Autobiography of indian freedom fighters in hindi

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शिवराम राजगुरु
29. डॉ. बाबू कुँवर सिंह
27. लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai)

“पंजाब केसरी” के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय, लाल-बाल-पाल की तिकड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। 1928 में साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाठीचार्ज में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अंततः देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

10.

मौलाना अबुल कलाम आजाद
23. महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi)

“राष्ट्रपिता” के रूप में सम्मानित महात्मा गाँधी, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख चेहरे थे। 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे गाँधीजी ने ‘सत्य’ और ‘अहिंसा’ को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। उनके नेतृत्व में हुए असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरो दिया। वे सिर्फ एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान विचारक भी थे, जिनके सिद्धांत आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करते हैं।

2.

बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak)

“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा!” – इस नारे से देश में आजादी की आग जलाने वाले लोकमान्य तिलक, कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे। उन्होंने अपने समाचार पत्रों ‘केसरी’ और ‘मराठा‘ के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाई।

9.

Rajendra Prasad)

स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति, डॉ.

भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी‎यों का जीवन परिचय (BIOGRAPHY OF FAMOUS FREEDOM FIGHTERS OF INDIA IN HINDI)

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भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी‎यों का जीवन परिचय (Biography of Famous Freedom Fighters of India in Hindi): इस अध्याय में आप भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी‎यों की जीवनी से संबंधित विषयों को पढ़ेंगे। उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में विस्तार से जनेगें, जैसे उनके जन्म से जुड़ी जानकारी, उनके प्रारम्भिक जीवन से जुड़ी जानकारी, उनके माता-पिता का नाम, प्रारम्भिक शिक्षा व उच्च स्तरीय शिक्षा, करियर, उपलब्धियां और उनको मिले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान आदि के बारे में जनेगें।

भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी‎ (52 LESSONS)

अन्य उप-विषय

भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी‎

विश्व की प्रसिद्ध महिलाएं

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विश्व के प्रसिद्ध प्रधानमंत्री

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विश्व के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी

विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिक

भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक

विश्व की प्रसिद्ध अभिनेत्री

विश्व के प्रसिद्ध अभिनेता

विश्व के प्रसिद्ध राष्ट्रपति



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100+ भारतीय स्वतंत्रता सेनानी: वो वीर नायक जिन्होंने दिलाई आजादी

आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वह हमें यूँ ही नहीं मिली। इस आजादी के पीछे अनगिनत वीर सपूतों का बलिदान, न जाने कितनी माताओं का त्याग और लाखों गुमनाम नायकों का संघर्ष छिपा है। ये भारतीय स्वतंत्रता सेनानी (Indian Freedom Fighters) ही थे जिन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

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“भारत को आजाद कराने में न जाने कितने वीर सपूतों ने अपना रक्त बहाया है, न जाने कितनी माँओं ने अपने कलेजों के टुकड़ों की भेंट चढ़ाई है, न जाने कितनी पत्नियों ने अपने सुहाग को आजादी की बलिवेदी पर अर्पित किया है और न जाने कितने रणबांकुरों ने अपने जीवन की स्वतंत्रता के महायज्ञ में आहुति दी है।”

स्वतंत्रता का यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या विचारधारा का नहीं था। इसमें जितना योगदान महात्मा गाँधीके अहिंसक आंदोलन का था, उतना ही भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान का भी था। आज इस लेख में, हम उन महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी को याद करेंगे, जिनके कारण ही आज हम स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मना पा रहे हैं।

भारत के 20 महान स्वतंत्रता सेनानी (Top 20 Indian Freedom Fighters)

हालांकि स्वतंत्रता संग्राम में लाखों लोगों ने योगदान दिया, लेकिन कुछ ऐसे नायक हुए जिन्होंने इस आंदोलन को नेतृत्व और दिशा प्रदान की।

1.

राजेंद्र प्रसाद (Dr.

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अशफाक उल्ला खां
24. रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai)

“खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी।” – रानी लक्ष्मीबाई वीरता और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ जिस बहादुरी से लड़ाई लड़ी, वह आज भी हर भारतीय को प्रेरित करती है।

भारत की 10 महान महिला स्वतंत्रता सेनानी

आजादी की लड़ाई में महिलाओं का योगदान किसी भी पुरुष भारतीय स्वतंत्रता सेनानी से कम नहीं था।

  1. सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu): “भारत कोकिला” के नाम से विख्यात, वह एक कवयित्री और प्रखर नेता थीं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं।

  2. बेगम हजरत महल (Begum Hazrat Mahal): 1857 के विद्रोह में उन्होंने लखनऊ का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी।

