Metro man sreedharan biography in hindi
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ख़ास बात यह है कि ई श्रीधरन ने मात्र 46 दिनों में ही उस पुल को फिर से तैयार करवा दिया. उनके महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने ई श्रीधरन को ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया है.
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ई श्रीधरन की पहली खासियत है मुश्किल कार्यों को समय पर पूरा करना. इसके अलावा ई श्रीधरन ने आन्ध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित ‘गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज’ से ‘सिविल इंजीनियरिंग’ की डिग्री प्राप्त की है.
ई श्रीधरन का करियर : E Sreedharan career :
इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद ई श्रीधरन ने कोझीकोड स्थित ‘गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक’ में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ाने का काम शुरू किया.
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ई श्रीधरन ने यह साबित किया कि सफलता केवल बड़े संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने से नहीं मिलती. इस उपलब्धि ने उन्हें भारत में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में समय की पाबंदी का प्रतीक बना दिया. यहाँ पढ़ें Delhi-NCR News in Hindi और पाएं Delhi-NCR latest News in Hindi हर पल की जानकारी । दिल्ली एनसीआर की हर ख़बर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार। जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!
उनके नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो परियोजना को कुशलतापूर्वक पूरा किया गया. उनका पूरा नाम इलाट्टूवल्लपित श्रीधरन है.
ई श्रीधरन के समर्पण को एमएस अशोकन की किताब 'कर्मयोगी' में बखूबी दर्शाया गया है. उनके इस कार्य के लिए उन्हें रेल मंत्री पुरुस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं.
कोलकाता मेट्रो : E Sreedharan in Kolkata Metro :
ई श्रीधरन की काबिलियत को देखते हुए 1970 में उनको भारत की पहली मेट्रो सेवा कोलकाता मेट्रो की योजना व डिज़ाइन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई.
भारतीय रेलवे के लिए ई श्रीधरन कितने जरुरी थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1990 में उनको रिटायर होना था, लेकिन सरकार ने उनको कॉन्ट्रैक्ट पर लेकर कोंकण रेलवे का चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया. केरल के पलक्कड़ में जन्मे श्रीधरन ने अपने अटूट विश्वास और बुद्धिमत्ता के बल पर अद्वितीय कार्य किए हैं, जिनकी प्रशंसा दुनिया भर में की गई है.
पहली है एमएस अशोकन द्वारा लिखित ‘कर्मयोगी: इ श्रीधरनते जीविथा कथा’ (द स्टोरी ऑफ़ इ. रानी पद्मिनी’ बनकर बाहर निकला.
कोंकण रेलवे : Konkan Railway :
साल 1987 में ई श्रीधरन को पश्चिमी रेलवे में जनरल मैंनेजर बना दिया गया. 1975 में उन्हें कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना से हटा लिया गया.
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पहला जहाज़ : First Ship of E Sreedharan :
साल 1979 में ई श्रीधरन ने कोचीन शिपयार्ड ज्वाइन किया.
और ई श्रीधरन को मेट्रो मैन (Metro Man E Sreedharan) क्यों कहा जाता है? ई श्रीधरन ने अपनी शुरूआती शिक्षा पलक्कड़ के ‘बेसल इवैंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल’ से पूरी की है.
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