Biography of kalpana chawla in hindi language
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कल्पना चावला NASA में कैसे शामिल हुईं?
उन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर 1994 में NASA के अंतरिक्ष यात्री दल में जगह बनाई।
5. कल्पना चावला का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उनका जन्म 1 जुलाई 1961 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था।
3. कल्पना चावला की क्वालिफिकेशन?
Ans.
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कल्पना चावला, एक ऐसा नाम जो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में साहस, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्टता का प्रतीक बन चुका है। अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में, उन्होंने अनगिनत लोगों को अपने सपनों का पीछा करने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित किया।
कल्पना चावला का जीवन परिचय
कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। वे बचपन से ही अंतरिक्ष में रुचि रखती थीं। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और टेक्सास विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री प्राप्त की। बाद में, उन्होंने कोलोराडो विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की। 1988 में वे नासा से जुड़ीं और 1997 में STS-87 मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं। 1 फरवरी 2003 को STS-107 मिशन के दौरान स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में उनका निधन हो गया।
| Kalpana Chawla Biography in Hindi | |
|---|---|
| पूरा नाम | कल्पना चावला (Kalpana Chawla) |
| जन्म | 17 मार्च 1962, करनाल, हरियाणा, भारत |
| मृत्यु | 1 फरवरी 2003, पृथ्वी वायुमंडल (स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना) |
| राष्ट्रीयता | भारतीय-अमेरिकी |
| शिक्षा | बी.टेक: पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ एम.एस.: टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका पीएचडी: कोलोराडो विश्वविद्यालय, अमेरिका |
| व्यवसाय | एयरोस्पेस इंजीनियर, नासा अंतरिक्ष यात्री |
| प्रथम अंतरिक्ष मिशन | STS-87 (19 नवंबर 1997) |
| अंतिम अंतरिक्ष मिशन | STS-107 (16 जनवरी 2003) |
| सम्मान एवं पुरस्कार | कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर, नासा स्पेस फ्लाइट मेडल, नासा डिस्टिंग्विश्ड सर्विस मेडल |
| प्रसिद्धि के कारण | अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला |
| विरासत | “कल्पना-1” उपग्रह, कई संस्थानों और सड़कों का नामकरण उनके नाम पर |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। वह अपने परिवार में चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। बचपन से ही, उन्हें उड़ान और अंतरिक्ष के प्रति गहरा आकर्षण था। वह अपने पिता के साथ स्थानीय फ्लाइंग क्लब जाया करती थीं, जहां से उनके अंतरिक्ष के सपने ने उड़ान भरी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा करनाल के टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की। बाद में, उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। अपने सपनों को साकार करने के लिए, वह 1982 में अमेरिका चली गईं, जहां उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और कोलोराडो विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की।
नासा में करियर
अपनी उच्च शिक्षा के पश्चात, कल्पना चावला ने 1988 में नासा के एम्स रिसर्च सेंटर में काम करना शुरू किया। वहां, उन्होंने वर्टिकल/शॉर्ट टेकऑफ़ और लैंडिंग (V/STOL) तकनीकों पर कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD) अनुसंधान किया। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें 1994 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल होने का अवसर दिलाया। मार्च 1995 में, उन्होंने अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार के रूप में प्रशिक्षण शुरू किया और एक साल के कठोर प्रशिक्षण और मूल्यांकन के बाद, उन्हें मिशन विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया।
पहला मिशन अंतरिक्ष मिशन: STS-87
कल्पना चावला का पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को स्पेस शटल कोलंबिया की उड़ान STS-87 के माध्यम से शुरू हुआ। इस मिशन में, उन्होंने मिशन विशेषज्ञ और प्राइमरी रोबोटिक आर्म ऑपरेटर की भूमिका निभाई। उन्होंने पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ कीं और अंतरिक्ष में 376 घंटे बिताए। इस दौरान, उन्होंने स्पार्टन सैटेलाइट को तैनात किया, हालांकि कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण, सैटेलाइट को पुनः प्राप्त करना पड़ा। इस मिशन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और वह अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
दूसरा मिशन अंतरिक्ष मिशन: STS-107
उनका दूसरा और अंतिम मिशन STS-107 था, जो 16 जनवरी 2003 को शुरू हुआ। यह मिशन विज्ञान और अनुसंधान पर केंद्रित था, जिसमें क्रू मेंबर्स ने 80 से अधिक प्रयोग किए। 16 दिनों की इस उड़ान के दौरान, उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया, जो पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत प्रौद्योगिकी विकास और अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य से संबंधित थे। दुर्भाग्यवश, 1 फरवरी 2003 को, पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते समय, स्पेस शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सभी छह क्रू मेंबर्स की मृत्यु हो गई।
विवाह और व्यक्तिगत जीवन
कल्पना चावला का विवाह जीन पियरे हैरिसन से हुआ था, जो एक एयरोस्पेस इंजीनियर और फ्लाइट इंस्ट्रक्टर थे। उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ था, लेकिन वे अमेरिका में बसे हुए थे। वे 1982 में कल्पना चावला से मिले, जब कल्पना अपनी उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गई थीं।
दोनों की समान रुचियाँ थीं, खासकर उड़ान भरने को लेकर। 1983 में दोनों ने विवाह कर लिया। जीन पियरे ने कल्पना के अंतरिक्ष यात्री बनने के सपने में हमेशा उनका समर्थन किया।
कल्पना की मृत्यु के बाद, जीन पियरे ने एक किताब “The Edge of Time: The Authoritative Biography of Kalpana Chawla” लिखी, जिसमें उन्होंने कल्पना के जीवन के अनछुए पहलुओं को साझा किया।
कल्पना चावला की पुण्यतिथि
1 फरवरी 2003, यह वह दिन था जब पूरी दुनिया ने अंतरिक्ष विज्ञान के एक उज्ज्वल सितारे को खो दिया। कल्पना चावला, जो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं, स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में अपने पाँच अन्य साथियों के साथ शहीद हो गईं। उनकी पुण्यतिथि न केवल एक वैज्ञानिक क्षति की याद दिलाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर किसी के पास जुनून और दृढ़ संकल्प हो, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है।
पुरस्कार और सम्मान
कल्पना चावला के अद्वितीय योगदान और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर, नासा स्पेस फ्लाइट मेडल और नासा डिस्टिंग्विश्ड सर्विस मेडल शामिल हैं। उनकी स्मृति में, भारत और विश्वभर में कई संस्थानों, सड़कों और पुरस्कारों का नामकरण उनके नाम पर किया गया है। भारत में, मौसम संबंधी उपग्रह श्रृंखला ‘मेटसैट‘ का नाम बदलकर ‘कल्पना‘ रखा गया। इसके अलावा, टेक्सास विश्वविद्यालय ने अपने छात्रावास का नाम ‘कल्पना चावला हॉल‘ रखा है।
विरासत
कल्पना चावला की कहानी न केवल एक प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सपनों के प्रति समर्पण से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी यात्रा ने अनगिनत युवाओं, विशेषकर महिलाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उनके साहस, समर्पण और उत्कृष्टता को सलाम करते हैं और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
कल्पना चावला ने एक बार कहा था, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूँ। प्रत्येक पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए ही मरूँगी।” उनके ये शब्द आज भी हमें प्रेरित करते हैं और यह याद दिलाते हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती।
FAQs
Q1.