  3. एनी बेसेंट (Annie Besant): आयरिश मूल की होने के बावजूद, उन्होंने भारत को अपना घर माना और होम रूल लीग की स्थापना कर स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी।

  4. अरुणा आसफ अली (Aruna Asaf Ali): 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर वह एक वीरांगना के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

  5. कमलादेवी चट्टोपाध्याय (Kamaladevi Chattopadhyay): वह एक समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्हें ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा हिरासत में ली गई पहली भारतीय महिला होने का गौरव प्राप्त है।

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  6. कस्तूरबा गाँधी (Kasturba Gandhi): वह सिर्फ महात्मा गाँधी की पत्नी ही नहीं, बल्कि स्वयं एक दृढ़ निश्चयी स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने हर कदम पर गाँधीजी का साथ दिया।

  7. मैडम भीकाजी कामा (Madam Bhikaji Cama): उन्होंने विदेश में रहते हुए भारत की आजादी की लौ जलाए रखी और 1907 में जर्मनी में भारत का झंडा फहराया।

  8. सुचेता कृपलानी (Sucheta Kriplani): वह भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय थीं और बाद में उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।

  9. ऊषा मेहता (Usha Mehta): भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने एक गुप्त कांग्रेस रेडियो का संचालन किया, जिससे आंदोलनकारियों तक खबरें पहुँचती रहीं।

  10. लक्ष्मी सहगल (Lakshmi Sahgal): “कैप्टन लक्ष्मी” के नाम से प्रसिद्ध, वह आजाद हिंद फौज की महिला रेजिमेंट ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ की कमांडर थीं।


HowTo: एक सच्चे नागरिक के रूप में स्वतंत्रता सेनानियों को कैसे सम्मान दें?

इन महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी को सच्ची श्रद्धांजलि देना हमारा कर्तव्य है। यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं:

चरण 1: उनके इतिहास को पढ़ें और समझें (Read and Understand Their History)
केवल उनके नाम याद करना काफी नहीं है। उनके जीवन, संघर्ष और विचारों के बारे में पढ़ें। इससे आपको आजादी के वास्तविक मूल्य का एहसास होगा।

चरण 2: उनके मूल्यों को अपनाएं (Adopt Their Values)
ईमानदारी, देशप्रेम, समानता, और न्याय जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं, जिनके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी।

चरण 3: एक जिम्मेदार नागरिक बनें (Be a Responsible Citizen)
अपने मताधिकार का प्रयोग करें, कानूनों का पालन करें, और देश की प्रगति में योगदान दें। यही उनके सपनों का भारत बनाने का सही तरीका है।

चरण 4: राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें (Respect National Symbols)
तिरंगे, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का हमेशा सम्मान करें। यह देश के प्रति आपके सम्मान को दर्शाता है।

चरण 5: युवा पीढ़ी को शिक्षित करें (Educate the Younger Generation)
अपने बच्चों और युवा पीढ़ी को इन स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियाँ सुनाएँ ताकि वे अपने इतिहास को जानें और उससे प्रेरणा लें।

100+ भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की सूची

यहाँ कुछ और प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानी के नाम दिए गए हैं जिनका योगदान अविस्मरणीय है:
(यह सूची मूल लेख से ली गई है और इसमें मामूली सुधार किए गए हैं)
21.

मंगल पांडे
25. भगत सिंह (Bhagat Singh)

“इंकलाब जिंदाबाद” का नारा बुलंद करने वाले शहीद-ए-आजम भगत सिंह, भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत हैं। मात्र 23 साल की उम्र में देश के लिए हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल जाने वाले इस महान क्रांतिकारी ने अपने बलिदान से सोए हुए देश को जगा दिया। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने और असेंबली में बम फेंककर उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत को अपने साहस का परिचय दिया।

3.

सुभाष चंद्र बोस (Subhash Chandra Bose)

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा!” – यह नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक असाधारण नेता और दूरदर्शी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन कर सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया। उनका मानना था कि केवल याचिकाओं से आजादी नहीं मिलेगी, इसके लिए अंग्रेजों से सीधी लड़ाई लड़नी होगी।

4.

