्होंने 10 साल की उम्र से इस नृत्य मंडली के साथ अमरीका और यूरोप के कई दौरे किए और एक नर्तक के रूप में कई यादगार प्रदर्शन दिए.

बिंदु(Points)जानकारी (Information)
नाम (Name)पंडित रविशंकर
जन्म (Birth)7 अप्रैल, 1920
मृत्यु (Death)11 दिसंबर, 2012
पेशा (Profession)संगीतकार
पत्नी का नाम (Wife Name)सुकन्या राजन
पिता का नाम (Father Name)श्याम शंकर चौधरी
माता का नाम (Mother Name)ज्ञात नहीं
मूल निवास स्थान (Home Town)बनारस, उत्तरप्रदेश
वर्तमान स्थान (Current City)—-
शिक्षा (Education)
उम्र (Age)92 वर्ष
मृत्यु स्थान (Death Place)
भाई-बहन(Siblings)उदय शंकर
धर्म (Religion)हिन्दू
अवॉर्ड (Award)पद्म भूषण

रवि शंकर को अपने जीवन में सितार से काफी सालो बाद परिचित हुए थे, जब वह 18 वर्ष के थे.

पद्मश्री:- 1999 में, इस महान सितार वादक को देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारतरत्न मिला।

6. वहाँ शंकर ने 1946 तक बैले के लिए संगीत की रचना की, उसके बाद 1950 में, रविशंकर को नई दिल्ली रेडियो स्टेशन ऑल-इंडिया रेडियो (AIR) के निर्देशक बनने का मौका मिला, और इस पद को उन्होंने 1956 तक संभाला.

वर्ष 1953 में, उन्होंने सोवियत संघ में प्रदर्शन किया उसके बाद 1956 में, उन्हें प्रदर्शन के लिए पश्चिम में जाना पड़ा. इस दंपत्ति की एक बेटी है जिसका नाम अनुष्का शंकर है.

वर्ष 1992 में, रविशंकर के बेटे शुभेंद्र शंकर की निमोनिया से मृत्यु हो गई. कॉन्सर्ट फॉर बांग्लादेश:- 1973 में, "कॉन्सर्ट फॉर बांग्लादेश" के लिए एल्बम ऑफ द ईयर पुरस्कार जीता।

9.

    1953 में उन्होंने सोवियत संघ में प्रदर्शन किया, फिर 1956 में पश्चिम में जाना पड़ा। पश्चिमी एडिनबर्ग फेस्टिवल और रॉयल फेस्टिवल हॉल में उन्होंने उत्कृष्ट संगीत प्रस्तुत किया, जिससे भारत के बाहर भी प्रशंसा हुई और वह दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया।

  

पंडित रविशंकर का राजनीतिक जीवन:-

    1986 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें भारतीय संगीत में उनके महान योगदान के लिए राज्यसभा के लिए नामित किया। 12 मई 1986 से 11 मई 1992 तक वह भारतीय संसद के उच्च सदन का सदस्य रहे।

जॉर्ज हैरिसन के साथ संघ:-

    जून

पंडित रविशंकर की व्यक्तिगत जीवनी:-

1. 1941 में अन्नपूर्णा देवी नाम की एक महिला से रविशंकर ने शादी की। रविशंकर की शादी के एक वर्ष बाद उनका पहला बच्चा शुभेंद्र शंकर हुआ।

2. 1940 के दशक से, रविशंकर का कमला शास्त्री नामक एक नर्तकी से प्रेम था, जो उनकी शादी के लिए खतरनाक साबित हुआ।

3.

बाद में हैरिसन ने रविशंकर के निर्माता के रूप में काम करना शुरू दिया. उनके बड़े भाई उदय शंकर उस समय के एक प्रसिद्ध नर्तक थे.