कल्पना चावला का जीवन परिचय लिखो?
कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। वे बचपन से ही अंतरिक्ष में रुचि रखती थीं। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और टेक्सास विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री प्राप्त की। 1988 में वे नासा से जुड़ीं और 1997 में STS-87 मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 2003 में, STS-107 मिशन के दौरान स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटना में उनका निधन हो गया। उनकी उपलब्धियाँ आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं।
Q2.
कल्पना चावला की मृत्यु कैसे हुई?
1 फरवरी 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया (STS-107) पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय टूटकर नष्ट हो गया। लॉन्च के दौरान शटल के विंग पर क्षति हुई थी, जिससे पुनः प्रवेश के समय अत्यधिक गर्मी अंदर आ गई और दुर्घटना हो गई। इसमें कल्पना सहित सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई।
Q3.
कल्पना चावला की शिक्षा क्या थी?
कल्पना चावला ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) किया। इसके बाद, उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय, अमेरिका से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री (M.Sc) प्राप्त की। उन्होंने कोलोराडो विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी (Ph.D.) भी पूरी की।
Kalpana Chawla Biography in Hindi:-कल्पना चावला इनको किसी परिचय की जरुरत नहीं है, ये भारत देश की एक ऐसी महिला है जिन्होंने ना सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया पर आपने नाम का झंड़ा गाढ़ा है। कल्पना चावला हर लड़की के लिए हमेशा से प्रेरणा रही है जब वह जीवत तब भी और आज जब वह हमारे साथ नहीं है तब भी। उल्लेखनिय है कि कल्पना चावला (Kalpana Chawla) पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री थीं। उनके पास हवाई जहाज और ग्लाइडर रेटिंग के साथ एक प्रमाणित उड़ान प्रशिक्षक का लाइसेंस, एकल और बहु-इंजन भूमि और सीप्लेन के लिए वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस, और ग्लाइडर और हवाई जहाज के लिए उपकरण रेटिंग थे। उन्हें एरोबैटिक्स और टेलव्हील हवाई जहाज उड़ाने में मजा आता था।
कल्पना चावला का जन्म 1 जुलाई 1961 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना एक व्यवसायी बनारसी लाल चावला और एक साधारण गृहिणी संयोगिता की बेटी थीं। कल्पना के माता-पिता मूल रूप से पश्चिम पंजाब के मुल्तान जिले से करनाल आए थे, जिसे अब पाकिस्तान के नाम से जाना जाता है। उड़ने का शौक रखने वाली कल्पना चावला बचपन से ही साहसी बच्ची रही हैं।
हालाँकि उसने वैमानिकी इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद ही एक अंतरिक्ष यात्री बनने का फैसला किया था, लेकिन जब वह मुश्किल से 13 साल की थी तब से उन्हें उड़ान सीखने की इच्छा व्यक्त की थी। उनका बचपन अन्य लड़कियों से बिल्कुल अलग था। बार्बी डॉल को सजने-संवरने से ज्यादा हवाई जहाजों की स्केचिंग और पेंटिंग करना उनकी खासियत थी। इस लेख के जरिए हम आपके सामने कल्पना चावला की जीवनी प्रस्तुत करने जा रहे है, जिसमें आपको कल्पना चावला को गहराई से जानने का मौका मिलेगा ही।
Kalpana Chawla Biography in Hindi |
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कल्पना चावला कौन हैं?
Ans. कल्पना चावला की मृत्यु कैसे हुई?