उधम सिंह
…और सैकड़ों अन्य गुमनाम नायक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions – FAQs)

प्रश्न 1: भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी कौन थे?
उत्तर: मंगल पांडे को अक्सर 1857 के विद्रोह की शुरुआत करने के कारण भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है। हालांकि, उनसे पहले भी कई राजाओं और स्थानीय नेताओं ने ब्रिटिश शासन का विरोध किया था।

प्रश्न 2: “स्वतंत्रता सेनानी” किसे कहा जाता है?
उत्तर: एक स्वतंत्रता सेनानी वह व्यक्ति होता है जो अपने देश को विदेशी या औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष करता है। भारत के संदर्भ में, यह उन सभी लोगों पर लागू होता है जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

प्रश्न 3: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की क्या भूमिका थी?
उत्तर: महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में अभूतपूर्व भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल जुलूसों और प्रदर्शनों में भाग लिया, बल्कि रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं ने युद्ध के मैदान में भी नेतृत्व किया।

निष्कर्ष

हमारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी सिर्फ इतिहास के पन्नों के कुछ नाम नहीं हैं, बल्कि वे विचार हैं जो हमें हमेशा देश के लिए जीने और मरने की प्रेरणा देते हैं। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि यह आजादी कितनी कीमती है और इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। आइए, इन सभी ज्ञात और अज्ञात नायकों को नमन करें और एक ऐसा भारत बनाने का संकल्प लें जिसका उन्होंने सपना देखा था।

जय हिन्द!

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Independence Day 2025: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के 5 महानायक, आजादी दिलाने में निभाई थी मुख्य भूमिका

Hindi Newsकरियर न्यूज़5 Indian Freedom Fighters Who Shaped India's Freedom in hindi Independence Day 15 August 2025

संक्षेप:

Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम महान स्वतंत्रता के नायकों जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद समेत सैंकड़ों बलिदानियों को याद करते हैं, उन्हें नमन करते हैं। 

Aug 14, 2025 02:25 pm ISTPrachi लाइव हिन्दुस्तान

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Independence Day 15 August 2025: देश 15 अगस्त पर अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस (Independence day) मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को हमें ब्रिटिश शासन की करीब दो शताब्दी लंबी हुकूमत से देशवासियों को आजादी मिली थी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम महान स्वतंत्रता के नायकों जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद समेत सैंकड़ों बलिदानियों को याद करते हैं, उन्हें नमन करते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से 5 ऐसे क्रांतिकारियों के बारे में जानते हैं जिन्होंने आजादी दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

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भगत सिंह-

दुनिया भर में जब भी अपने देश के लिए जान कुर्बान करने वाले नौजवानों की बात आती है तो शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। केवल 23 साल की उम्र में, जिस समय हमारे यहाँ बच्चे कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रहे होते हैं, उस उम्र में उन्होंने अपने विचारों और अपनी देशभक्ति के दम पर अंग्रेज़ी सरकार की जड़ें हिलाकर रख दी थी। आज भारत में ही नहीं, दुनिया भर में नौजवान शहीद भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा लेते हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। भगत सिंह ने क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकूमत को चोट पहुंचाने के मकसद से असेंबली पर बम फेंका था। उन पर ब्रिटिश सरकार ने लाहौर षडयंत्र का मुकदमा चलाया था। 23 मार्च 1931 को उन्हें फांसी दी गई थी।

मंगल पांडे-

मंगल पांडे, वह क्रांतिकारी जिन्होंने स्वयं और अपने साथियों के साथ अमानवीय व्यवहार होता देख अपने अधिकारियों के खिलाफ बगावत कर दी और यह बगावत पूरे देश में आज़ादी की लड़ाई की चिंगारी बनी। ये थे मंगल पाण्डेय जिन्होंने 1857 में देश की स्वतंत्रता के लिए पहली क्रांति का आगाज़ किया। उनकी बगावत की चिंगारी से पूरे देश में क्रांति की शुरुआत हुई।

मंगल पांडे ब्रिटिश सेना में सिपाही थे। 9 फरवरी 1857 को जब 'नया कारतूस' देशी पैदल सेना को बाँटा गया तब मंगल पांडे ने उसे लेने से इनकार कर दिया क्योंकि इन कारतूसों को बनाने में गाय और सूअर की चर्बी' का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने अपनी ही टाइफल से उस अंग्रेज़ अधिकारी मेजर ह्यूसन को मौत के घाट उतार दिया। उन पर कोर्ट मार्शल द्वारा मुकदमा चलाकर फाँसी की सज़ा सुना दी गई।

चंद्रशेखर आज़ाद-

चंद्रशेखर आज़ाद वही क्रांतिकारी थे, जिनके नाम मात्र से अंग्रेज़ी पुलिस काँपने लगती थी। चंद्रशेखर आज़ाद ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर सॉन्डर्स को गोली मारकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया था। उन्होंने सरकारी खजाने को लूटकर क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाना शुरु कर दिया। उनका मानना था कि यह धन भारतीयों का ही है जिसे अंग्रेज़ों ने लूटा है। रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आज़ाद ने काकोरी कांड (1925) में सक्रिय भाग लिया था। 7 फरवरी, 1931 के दिन चंद्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अपने एक साथी के साथ बैठकर विचार-विमर्श कर रहे थे कि तभी वहाँ अंग्रेज़ों ने उन्हें घेर लिया। चंद्रशेखर आज़ाद ने पहले ही यह प्रण किया था कि वह कभी भी ज़िंदा पुलिस के हाथ नहीं आएँगे। इसी प्रण को निभाते हुए उन्होंने गोली खुद को मार ली थी।