2003 में उनके दूसरे अंतरिक्ष मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान कोलंबिया पृथ्वी के वातावरण में वापस दाखिल होते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमे उनकी और चालक दल के सभी सदस्यों की मृत्यु हो गई।
7. इन सभी बिंदूओं के आधार पर रेडी किया है । इस लेख को पूरा पढ़ने पर ना सिर्फ आपको कल्पना चावला को जानने का मौका मिलेगा, बल्कि आपका दिल भी करेगा कुछ उनके जैसा कर दिखाने का। तो देर किस बात शुरु करें कल्पना चावला को पढ़ने का सफर।
Kalpana Chawla Biography (Overview)
| टॉपिक | कल्पना चावला बायोग्राफी 2023 |
| लेख प्रकार | जीवनी |
| साल | 2023 |
| भाषा | हिंदी |
| कल्पना चावला का जन्म | 1 जुलाई 1961 |
| जन्म स्थान | करनाल,हरियाणा |
| माता-पिता | बनारसी लाल चावला-संयोगिता चावला |
| मृत्यु | 1 फरवरी 2003 |
| मृत्यु कारण | ‘कोलंबिया’ आपदा |
कल्पना चावला की जीवनी | Kalpana Chawla Jeevani
कल्पना चावला अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री थीं, जिनकी अंतरिक्ष यान ‘कोलंबिया’ आपदा में मृत्यु हो गई थी। भारत के करनाल में जन्मी, वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। शुरू से ही वह एक टॉमब्वॉय थी, उनके अंदर बचपन से ही हवाई जहाज के लिए एक जुनून था। पंजाब विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद वह बीस साल की उम्र में यूएसए चली गईं थी। वहां उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स और पीएचडी की थी। इसके बाद वह नासा में शामिल हो गईं और उन्होंने एक शोधकर्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया।
उन्होंने पहले एम्स रिसर्च सेंटर और फिर ओवरसेट मेथड्स इंक में विभिन्न विषयों पर काम किया।सन 1991 में अमेरिकी नागरिक बनने के बाद उन्होंने NASA अंतरिक्ष यात्री कोर के लिए आवेदन किया, जिसके बाद वह मार्च 1995 में संगठन में शामिल हो गईं। मई 1997 में वह अपने पहले अंतरिक्ष मिशन पर गईं, उन्होंने स्पेस शटल कोलंबिया की उड़ान STS-87 में पंद्रह दिनों की यात्रा की। 2003 में उन्होंने एक बार फिर से अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान STS-107 पर सवार होकर अंतरिक्ष में यात्रा की और लगभग सोलह दिनों तक अंतरिक्ष में रही। उनकी चालीस वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी जब स्पेस शटल कोलंबिया लैंडिंग से सोलह मिनट पहले टेक्सास में विघटित हो गया।
किरण बेदी का जीवन परिचय
Kalpana Chawla Biography In Hindi
| नाम | कल्पना चावला |
| निक नेम | मोंटू |
| कल्पना चावला का जन्म | 1 जुलाई 1961 |
| जन्म स्थान | करनाल,हरियाणा |
| माता-पिता | बनारसी लाल चावला-संयोगिता चावला |
| राष्ट्रीयता | भारतीय, अमेरिकी |
| धर्म | हिन्दू |
| स्कूल | टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी। स्कूल, करनाल |
| शौक | नृत्या,बैडमिंटन,खेलना और कविता पढ़ना |
| वैवाहिक स्थिति | विवाहित |
| पति | जीन पियरे हैरिसन |
| फेवरिट कलर | नीला |
| फेवरिट खेल | बैडमिंटन |
| फेवरिट जगह | न्यूयॉर्क शहर |
| डेब्यू | 1988 – वह नासा में शामिल हुईं 19-11-1997 – पहला अंतरिक्ष मिशन (372 घंटों में 10.4 मिलियन मील) |
कल्पना चावला और अवार्ड्स | Kalpana Chawla Awards
कल्पना चावला को उनकी अद्भुत यात्राएँ और योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनकी निम्नलिखित अवार्ड्स उनके अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों की प्रशंसा करते हैं:
- पद्मश्री: कल्पना चावला को 1982 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान भारतीय नागरिकों के योगदान और उनके उत्कृष्ट कार्यों को पहचानता है।
- स्पेस मेडल: कल्पना चावला को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा स्वर्ण पदक “स्पेस मेडल” से नवाजा गया था। इससे उनके अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान को पहचाना गया था।
- उपाधि विभूषण: कल्पना चावला को भारत सरकार द्वारा 1991 में उपाधि विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके विज्ञान और अंतरिक्ष क्षेत्र में योगदान को मान्यता देता है।
- सितारा-ए-खिदमत: 2004 में पाकिस्तान सरकार द्वारा कल्पना चावला को “सितारा-ए-खिदमत” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके यात्रियों के साथ परमाणु शक्ति विकास में योगदान के लिए था।
कल्पना चावला के इन अवार्ड्स ने उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को साबित किया और उनके यात्रियों और वैज्ञानिक समुदाय में उनके योगदान को मान्यता दी।
अंतरिक्ष यात्रियों को अस्थिर जहाज द्वारा फेंका गया, जो हिल गया और उछल गया। जहाज के एक मिनट से भी कम समय में दबाव कम होने से चालक दल के सदस्य मारे गए। पृथ्वी से टकराने से पहले अंतरिक्ष यान टेक्सास और लुइसियाना के ऊपर बिखर गया। 1986 की चैलेंजर आपदा के बाद, यह दूसरी महत्वपूर्ण आपदा थी। चालक दल के सभी सात सदस्य मारे गए। हसबैंड और क्लार्क के अलावा, इलान रेमन और डेविड ब्राउन भी कलाकारों का हिस्सा थे, जैसे कि माइकल एंडरसन, विलियम मैककूल और कल्पना चावला थे।अपनी दो यात्राओं के दौरान, चावला ने अंतरिक्ष में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए। जब वह अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के बाद पृथ्वी पर लौटी, तो उसने टिप्पणी की, “जब आप सितारों और ब्रह्मांड को देखते हैं तो आप सौर मंडल के सदस्य की तरह महसूस करते हैं।”
अंतरिक्ष यात्रियों को अस्थिर जहाज द्वारा फेंका गया, जो हिल गया और उछल गया। जहाज के एक मिनट से भी कम समय में दबाव कम होने से चालक दल के सदस्य मारे गए। पृथ्वी से टकराने से पहले अंतरिक्ष यान टेक्सास और लुइसियाना के ऊपर बिखर गया। 1986 की चैलेंजर आपदा के बाद, यह दूसरी महत्वपूर्ण आपदा थी। चालक दल के सभी सात सदस्य मारे गए। हसबैंड और क्लार्क के अलावा, इलान रेमन और डेविड ब्राउन भी कलाकारों का हिस्सा थे, जैसे कि माइकल एंडरसन, विलियम मैककूल और कल्पना चावला थे।अपनी दो यात्राओं के दौरान, चावला ने अंतरिक्ष में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए। जब वह अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के बाद पृथ्वी पर लौटी, तो उसने टिप्पणी की, “जब आप सितारों और ब्रह्मांड को देखते हैं तो आप सौर मंडल के सदस्य की तरह महसूस करते हैं।”
अंतरिक्ष यात्रियों को अस्थिर जहाज द्वारा फेंका गया, जो हिल गया और उछल गया। जहाज के एक मिनट से भी कम समय में दबाव कम होने से चालक दल के सदस्य मारे गए। पृथ्वी से टकराने से पहले अंतरिक्ष यान टेक्सास और लुइसियाना के ऊपर बिखर गया। 1986 की चैलेंजर आपदा के बाद, यह दूसरी महत्वपूर्ण आपदा थी। चालक दल के सभी सात सदस्य मारे गए। हसबैंड और क्लार्क के अलावा, इलान रेमन और डेविड ब्राउन भी कलाकारों का हिस्सा थे, जैसे कि माइकल एंडरसन, विलियम मैककूल और कल्पना चावला थे।अपनी दो यात्राओं के दौरान, चावला ने अंतरिक्ष में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए। जब वह अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के बाद पृथ्वी पर लौटी, तो उसने टिप्पणी की, “जब आप सितारों और ब्रह्मांड को देखते हैं तो आप सौर मंडल के सदस्य की तरह महसूस करते हैं।”
कल्पना चावला की शिक्षा | Kalpana Chawla Education
Kalpana Chawla Biography:-कल्पना चावला भारत ने अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा करनाल के टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल सी की थी।कल्पना चावला के नासा के अंतरिक्ष यात्री बनने के बाद नासा ने स्कूल को समर स्पेस एक्सपीरियंस प्रोग्राम में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।कल्पना चावला यह सुनिश्चित करने के लिए अड़ी थी कि भारत में युवा महिलाओं की वैज्ञानिक शिक्षा तक पहुंच हो।पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ने कल्पना चावला को वैमानिकी इंजीनियरिंग की डिग्री प्रदान की। प्रोफेसरों ने उन्हें डिग्री चुनने से हतोत्साहित करने का प्रयास किया क्योंकि भारत में महिलाओं के लिए कुछ ही विकल्प थे
जो इस करियर मार्ग को अपनाना चाहती थीं। यह विवाद का विषय था लेकिन कल्पना चावला ने हटने से इनकार कर दिया। 1980 के दशक में भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवास करने के बाद कल्पना चावला को प्राकृतिक रूप दिया गया ताकि वह अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। जब उन्होंने ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की तब वह कोलोराडो विश्वविद्यालय में एक वैमानिकी इंजीनियर थीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अगले साल नासा एम्स रिसर्च सेंटर में लिफ्टिंग सिस्टम के लिए द्रव यांत्रिकी पर शोध शुरू किया।
कल्पना चावला परिवार | Kalpana Chawla Family
कल्पना 17 मार्च 1962 को भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के करनाल शहर में पैदा हुई थी। वह भारतीय राष्ट्रीयता रखती थी और मिश्रित जातीय पृष्ठभूमि से संबंधित थी। इसी तरह उनका धर्म हिंदू था। उनका जन्म बनारसी लाल चावला के घर हुआ था जो कि एक व्यापारी थे और उनकी मां संयोगिता चावला एक गृहिणी थीं। सुनीता चावला, संजय चावला, दीपा चावला नाम के उनके तीन भाई-बहन थे। सबसे छोटी बेटी होने के कारण उनकी परवरिश मुश्किल थी। जब वह एक बच्ची थी तभी से उनके माता-पिता उन्हें मोंटू कहकर बुलाते थे। स्कूल में प्रवेश करने पर कल्पना चावला अपने परिवार में अपना नाम चुनने वाली पहली महिला थीं। किसी व्यक्ति के “विचार” या “कल्पना” को ‘कल्पना’ नाम से दर्शाया जाता है। कल्पना चावला वह एक मोनिकर थी जिसके द्वारा वह जाती थी। फ्लाइंग, ट्रेकिंग, बैकपैकिंग और पढ़ना उसकी कुछ पसंदीदा गतिविधियाँ थीं।
कल्पना चावला के पति का नाम | Kalpana Chawla Husband Name
कल्पना चावला की मुलाकात जीन पियरे हैरिसन (Jean Pierre Harrison) से हुई, जो एक युवा, लंबा और सुंदर आदमी था, जो उसके जीवन का प्यार था। वह उस समय पेशेवर पायलट योग्यता प्राप्त करने पर काम कर रहे थे। वे दोनों वास्तव में अच्छी तरह से हिट हुए और करीबी दोस्त बन गए। वे एक ऐसे युगल थे जिन्होंने बहुत सी सामान्य रुचियों और पसंदों को साझा किया था कि वे एक दूसरे के पूरक थे, यहां तक कि सबसे सरल चीजों पर भी। उनके शौक से लेकर उनके द्वारा साझा किए गए विचारों ने उनके बंधन को और भी मजबूत बना दिया। यह बंधन उनकी शादी का चरमोत्कर्ष था, जो 2 दिसंबर, 1983 को आयोजित किया गया था।
कल्पना चावला की अंतरिक्ष यात्रा | Kalpana Chawla Antariksh Yaatra
Kalpana Chawla कल्पना चावला ने सन 1988 में नासा एम्स रिसर्च सेंटर में काम करना शुरू किया, जहां उन्होंने मोटर चालित लिफ्टों के लिए कम्प्यूटेशनल द्रव गतिकी का अध्ययन किया था। उन्होंने अपने अध्ययन को “जमीनी प्रभाव” में विमान, विशेष रूप से हैरियर के पास पाए जाने वाले जटिल एयरफ्लो के मॉडलिंग पर केंद्रित किया था। सन 1993 में ओवरसेट मेथड्स इंक में शामिल होने के बाद से कल्पना चावला ने अन्य शोधकर्ताओं के साथ एक टीम विकसित करने के लिए काम किया था जो कई चलती निकायों से जुड़ी स्थितियों के मॉडलिंग पर ध्यान केंद्रित करती थी। उनके द्वारा वायुगतिकीय अनुकूलन विधियों का विकास और कार्यान्वयन किया गया था। उनके अध्ययन के निष्कर्ष तकनीकी प्रकाशनों और सम्मेलन पत्रों में प्रकाशित हुए थे।