महात्मा गाँधी-

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का पूरा जीवन, उनका एक-एक काम न सिर्फ आज हमें देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है बल्कि सच्चाई के रास्ते पर चलने का मार्गदर्शन भी करता है। महात्मा गाँधी के आज़ादी के आंदोलन में भाग लेने से पहले तक आज़ादी का आंदोलन और उसका नेतृत्व केवल कुलीन वर्गों के हाथ में था। उनके आने के बाद आज़ादी की लड़ाई हर वर्ग- हर तबके के लोगों तक पहुँची और जन-आंदोलन बनी। अहिंसा के उसके नायाब तरीके ने न केवल अंग्रेज़ों को देश से खदेड़ने का काम किया बल्कि पूरे विश्व के सामने शांति के साथ आंदोलन चलाने का संदेश भी रखा।

जलियाँवाला हत्याकांड के बाद जब महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन चलाया। चौरी-चौरा में अहिंसा के सिद्धांतों के खिलाफ हुई हिंसक घटना के बाद गाँधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया। नमक सत्याग्रह के बाद एक मुट्ठी नमक बनाते हुए गांधी जी ने कहा था, 'इस एक मुट्ठी नमक से मैं ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ें हिला रहा हूँ।' और वाकई इस महात्मा ने सत्य और अहिंसा के साथ ब्रिटिश साम्राज्य को भारत से उखाड़ फेंका। महात्मा गाँधी ने देश के लोगों की बेहतरी और देश की आज़ादी के लिए अपने शरीर पर एक धोती के अलावा सब कुछ त्याग दिया। उन्होंने ठान लिया था कि देश को आज़ाद कराके रहेंगे। उनके त्याग और दृढ निश्चय के परिणामस्वरूप देश को स्वतंत्रता मिली।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस-

एक अत्यंत प्रतिभावान युवक, जिसके अंदर देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी, पिता के कहने पर 'इंडियन सिविल सर्विसेज' की परीक्षा देता है और परीक्षा में टॉप भी कर जाता है। आई.सी.एस.

जयप्रकाश नारायण
22. सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel)

“भारत के लौह पुरुष” के रूप में विख्यात सरदार पटेल ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि आजादी के बाद 562 से अधिक रियासतों का भारत में विलय कराकर आधुनिक भारत की नींव रखी। बारडोली सत्याग्रह के सफल नेतृत्व के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।

5.

जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और कई बार जेल गए। आजादी के बाद, उन्होंने भारत को एक आधुनिक और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया।


तुलना तालिका: विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों की विचारधारा

महात्मा गाँधीअहिंसक सत्याग्रहभारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन
भगत सिंहक्रांतिकारी समाजवादसशस्त्र क्रांति, इंकलाब का नारा
सुभाष चंद्र बोसराष्ट्रवादी, सैन्यवादीआजाद हिंद फौज का गठन
सरदार पटेलयथार्थवादी, राष्ट्रवादीरियासतों का एकीकरण, बारडोली सत्याग्रह
रानी लक्ष्मीबाईवीरता, आत्म-सम्मान1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

6.

चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad)

“आजाद ही रहा हूँ, आजाद ही रहूँगा” – इस प्रण को निभाने वाले चंद्रशेखर आजाद एक निडर क्रांतिकारी थे। काकोरी कांड और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने अंग्रेजों के हाथ आने के बजाय खुद को गोली मारकर शहादत को चुना।

8.

अफसर की अपनी नौकरी पर लात मार दी जो उस समय किसी भारतीय को मिलना एक आसान बात नहीं थी। नेताजी ने आज़ाद हिंद फौज' तैयार की और लाखों भारतीयों को इससे जोड़ा। उन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत को इतना बेबस कर दिया कि अंग्रेज़ों को भारत छोड़कर जाना पड़ा।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का प्रसिद्ध नारा' तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा' सुनकर देश के युवाओं में ही नहीं बल्कि बुजुर्गों के खून में भी उबाल आ जाता था। उनके क्रांतिकारी तेवरों से ब्रिटिश राज हिल चुका था। 18 अगस्त 1945 को टोक्यो (जापान) जाते समय ताइवान के पास नेताजी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ। लेकिन बताया जाता है कि उनका शव नहीं मिल पाया था इसलिए उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है।

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राम प्रसाद बिस्मिल
30.

सुखदेव थापर
28.