नासा ने उन्हें दिसंबर 1994 में चुना और उन्होंने जनवरी 1995 में एजेंसी के लिए काम करना शुरू किया। मार्च 1995 में जब अंतरिक्ष यात्रियों का 15वां समूह बनाया गया था, तब एक अंतरिक्ष यात्री की भूमिका के लिए एक उम्मीदवार के रूप में उनका नाम जॉनसन स्पेस सेंटर के ध्यान में लाया गया था। एस्ट्रोनॉट ऑफिस ईवीए/रोबोटिक्स और कंप्यूटर ब्रांच क्रू रिप्रेजेंटेटिव बनने के लिए उन्हें एक साल का प्रशिक्षण पूरा करना था। यहीं पर उन्होंने अंतरिक्ष शटल के लिए सॉफ्टवेयर का मूल्यांकन किया और रोबोटिक सिचुएशन अवेयरनेस डिस्प्ले के साथ काम किया।
Kalpana Chawla Jeevani | कल्पना चावला जीवनी
नवंबर 1997 में कल्पना चावला को STS-87 पर अंतरिक्ष यान कोलंबिया की कक्षा में जाने का पहला मौका मिला। एक महीने से भी कम समय में शटल द्वारा पृथ्वी की दो सौ बावन परिक्रमाएँ पूरी की गईं। उड़ान के दौरान चावला द्वारा शटल से लॉन्च किए गए स्पार्टन सैटेलाइट सहित बोर्ड पर कई प्रयोग और अवलोकन गियर थे।दो अंतरिक्ष यात्रियों को एक उपग्रह को पुनः प्राप्त करने के लिए एक स्पेसवॉक करना पड़ा, जो सॉफ्टवेयर मुद्दों के कारण खराब हो गया था, जिसके लिए स्पेसवॉक की आवश्यकता थी।
अंतरिक्ष में अपने दूसरे मिशन के लिए कल्पना चावला को नासा द्वारा सन 2000 में चुना गया था। उन्हें STS-107 मिशन के लिए एक मिशन विशेषज्ञ के रूप में फिर से नियुक्त किया गया था।सन 2003 में अंततः लॉन्च होने से पहले मिशन को कई बार स्थगित किया गया था। 16 दिनों के मिशन में चालक दल द्वारा 80 से अधिक परीक्षण किए गए थे। अंतरिक्ष यान एंडेवर ने 1 फरवरी 2003 को पृथ्वी पर विजयी वापसी की और इसे उसी दिन कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाना था। अधिकारी के मुताबिक लॉन्च के दौरान ब्रीफकेस के आकार का इंसुलेशन का एक टुकड़ा टूट गया। परिणामस्वरूप विंग की थर्मल सुरक्षा प्रणाली से समझौता किया गया। पुन: प्रवेश के दौरान इसे संरचना द्वारा गर्मी से परिरक्षित किया गया था। शटल का पंख तब टूट गया जब वह गर्म गैस के कारण वायुमंडल में उड़ गया।
Kalpana Chawla Experience in NASA | कल्पना चावला का नासा का अनुभव
अंतरिक्ष यात्रियों को अस्थिर जहाज द्वारा फेंका गया, जो हिल गया और उछल गया। जहाज के एक मिनट से भी कम समय में दबाव कम होने से चालक दल के सदस्य मारे गए। पृथ्वी से टकराने से पहले अंतरिक्ष यान टेक्सास और लुइसियाना के ऊपर बिखर गया। 1986 की चैलेंजर आपदा के बाद, यह दूसरी महत्वपूर्ण आपदा थी। चालक दल के सभी सात सदस्य मारे गए। हसबैंड और क्लार्क के अलावा, इलान रेमन और डेविड ब्राउन भी कलाकारों का हिस्सा थे, जैसे कि माइकल एंडरसन, विलियम मैककूल और कल्पना चावला थे।अपनी दो यात्राओं के दौरान, चावला ने अंतरिक्ष में 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए। जब वह अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के बाद पृथ्वी पर लौटी, तो उसने टिप्पणी की, “जब आप सितारों और ब्रह्मांड को देखते हैं तो आप सौर मंडल के सदस्य की तरह महसूस करते हैं।”
कल्पना चावला की मौत कैसे हुई | Kalpana Chawla Died
Kalpana Chawla Biography:-सन 2000 में कल्पना चावला को स्पेस शटल कोलंबिया की अंतिम उड़ान STS-107 के लिए एक मिशन विशेषज्ञ के रूप में चुना गया था। यह एक वैज्ञानिक मिशन था और इसमें एक छोटी प्रयोगशाला शामिल थी, जिसे ‘स्पेस हब’ नाम दिया गया था। प्रयोगशाला की लंबाई सात मीटर, चौड़ाई पांच मीटर और ऊंचाई चार मीटर थी। प्रारंभ में यह योजना बनाई गई थी कि मिशन 11 जनवरी 2001 को उड़ान भरेगा, लेकिन तकनीकी समस्याओं और शेड्यूलिंग विरोधों के कारण 18 बार विलंबित हुआ था। आखिरकार इसे 16 जनवरी 2003 को कैनेडी स्पेस सेंटर के LC-39-A से लॉन्च किया गया था।
लेकिन लॉन्चिंग बिना किसी अड़चन के नहीं थी।लॉन्च के 81.7 सेकंड बाद, स्पेस शटल के बाहरी टैंक से फोम इंसुलेशन का एक टुकड़ा टूट गया और ऑर्बिटर के बाएं पंख से टकराया, जिससे यह काफी क्षतिग्रस्त हो गया। उस समय, STS-107 लगभग 65,600 फीट की ऊंचाई पर था जो 1,650 मील प्रति घंटे की गति से यात्रा कर रहा था।अंतरिक्ष यान 15 दिन, 22 घंटे, 20 मिनट, 32 सेकंड तक अंतरिक्ष में रहा।
इस अवधि के दौरान, मिशन के चालक दल ने दो वैकल्पिक पारियों में चौबीस घंटे काम किया, लगभग 80 प्रयोग किए, न केवल अंतरिक्ष विज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया।अंतरिक्ष में एक सफल यात्रा के बाद, STS-107 ने 1 फरवरी, 2003 को पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश किया। लेकिन चालक दल कभी घर नहीं पहुंचा क्योंकि कैनेडी स्पेस सेंटर में निर्धारित लैंडिंग से 16 मिनट पहले, अंतरिक्ष यान टेक्सास के ऊपर बिखर गया, जिससे प्रत्येक की मौत हो गई। उनमें से।
कल्पना चावला की कहानी | Kalpana Chawla Story
कल्पना ने 1976 में टैगोर स्कूल, करनाल, भारत से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 1982 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। चावला ने कोलोराडो विश्वविद्यालय, 1988 से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी पूरा किया।1982 में, वह एक अमेरिकी विश्वविद्यालय में उतरीं। कल्पना की मुलाकात फ्रीलांस फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर जीन पियरे हैरिसन से हुई। जीन पियरे से प्रेरित होकर, उसने स्कूबा डाइविंग, लंबी पैदल यात्रा की और लंबी उड़ान अभियान चलाए। उसने अपने भाई को पियरे के प्रति अपने झुकाव के बारे में सूचित किया।
कल्पना का भाई अपने माता-पिता पर तब हावी हो गया जब कल्पना ने कहा कि वह जीन पियरे से शादी करना चाहती है। उनकी शादी 1984 में हुई थी। 1988 में, कल्पना चावला ने नासा एम्स रिसर्च सेंटर में पावर्ड-लिफ्ट कम्प्यूटेशनल फ्लुइड डायनामिक्स के क्षेत्र में काम शुरू किया। उनका शोध “जमीनी प्रभाव” में हैरियर जैसे विमान के आसपास आने वाले जटिल वायु प्रवाह के अनुकरण पर केंद्रित था।1993 में, कल्पना चावला ओवरसेट मेथड्स इंक, लॉस अल्टोस, कैलिफोर्निया में वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में अन्य शोधकर्ताओं के साथ एक टीम बनाने के लिए शामिल हुईं, जो शरीर की कई समस्याओं को हल करने के अनुकरण में विशेषज्ञता रखती हैं। वे वायुगतिकीय अनुकूलन करने के लिए कुशल तकनीकों के विकास और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार थीं।
Kalpana Chawla Life Story | कल्पना चावला का जीवन परिचय
दिसंबर 1994 में, उन्हें नासा द्वारा चुना गया और मार्च 1995 में अंतरिक्ष यात्रियों के 15 वें समूह में अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार के रूप में जॉनसन स्पेस सेंटर को रिपोर्ट किया गया। प्रशिक्षण और मूल्यांकन का एक वर्ष पूरा करने के बाद, उसे अंतरिक्ष यात्री कार्यालय ईवीए/रोबोटिक्स और कंप्यूटर शाखाओं के लिए तकनीकी मुद्दों पर काम करने के लिए चालक दल के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया।20 नवंबर, 1997 को, कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला (Kalpana Chawla Biograph) थीं, जब अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी। उसने STS-87 (1997) और STS-107 (2003) पर उड़ान भरी, अंतरिक्ष में 30 से अधिक दिनों तक प्रवेश किया।
चावला 16-दिवसीय अनुसंधान मिशन (16 जनवरी से 1 फरवरी, 2003) पर छह सदस्यीय चालक दल का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य सूर्य की बाहरी वायुमंडलीय परतों का अध्ययन करने के लिए एक मुक्त उड़ान उपग्रह जारी करना था। कोलंबिया के कार्गो बे में लगाए गए प्रायोगिक वाहक में विभिन्न प्रकार के उच्च-तकनीकी उपकरण थे, जो यह अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किए गए थे कि अंतरिक्ष का भारहीन वातावरण विभिन्न भौतिक प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावित करता है।दिसंबर 1994 में, उन्हें नासा द्वारा चुना गया और मार्च 1995 में अंतरिक्ष यात्रियों के 15 वें समूह में अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार के रूप में जॉनसन स्पेस सेंटर को रिपोर्ट किया गया। प्रशिक्षण और मूल्यांकन का एक वर्ष पूरा करने के बाद, उसे अंतरिक्ष यात्री कार्यालय ईवीए/रोबोटिक्स और कंप्यूटर शाखाओं के लिए तकनीकी मुद्दों पर काम करने के लिए चालक दल के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया।
कल्पना चावला की पहली अंतरिक्ष यात्रा | Kalpana Chawla First Antrix Yatra
20 नवंबर, 1997 को, कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं, जब अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी थी। उसने STS-87 (1997) और STS-107 (2003) पर उड़ान भरी, अंतरिक्ष में 30 से अधिक दिनों तक प्रवेश किया।चावला 16-दिवसीय अनुसंधान मिशन (16 जनवरी से 1 फरवरी, 2003) पर छह सदस्यीय चालक दल का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य सूर्य की बाहरी वायुमंडलीय परतों का अध्ययन करने के लिए एक मुक्त उड़ान उपग्रह जारी करना था। कोलंबिया के कार्गो बे में लगाए गए प्रायोगिक वाहक में विभिन्न प्रकार के उच्च-तकनीकी उपकरण थे, जो यह अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किए गए थे कि अंतरिक्ष का भारहीन वातावरण विभिन्न भौतिक प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावित करता है।
12 सितंबर, 2002 को भारत द्वारा लॉन्च किया गया श्रृंखला का पहला उपग्रह, “मेटसैट -1”, अब “कल्पना -1” के नाम से जाना जाएगा। जैक्सन हाइट्स, क्वीन्स, न्यूयॉर्क शहर के “लिटिल इंडिया” खंड में 74वीं स्ट्रीट का नाम उनके सम्मान में 74वीं स्ट्रीट कल्पना चावला वे रखा गया है।उनकी इच्छा के आधार पर, दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं पर $3,00,000 का फंड स्थापित किया गया था। नेशनल ऑडबोन सोसाइटी के साथ मिलकर “कल्पना चावला फंड फॉर एनवायर्नमेंटल स्टीवर्डशिप” भी स्थापित किया गया है।
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About: Kalpana Chawla Biography in Hindi
Kalpana Chawla Biography:-कल्पना चावला की विरासत हमेशा के लिए कायम है और आसपास के लोगों को प्रेरित करती रहती है। नासा ने उन्हें मंगल ग्रह पर एक क्षुद्रग्रह, एक चंद्र गड्ढा और एक पहाड़ी के नाम से सम्मानित किया था। उसके पास NYC में एक सड़क है जो उनके नाम पर है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज की महिला छात्रावास कल्पना चावला के नाम पर है। कल्पना चावला स्मारक 2010 में अर्लिंगटन में टेक्सास विश्वविद्यालय द्वारा बनाया गया था।
चावला ने वहां अपनी मास्टर डिग्री हासिल की। उस नाम का एक वाणिज्यिक कार्गो अंतरिक्ष यान 2020 में लॉन्च किया गया था।उनके निधन के बाद चावला को कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर मिला। वह भारत में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में पूजनीय हैं। चावला के लिए प्रशंसा और पहचान की सूची अंतहीन है। वह अपने साथ डीप पर्पल, हरिप्रसाद चौरसिया और नुसरत फतेह अली खान जैसे कलाकारों की पसंदीदा सीडी लेकर अंतरिक्ष में गईं। चावला ने कहा, “जब आप सितारों और ब्रह्मांड को देखते हैं, तो आपको लगता है कि आप सिर्फ जमीन के किसी एक टुकड़े से नहीं, बल्कि सौर मंडल से हैं,” अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के बाद।
FAQ’s Kalpana Chawla Biography in Hindi
Q.
कल्पना चावला को क्या सम्मान मिले?
उन्हें भारत और अमेरिका दोनों देशों में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके नाम पर कई डाक टिकट जारी किए गए।
8. होम ❯ सामान्य ज्ञान ❯ जीवनी ❯ विश्व की प्रसिद्ध महिलाएं ❯ कल्पना चावला का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी इस अध्याय के माध्यम से हम जानेंगे कल्पना चावला (Kalpana Chawla) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस विषय में दिए गए कल्पना चावला से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। Kalpana Chawla Biography and Interesting Facts in Hindi. कल्पना चावला भारतीय-अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन की विशेषज्ञ थी। इनका जन्म भारतीय राज्य हरियाणा के करनाल में हुआ था। यह भारत की पहली ऐसी महिला थी, जिन्होंनें अन्तरिक्ष में उड़ान भरी थी। यह भारत की ऐसी महिला थी, जिनके हौसलें बुलंद और इरादे नेक थे। इन्होनें अपने बचपन से ही अन्तरिक्ष में उड़ान भरने के सपने देखे थे, जिसे इन्होनें बाद में पूरा कर एक इतिहास रच दिया और भारत की पहली ऐसी महिला बन गई जिसने अन्तरिक्ष में उड़ान भरी थी। कल्पना ने अपनी प्राथमिक शिक्षा “टैगोर पब्लिक स्कूल” से प्राप्त की जिसके बाद आगे की “वैमानिक अभियान्त्रिकी” शिक्षा उन्होनें पंजाब इंजिनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से प्राप्त की थी। इसके बाद वर्ष 1982 में उन्होनें अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की और अमेरिका के लिए रवाना हो गई। वर्ष 1984 वैमानिक अभियान्त्रिकी में विज्ञान निष्णात की उपाधि टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से प्राप्त की, और वर्ष 1986 में दूसरी विज्ञान निष्णात की उपाधि पाई। साल 1988 में कोलोराडो विश्वविद्यालय बोल्डर से वैमानिक अभियंत्रिकी में विद्या वाचस्पति की उपाधि पाई और अंत में उन्होनें वर्ष 1988 से नासा के “एम्स अनुसंधान केंद्र” के लिए ओवेर्सेट मेथड्स इंक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू कर दिया और वहाँ ” वी/एसटीओएल में सीएफ़डी” पर अनुसंधान किया। 1988 में, उन्होंने नासा एम्स रिसर्च सेंटर में काम करना शुरू किया, 1993 में, वह ओवरसेट प्रेसीडेंट, इंक। में उपाध्यक्ष और अनुसंधान वैज्ञानिक के रूप में शामिल हुईं, जो शरीर की कई समस्याओं को हल करने के सिमुलेशन में विशेषज्ञता रखती थी। चावला ने हवाई जहाज, ग्लाइडर्स और कमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए सिंगल और मल्टी इंजन वाले हवाई जहाज, सीप्लेन और ग्लाइडर्स के लिए सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर अभ्यास किया। अप्रैल 1991 में एक प्राकृतिक अमेरिकी नागरिक बनने के बाद, चावला ने नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर के लिए आवेदन किया। वह मार्च 1995 में वाहिनी में शामिल हुईं और 1996 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुनी गईं। उसका पहला अंतरिक्ष अभियान 19 नवंबर, 1997 को शुरू हुआ, जिसमें छह-अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में उड़ान भरी, जो अंतरिक्ष शटल कोलंबिया की उड़ान एसटीएस -87 से उड़ान भरी थी। चावला अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय महिला थीं। अंतरिक्ष के भारहीनता में यात्रा के दौरान उसने निम्नलिखित शब्द बोले, ""आप सिर्फ आपकी बुद्धिमत्ता हैं।"" अपने पहले मिशन पर, चावला ने पृथ्वी की 252 कक्षाओं में 10.4 मिलियन मील (16737177.6 किमी) की यात्रा की, जो अंतरिक्ष में 372 घंटे (15 दिन और 12 घंटे) से अधिक की दूरी पर प्रवेश करती है। एसटीएस -87 के दौरान, वह स्पार्टन सैटेलाइट को तैनात करने के लिए ज़िम्मेदार थी, जिसने सैटेलाइट को पकड़ने के लिए विंस्टन स्कॉट और ताकाओ दोई द्वारा स्पेसवॉक की आवश्यकता थी। पांच महीने की नासा जांच ने सॉफ्टवेयर इंटरफेस और फ्लाइट क्रू और ग्राउंड कंट्रोल की परिभाषित प्रक्रियाओं में त्रुटियों की पहचान करके चावला को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। एसटीएस -87 उड़ान के बाद की गतिविधियों के पूरा होने के बाद, अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करने के लिए चावला को अंतरिक्ष यात्री कार्यालय में तकनीकी पदों पर नियुक्त किया गया था। 2001 में, कल्पना चावला को STS-107 के चालक दल के हिस्से के रूप में उनकी दूसरी उड़ान के लिए चुना गया था। इस मिशन को शेड्यूलिंग संघर्ष और तकनीकी समस्याओं जैसे जुलाई 2002 में शटल इंजन फ्लो लाइनर्स में दरार की खोज के कारण बार-बार देरी हुई। 16 जनवरी, 2003 को, चावला आखिरकार अंतरिक्ष में रहने वाले एसटीएस -107 मिशन पर अंतरिक्ष शटल कोलंबिया में वापस आ गई। चालक दल ने पृथ्वी और अंतरिक्ष विज्ञान, उन्नत प्रौद्योगिकी विकास और अंतरिक्ष यात्री स्वास्थ्य और सुरक्षा का अध्ययन करने वाले लगभग 80 प्रयोग किए। STS-107, कोलंबिया के 28 वें मिशन के प्रक्षेपण के दौरान, फ़ोक इंसुलेशन का एक टुकड़ा स्पेस शटल के बाहरी टैंक से अलग हो गया और ऑर्बिटर के बाएं-विंग पर आ गिरा। चौदहवें अनुबंधित नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन साइग्नस अंतरिक्ष यान मिशन ने आईएसएस को आपूर्ति पहुंचाने के लिए उसके बाद ""एस.एस. जीवन परिचय और उपलब्धियां कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला वैज्ञानिक थीं, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और लगन से देश का गौरव बढ़ाया। आइए, उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा पर एक नज़र डालें। कल्पना चावला का जन्म 1 जुलाई 1961 को हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था। बचपन से ही उनकी आकाश की ओर टकटकी लगाए रहने की आदत थी। अंतरिक्ष यान और विमानों को देखना उन्हें रोमांचित कर देता था। यही वह समय था, जब उनके मन में अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का सपना जगा। पढ़ाई में तेज कल्पना ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति करती रहीं। अमेरिका में शिक्षा और उपलब्धियां अपने सपने को साकार करने के लिए कल्पना 1982 में अमेरिका चली गईं। वहां उन्होंने टेक्सास विश्वविद्यालय से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और फिर कोलोराडो विश्वविद्यालय से उसी विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात जीन-पियरे हैरिसन से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी कर ली। अमेरिका की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था NASA में वैज्ञानिक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में योगदान दिया। अंतरिक्ष मिशन में चयन और पहली उड़ान कल्पना की मेहनत और योग्यता को देखते हुए उन्हें साल 1994 में NASA के अंतरिक्ष यात्री दल में शामिल कर लिया गया। साल 1997 में अंतरिक्ष यान कोलंबिया के STS-87 मिशन में वह अंतरिक्ष यात्रा करने वाली पहली भारतीय मूल की महिला वैज्ञानिक बन गईं। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 31 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट बिताए और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया। दूसरा अंतरिक्ष मिशन और दुखद अंत अपनी पहली सफल उड़ान के बाद कल्पना चावला को दूसरी बार अंतरिक्ष यान कोलंबिया के STS-107 मिशन के लिए चुना गया। 1 फरवरी, 2003 को यह यान पृथ्वी के वातावरण में वापस दाखिल हो रहा था, तभी दुर्भाग्यवश एक तकनीकी खराबी के चलते दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में कल्पना सहित चालक दल के सभी सात सदस्य शहीद हो गए। कल्पना चावला: एक प्रेरणा कल्पना चावला भले ही हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनका नाम इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। उन्होंने साबित कर दिया कि सपनों को पाने के लिए कड़ी मेहनत और लगन जरूरी है। वह न केवल भारतीय महिलाओं के लिए बल्कि दुनिया भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। कल्पना चावला की शिक्षा यात्रा उनके जन्म स्थान करनाल, हरियाणा से शुरू होकर अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने तक की एक प्रेरणादायक कहानी है। आइए, उनके शिक्षा सफर पर विस्तार से नजर डालें: प्रारंभिक शिक्षा : उच्च शिक्षा : अमेरिका में शिक्षा (Education in the US): कल्पना चावला की शिक्षा यात्रा कड़ी मेहनत, लगन और अपने सपनों को पूरा करने की जुनून की कहानी है। उन्होंने भारत में इंजीनियरिंग की बुनियाद रखी और फिर अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपना नाम रोशन किया। कल्पना चावला के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 1. कल्पना चावला के बारे में और क्या जानने योग्य है? आप उनकी रुचियों, उनके बचपन के सपनों और अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उनके अनुभवों के बारे में अधिक जान सकते हैं। इसी श्रेणी के और लेख देखें कल्पना चावला कौन थीं? कल्पना चावला एक भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और वैज्ञानिक थीं। वह अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं। 2. कल्पना चावला ने किस क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त की? उन्होंने एयरोनॉटिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त की। 4. कल्पना चावला कौन से शहर की थी? कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को करनाल, हरियाणा में हुआ था | कल्पना चावला युवाओं के लिए एक प्रेरणा क्यों हैं? वह सपनों को पाने के लिए कड़ी मेहनत और लगन का प्रतीक हैं। उन्होंने साबित किया कि महिलाएं भी अंतरिक्ष विज्ञान जैसे जटिल क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। 9. कल्पना नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में चुनी गई तीन महिलाओं में से एक थीं। वह एक कुलीन समूह की सदस्य थी जिसमें दुनिया भर में लगभग 1% लोग ही शामिल हो सकते थे: जिन्हें नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर कार्यक्रम में स्वीकार किया गया था। उसके साथ उड़ान भरने वाली दो महिलाएँ एलीन कोलिन्स (कमांडर) और सुसान हेल्म्स (फ्लाइट इंजीनियर) थीं। Q. कल्पना चावला को मिले पुरस्कार? Ans. कल्पना चावला कितनी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गईं? वह दो बार अंतरिक्ष यात्रा पर गईं। पहली बार 1997 में कोलंबिया के STS-87 मिशन में और दूसरी बार 2003 में कोलंबिया के STS-107 मिशन में। 6. कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को करनाल, भारत में हुआ था। कल्पना चावला 1997 में अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। उन्होंने 1 फरवरी 2003 को अपना जीवन खो दिया, जब अंतरिक्ष शटल कोलंबिया नष्ट हो गया था। कल्पना चावला का जन्म कब हुआ था? Ans. अंतरिक्ष में कल्पना की मौत कैसे हुई? Ans.कल्पना चावला का जीवन परिचय एवं उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
कल्पना चावला का संक्षिप्त सामान्य ज्ञान
नाम कल्पना चावला (Kalpana Chawla) जन्म की तारीख 17 मार्च जन्म स्थान करनाल, हरियाणा (भारत) निधन तिथि 01 फ़रवरी माता व पिता का नाम संजयोती / श्री बनारसी लाल चावला उपलब्धि 1994 - अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला पेशा / देश महिला / अन्तरिक्ष यात्री / भारत कल्पना चावला - अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला (1994)
बचपन का सपना, अंतरिक्ष की उड़ान
कल्पना चावला से जुड़ी रोचक बातें
कल्पना चावला की शिक्षा
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Q.
कल्पना चावला अंतरिक्ष छूने वाली भारतीय बेटी!
Q. उन्हें मरणोपरांत कांग्रेसनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर, नासा स्पेस फ्लाइट मेडल और नासा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
Q.
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